E-20 पेट्रोल पर सरकार का संसद में विस्तृत पक्ष

नई दिल्ली। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि भारत ने 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E-20) का लक्ष्य निर्धारित समयसीमा से लगभग पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है। सरकार के अनुसार, E-20 कार्यक्रम को लागू करने से पहले नीति आयोग (NITI Aayog), SIAM, ARAI, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) सहित विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और विस्तृत परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई थी।

सरकार ने बताया कि वर्ष 2014-15 से अब तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत, 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात का विकल्प, 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी तथा किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय सुनिश्चित हुई है। सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E-20 ईंधन के उपयोग से इंजन फेल होने, फ्यूल पंप खराब होने, जंग लगने, पानी से संबंधित समस्याओं या वाहन के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव जैसी शिकायतों की कोई व्यापक अथवा पुष्ट जानकारी वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल उद्योग संघों या उपभोक्ता संगठनों से प्राप्त नहीं हुई है। सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया मंचों पर उठी आशंकाओं का भी वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण कराया गया, जिसमें ऐसी चिंताओं की व्यापक पुष्टि नहीं हुई। यह जानकारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

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