कागजों पर मिलता राज्यपाल पदक..!

कागजों पर मिलता कर्मियों को राज्यपाल पदक..! पदक मिलना तो दूर की बात कर्मियों को नहीं मिला कोई प्रमाण पत्र। पदक नहीं मिलने से जेल अफसरों और कर्मियों में छाई मायूसी। कागजों पर मिलता राज्यपाल पदक..!

राकेश यादव

लखनऊ। सराहनीय कार्य के लिए हमको राज्यपाल पदक मिल चुका है। पदक और प्रमाण पत्र तो नहीं मिला है। शासनादेश में नाम अंकित होना ही राज्यपाल पदक मिलने का प्रमाण है। यह बात प्रदेश कारागार विभाग के सेवानिवृत उप महानिरीक्षक (डीआईजी) ने कही। उन्होंने बताया कि ऐसा सिर्फ उन्ही के साथ नहीं हुआ है। प्रदेश में राज्यपाल पदक से अलंकृत हुए किसी भी अधिकारी और कर्मी को न तो कोई पदक दिया गया है और न ही प्रमाण पत्र। शासन का भेज गया पत्र ही राज्यपाल पदक मिलने का प्रमाण होता है।

प्रदेश सरकार की ओर से विभागों में उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को राज्यपाल पदक से सम्मानित किया जाता है। प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर कर्मियों को यह पदक दिया जाता है। यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से लगातार चल रहा है। इस कड़ी में प्रदेश के कारागार विभाग के दर्जनों की संख्या में जेल अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को राज्यपाल पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के एक दिन पूर्व राज्यपाल पदक दिए जाने की घोषणा कर दी जाती है। सूत्र बताते है कि शासन की ओर से पदक के लिए नाम मांगे जाते है। विभागाध्यक्ष की अगुवाई में गठित कमेटी नामों का चयन कर उनको शासन को भेज दिया जाता है। शासन चयनित नामों को पदक के लिए राजभवन भेज देता है। सूत्रों की माने तो राजभवन की ओर पदक पाने वाले अधिकारियों और कर्मियों की सूची विभागाध्यक्ष को भेज दी जाती है।

आईजी के मंसूबों पर पानी फेर रहे परिक्षेत्र के बाबू….!

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर आईजी जेल की ओर से अधिकारियों और कर्मियों को प्लेटिनम, गोल्ड, सिल्वर (प्रशंसा चिन्ह) बांटे जाते है। इसके लिए मुख्यालय की ओर से परिक्षेत्र के कार्यालयों से नाम मांगे जाते है। सूत्र बताते हैं कि परिक्षेत्र कार्यालयों में तैनात बाबू नाम भेजने में भी जमकर पक्षपात करते है। अच्छा काम करने वाले कर्मियों के नाम काटकर सुविधा शुल्क देने वालों के नाम भेज दिए जाते है। ऐसा पहले कई बार देखा भी जा चुका है। ऐसा इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के लिए मांगे गए नामों में परिक्षेत्र में लंबे समय से जमें बाबू कर आईजी के मंसूबो पर पानी फेरने में लगे हुए हैं।

राजभवन की जारी सूची ही अधिकारियों और कर्मियों का राज्यपाल पदक होता है। इसकी पड़ताल करने के लिए जब राज्यपाल पदक से सम्मानित आधा दर्जन सेवानिवृत अधिकारियों और कर्मियों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि शासन के शासनादेश की जारी सूची में दर्ज नाम ही उनका राज्यपाल पदक है। उन्होंने बताया कि पदक मिले हुए कई साल हो गए उन्हें पदक मिलना तो दूर की बात कोई प्रमाण पत्र तक नहीं दिया गया है। मुख्यालय के अफसरों ने इसे राजभवन का मामला होने की बात कहकर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। कागजों पर मिलता राज्यपाल पदक..!

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