क्या देश की नई पीढ़ी ने सत्ता को झुकने पर मजबूर कर दिया? क्या छात्रों और Gen Z के लगातार विरोध के आगे आखिरकार केंद्र सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा? और क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवा शक्ति की सबसे बड़ी जीत माना जा सकता है? शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नई पीढ़ी की जीत। जेन जी के सामने भाजपा की अहंकारी सरकार को झुकना पड़ा।इन सवालों पर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ इसे युवाओं के संघर्ष की जीत बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे सरकार की राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नई पीढ़ी की जीत है। इंकलाब की जीत है। भाजपा की अहंकारी सरकार को जेन जी के सामने झुकना पड़ा। इस्तीफे की खबर ने नई पीढ़ी में ऊर्जा भरने का काम किया है। यह खबर जहां-जहां पहुंची है लोगों ने खुशियां मनायी है।अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने जिद क्यों किया? छात्र-नौजवानों, बच्चों से बात करके इस्तीफे का फैसला पहले हो जाना चाहिए था। जब नीट पेपर लीक हुआ। कई बच्चों की जान चली गयी तभी इस्तीफा ले लेना चाहिए था। सरकार ने स्वीकार किया कि परीक्षा लीक हुई थी। लेकिन फिर भी सरकार मैनेजमेंट में लगी रही।
शनिवार को आजमगढ़ में मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जेन जी की ताकत के सामने सरकार को झुकना पड़ा। जेन जी की ताकत को देकर हमेशा कैमरे के सामने बोलने वाले प्रधानमंत्री जी को मोबाइल के सामने आना पड़ा। मोबाइल को टेढ़ा करना पड़ा। मोबाइल को टेढ़ा करके अपनी भाषा, व्यवहार बदलना पड़ा, भाषण देना पड़ा। एक ही बार नहीं, दो बार आना पड़ा। नई पीढी के लोग रात में जागते है, प्रधानमंत्री को रात में आना पड़ा। वैसे तो उनका भाषण शाम आठ बजे होता था, इस बार 12 बजे के बाद आना पड़ा। अखिलेश यादव ने कहा कि यह नई पीढ़ी की बड़ी जीत है। सरकार को समझना चाहिए।
प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। परीक्षाओं के पेपर लीक न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। इस आन्दोलन से सबक सीखना चाहिए कि किसी परीक्षा का पेपर लीक न हो। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नकारात्मक राजनीति करती है। उसके लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च करती है लेकिन युवा पीढ़ी ने ऐसे नारे बनाए, पोस्टर बनाए जिनके बारे में तमाम लोग सोच ही नही सकते। यह आन्दोलन युवाओं, सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से देश भर में फैला। उसकी वजह से अन्ततोगत्वा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली भाजपा, उसके संगी-साथी, अनरजिस्टर्ड लोगों को झुकना पड़ गया।



