UP के विकास से बनेगा विकसित भारत:मुख्यमंत्री

झांसी में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का विकास उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ा है और उत्तर प्रदेश तभी विकसित होगा, जब झांसी सहित प्रदेश का प्रत्येक जनपद विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास से भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल हो रहा है। उन्होंने रक्षा उत्पादन, डिफेंस कॉरिडोर, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे, फ्रेट कॉरिडोर और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड अब पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक बन रहा है।

झांसी/लखनऊ। दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता भारत के प्रधानमंत्री ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में देश में सबसे अधिक कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाया है। भारत तब विकसित होगा, जब उत्तर प्रदेश विकसित होगा। उत्तर प्रदेश तब विकसित होगा, जब झांसी समेत प्रदेश के सभी जनपद विकसित होंगे। झांसी तब विकसित होगा, जब प्रत्येक ग्राम पंचायत व नगर निकाय आत्मनिर्भर व विकसित होंगे। क्रान्ति की इस धरा पर विकसित भारत संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आज झांसी में ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकास सर्वसमावेशी होना चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2014 में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास’ मंत्र देशवासियों को दिया था। जब 140 करोड़ भारतवासियों का विश्वास व प्रयास जुड़ेगा तथा कार्ययोजना बनेगी, तो विकसित भारत बनने में देर नहीं लगेगी। सबके सामूहिक प्रयास से ही अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मन्दिर बना। यह नये व भव्य भारत का राष्ट्र मन्दिर है। यह नये भारत के निर्माण की शुरूआत भी है।


वर्ष 2022 में जब दुनिया इस सदी की सबसे बड़ी महामारी से जूझ रही थी, तब प्रधानमंत्री जी देशवासियों को आगामी 25 वर्षों की कार्ययोजना व विकसित भारत संकल्प से जोड़ रहे थे। उन्होंने देशवासियों से पंचप्रण अपनाने की बात कही थी। इनमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत का सम्मान, देश के शहीदों, सेना के जवानों व वर्दीधारी फोर्स का सम्मान, सामाजिक एकता के लिए कार्य करना तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन करना सम्मिलित है। दुनिया में वही विकसित हुआ है, जो अपने बल पर कार्ययोजना तैयार कर आगे बढ़ा। गुलामी की मानसिकता से कोई व्यक्ति स्वावलम्बी नहीं हो सकता। आत्मनिर्भरता के लिए गुलामी की मानसिकता दूर करना तथा अपनी विरासत का सम्मान करना आवश्यक है। भारत अपनी यात्रा को अनवरत आगे बढ़ा रहा है। हम इसलिए चैन से सोते हैं, क्योंकि हमारे सैनिक माइनस टेम्परेचर में सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। पैरामिलिट्री का जवान नक्सल क्षेत्र में मजबूती के साथ कार्य कर रहा है। पुलिस के जवान सजगता से पेट्रोलिंग कर रहे हैं। इन सभी के प्रति हमारे मन में सम्मान का भाव होना चाहिए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने नागरिक कर्तव्यों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए। जो जिस क्षेत्र में है, उसे उस क्षेत्र में ईमानदारीपूर्वक कार्य करना चाहिए। एक शिक्षक राष्ट्र निर्माण के योग्य नागरिक का निर्माण कर सके, इस उद्देश्य से उसे अपने शिक्षण कार्य को पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ करना चाहिए। व्यापारी को उपभोक्ता के प्रति ईमानदारी से अपना कर्तव्य निर्वहन करना चाहिए। वह कालाबाजारी तथा वस्तुओं के दाम में अनावश्यक वृद्धि न होने दे। समय पर टैक्स जमा करे, यह उसका नागरिक कर्तव्य है। किसान समय पर बीज बोकर समाज का पेट भरने के लिए कृषि कार्य ईमानदारी से करे। यह उसका नागरिक कर्तव्य है।


