राजस्थान में स्कूलों में पढ़ाई जारी रखी जाए, लेकिन सतर्कता बरते

राजस्थान में स्कूलों में पढ़ाई जारी रखी जाए, लेकिन सतर्कता बरते।पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने डोटासरा पर सरकारी स्कूलों के हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया।

एस0 पी0 मित्तल

राजस्थान के पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा है कि स्कूलों में पढ़ाई जारी रखी जाए, लेकिन कोरोना संक्रमण के मद्देनजर स्कूलों में सतर्कता बरते। जयपुर और प्रदेश की अन्य निजी स्कूलों में संक्रमित बच्चों के मिलने की खबरों के मद्देनजर देवनानी ने कहा कि किसी भी आशंका को देखते हुए स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता है। जब सरकार ने सभी प्रकार के आयोजनों की छूट दे दी है और सिनेमा घरों तक को खोलने की अनुमति है, तब सिर्फ स्कूलों को बंद नहीं रखा जा सकता। प्रदेश में कोरोना के ताजा हालातों के अध्ययन के बाद ही राज्य सरकार ने गत 17 नवंबर को क्रिकेट का अंतरराष्ट्रीय मैच भी करवा लिया है। देवनानी ने कहा कि कोरोना काल में स्कूलें पहले ही डेढ वर्ष तक बंद रह चुकी हैं। इससे विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है। सरकार को चाहिए कि कोविड-19 की गाइडलाइन की पालना सभी स्कूलों में सख्ती के साथ कराई जाए।

देवनानी ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था को भी जारी रखा जाए। ताकि जो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं वे घर पर ही पढ़ाई कर सके। देवनानी ने कहा कि सतर्कता बरतने में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की मदद ली जाए। देवनानी ने आरोप लगाया कि गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री रहते हुए सरकारी स्कूलों के हालात बिगाड़े। डोटासरा ने अपने राजनीतिक नजरिए से शिक्षकों के तबादले किए, इससे शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। जबकि पूर्व में भाजपा शासन में उनके (देवनानी) शिक्षा मंत्री रहते हुए तबादलों को लेकर एक समान नीति बनाई गई थी। काउंसिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया था। पदोन्नत होने वाले शिक्षकों के समक्ष रिक्त पद रखे गए ताकि वे स्वेच्छा से स्कूल का चयन कर सकें। इस व्यवस्था से विभाग में भ्रष्टाचार समाप्त हो गया। लेकिन डोटासरा ने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। देवनानी ने कहा कि नवनियुक्त शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला सज्जन इंसान हैं।

उम्मीद की जानी चाहिए कि शिक्षकों के तबादलों में ईमानदारी और पारदर्शिता देखने को मिलेगी। देवनानी ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोल कर कांग्रेस सरकार फिलहाल अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन आने वाले दिनों में इन स्कूलों की स्थिति का पता चलेगा। देवनानी ने कहा कि सरकार अंग्रेजी माध्यमों के स्कूल तो खोल रही हैं, लेकिन अंग्रेजी जानने वाले शिक्षकों को तैयार नहीं कर रही। यदि योग्य शिक्षक ही नहीं होंगे तो फिर इन अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का क्या होगा? देवनानी ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में नियुक्त होने वाले शिक्षकों को स्वयं को अच्छी अंग्रेजी आनी चाहिए।

अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के अभाव में शिक्षक बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ होंगे। देवनानी ने कहा कि इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण का अभियान चलाने की जरूरत है। यदि शिक्षकों के अध्यापन कार्य को सुदृढ़ बनाया जाए तो फिर अंग्रेजी स्कूलों के परिणाम भी अच्छे रह सकते हैं। चूंकि अभिभावकों का आकर्षण भी अंग्रेजी स्कूलों के प्रति है, इसलिए वे सरकार के अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अपनी बच्चियों को प्रवेश दिलाना चाहते हैं। सरकारी स्कूल तभी निजी स्कूलों के मुकाबले में खड़े होंगे, जब शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भागीदारी होगी। देवनानी ने कहा कि भाजपा के शासन में विवेकानंद मॉडल स्कूल पूरी तैयारी के साथ खोले गए थे। यही वजह रही कि अंग्रेजी माध्यम के इन स्कूलों के परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button