भारत ने विगत 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जो यात्रा प्रारम्भ की, इसके परिणामस्वरूप आज भारत की गिनती दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था में होती है। दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है। यह दुनिया में सर्वाधिक तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। भारत का इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतरीन हुआ है। यहां की रोड कनेक्टिविटी पहले से बेहतर हुई है। रेलवे तथा एयर कनेक्टिविटी बहुत अच्छी हो गयी है। नमो भारत, वंदे भारत तथा अमृत भारत ट्रेनें चल रही हैं। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भारत आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है। डिफेंस कॉरिडोर बनने से बुन्देलखण्ड का युवा केवल रोजगार ही नहीं प्राप्त करेगा, बल्कि यहां बनने वाली तोप और मिसाइल से दुश्मन थर्रा उठेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया में ब्रह्मोस की ताकत देखी है। यह प्रधानमंत्री जी के ‘विकसित भारत’ विजन का हिस्सा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर झांसी, चित्रकूट, कानपुर, आगरा, लखनऊ, अलीगढ़ में तेजी के साथ विकसित किया जा रहा है। इसमें 37 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हुए हैं। हजारों युवाओं को नौकरी मिल रही है। प्रदेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। पहले बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे मात्र कल्पना था, अब यह मूर्त रूप ले चुका है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर झांसी से होकर जा रहा है। बीडा भारत के सबसे बड़े औद्योगिक शहर के रूप में विकसित हो रहा है। बुन्देलखण्ड में फार्मा पार्क का सपना भी साकार हो रहा है। यहां मेडिकल कॉलेजों का संजाल बिछाया जा रहा है। झांसी, जालौन और ललितपुर में एक-एक मेडिकल कॉलेज बन चुका है। विदेशी आक्रांता हम पर इसलिए हावी हो गए, क्योंकि हम जाति, भाषा, क्षेत्र तथा सम्प्रदाय के नाम पर विभाजित थे। हमारी निष्ठा देश व सनातन धर्म के लिए नहीं, बल्कि स्वयं की जाति के लिए थी। परिणामस्वरूप विदेशी आक्रांता हमें विभाजित कर हम पर राज करते थे। इसलिए हमें एकता पर बल देना चाहिए। जो समाज को जाति के नाम पर बांट रहे हैं, वह समाज के दुश्मन हैं।


पहले भी भारत के विकसित बनने के लिए पर्याप्त संसाधन थे। आज से 02 हजार पूर्व तक दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में जितन धन-धान्य, वैभव तथा समृद्धि थी, उसमें भारत की 44 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। भारत में स्थित तक्षशिला दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय था। वह वृहत्तर भारत के हिस्से में था, दुर्भाग्य से पाकिस्तान में चला गया। कालान्तर में नालंदा, विक्रमशिला विश्वविद्यालय स्थापित हुए। देश के अलग-अलग स्थानों पर अन्य विश्वविद्यालय भी स्थापित हुए। काशी, पश्चिम बंगाल स्थित नवलदीप, दक्षिण भारत में कांची तथा मध्य भारत में उज्जैन ज्ञान की धरोहर थे। देश में स्थित कुम्भ के 04 क्षेत्र परस्पर ज्ञान के आदान-प्रदान, विद्वान व ऋषि परम्परा की भूमि थे। यह केवल स्नान के माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान की धाराओं को आपस में जोड़ने तथा उनके आदान-प्रदान का माध्यम थे।


आज से 400 वर्ष पूर्व तक विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी। सन् 1950 तक आते-आते यह हिस्सा मात्र 02 प्रतिशत रह गया था। मुगलों व अंग्रजों के शासन ने भारत को खोखला कर दिया। भारत को पिछड़ा बनाने के लिए इन्होंने भारत के उद्योगों, कला, कारीगरों तथा परम्परा को अपमानित करने का कार्य किया। भारतीयों के मन में यह भाव पैदा कर दिया कि भारतीय व्यक्ति बेकार तथा बाहरी व्यक्ति ही सब कुछ है। परिणामस्वरूप हमारे मन में गुलामी की मानसिकता बैठ गयी। हमें बताया गया कि जो विदेशी है, वह अच्छा है तथा भारत की वस्तु खराब है। हमने अंग्रेजी भाषा स्वीकार कर संस्कृत तथा अपनी स्थानीय भाषा का तिरस्कार कर दिया। हम अपनी कला, संस्कृति, लोक गाथा, नाटक आदि भूल गए। लोक काव्य हमारी परम्परा की थाती थी, जिसे हमने अस्वीकार कर पॉप गीतों को अपना लिया।


मध्य काल में संत तुलसीदास से कहा गया कि आप अकबर के दरबार में जाइए, वहां आप नवरत्नों में सम्मिलित किए जाएंगे। तुलसीदास जी ने कहा कि उनके राजा केवल श्रीराम हैं। उन्होंने श्रीरामलीला की शुरुआत कर ‘बोलो राजा राम चन्द्र की जय’ का उद्घोष किया। ओरछा में भगवान श्रीराम आज भी राजा के रूप में विराजमान हैं। हम परम्परा व विरासत से विलग होते गए। यही कारण था कि सन् 1947 में देश आजाद होने के बाद जब भारत माता के सपूत लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, तो उनका विरोध किया गया। जब पहले राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए सोमनाथ मंदिर जा रहे थे, तो लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज की। क्योंकि लोगों के मन में गुलामी की मानसिकता हावी हो चुकी थी। यह पहली बार हुआ, जब भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास, प्राण-प्रतिष्ठा तथा धर्म ध्वजा आरोहण कार्यक्रम के लिए स्वयं पधारे। उन्होंने अपने कर-कमलों से तीनों कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। यह विरासत का सम्मान है।


आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हर स्वाधीनता संग्राम सेनानी के स्मारक को सम्मान देना हमारी प्राथमिकता में रहा है। जनप्रतिनिधियों ने अपने गांव, ब्लॉक तथा जनपद में स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्मारकों का पुनरुद्धार कराया। आज अयोध्या, काशी, माँ विन्ध्यवासिनी धाम तथा अन्य तीर्थों का कायाकल्प दिखायी दे रहा है। इस धरा ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के पराक्रम तथा वीरांगना झलकारीबाई के शौर्य को देखा है। राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत रचना के माध्यम से भारत के साहित्यिक आकाश को नयी ऊंचाई देने वाले राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त, सुप्रसिद्ध रचनाकार वृन्दावन लाल वर्मा तथा हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चन्द्र इसी धरा से सम्बन्धित हैं। यहां स्थित झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के किले में पहले की तुलना में व्यापक परिवर्तन दिखायी दे रहा है। जनप्रतिनिधिगण अपने-अपने क्षेत्र में किसी न किसी मंदिर का पुनरुद्धार कर रहे हैं। पूर्व में स्थित ओरछा में राजाराम झांसी को संरक्षण प्रदान करते हैं। पश्चिम में जगत जननी माँ भगवती पीतम्बरा देवी रक्षक के रूप में प्रेरणा प्रदान कर रही हैं। आज सुबह दतिया में पीताम्बरा पीठ में दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


बुन्देलखण्ड के युवाओं को सरकारी नौकरियों से जोड़ा जा रहा है। जब नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाला कोई अभ्यर्थी झांसी के किसी विकासखण्ड का नाम लेता है, तो सुखद अनुभूति होती है। बुन्देलखण्ड का युवा अब पलायन नहीं कर रहा, बल्कि प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अन्तर्गत युवाओं को गारण्टी व ब्याज मुक्त धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। यह सब प्रयास करने से होता है। जब अच्छे लोग चुने जाते हैं, नीति निर्माण होता है, तभी विकास सम्भव होता है। पिछली सरकारें पॉलिसी पैरालिसिस की शिकार थीं। नीयत ठीक न होने से नीति नहीं बना पाते थे। जब नीतियां नहीं बनती थीं, तो उनके क्रियान्वयन का सवाल ही नहीं उठता।


प्रदेश में ‘सबका साथ सबका विकास’ मंत्र के साथ बिना भेदभाव प्रत्येक जरूरतमंद को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। आज से 09 वर्ष पूर्व झांसी में अव्यवस्था व गंदगी देखने को मिलती थी। आज स्वच्छता, रौनक के साथ विकसित झांसी की परिकल्पना साकार होती दिखायी देती है। यही विकसित भारत की संकल्पना की शुरुआत है। हमें स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। भारत तब समृद्ध था, जब परम्परागत खेतीबाड़ी होती थी तथा परम्परागत उद्यम विकास में सहभागी बनता था। जब यह दोनों ताकतें मिलती थीं, तो दुनिया के बाजार में हमारा वर्चस्व स्थापित हो जाता था। ‘एक जनपद एक उत्पाद’ तथा ‘पी0एम0 विश्वकर्मा’ जैसी योजनाएं इसी अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

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