गुजरात की ‘अनजान’ पार्टियों पर करोड़ों की बारिश! चंदे का आंकड़ा 1500 करोड़ पार

लखनऊ। उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय जी पूर्व मंत्री ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) नई दिल्ली के अध्यक्ष को गुजरात से जुड़ी पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों को मिले सैकड़ों करोड़ रुपये के चंदे, उनके वास्तविक स्रोत तथा कर चोरी की आशंका की जांच और उत्तर प्रदेश में ऐसी मुखौटा पार्टियों के उभरने पर रोक के संबंध में जनहित में उपर्युक्त वैधानिक प्रावधानों के तहत आवश्यक जांच एवं कार्रवाई किए जाने के सम्बन्ध में पत्र लिखा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि बीबीसी हिन्दी की 4 सितम्बर 2026 की पत्रकार शुभांगी मिश्रा की पड़ताल में गुजरात से जुड़ी छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPPs) को वर्ष 2023-24 में लगभग रु.1,700 करोड़ का चंदा मिलने, जबकि इन दलों द्वारा लोकसभा चुनाव में केवल 15 उम्मीदवार उतारे जाने का तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार चार दलों के पंजीकृत कार्यालय अहमदाबाद के एक ही क्षेत्र में हैं और शेष दो भी गुजरात में ही स्थित हैं। आम जनमत पार्टी को अकेले लगभग रु.620 करोड़, सत्यवादी रक्षक पार्टी को लगभग रु.330 करोड़, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी को लगभग रु.219 करोड़, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को लगभग रु.200 करोड़, गरीब कल्याण पार्टी को लगभग रु.138 करोड़ और भारतीय नेशनल जनता दल को लगभग रु.191 करोड़ मिलने की बात सामने आई है।

यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) स्वयं RUPPs के माध्यम से बोगस चंदे, गलत कर लाभ, हवाला तथा धन के संदिग्ध आवागमन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक कर चुका है। अतः इस रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों की महज सामान्य जांच नहीं, बल्कि उपलब्ध वैधानिक शक्तियों के तहत विशिष्ट जांच आवश्यक है। अतः आयकर अधिनियम, 1961/2025 तथा उसके अधीन नियमों/लागू प्रावधानों के अंतर्गत यह जांच आवश्यक है कि-

1. चंदा देने वाले व्यक्ति/संस्था वास्तव में वही हैं या उनके नाम का इस्तेमाल किया गया?
2. उनके स्थायी खाता संख्या, आयकर विवरणी, बैंक खातों और आर्थिक क्षमता का घोषित चंदे से मिलान होता है या नहीं?
3. चंदे के बदले कैश वापसी, कमीशन अथवा फर्जी वित्तीय लेनदेन है जिसका उपयोग बैंकिंग चैनलों के माध्यम से बे हिसाब नकदी (accommodation entry) का कोई तंत्र तो नहीं था?
4. इन दलों के वास्तविक बैंक संचालक, अधिकृत हस्ताक्षरी, चार्टर्ड अकाउन्टन्टऔर अन्य मध्यस्थ कौन हैं?
5. क्या अलग-अलग RUPPs के पीछे समान व्यक्ति अथवा वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा है?
6. प्राप्त चंदे, राजनीतिक गतिविधि, चुनावी खर्च और घोषित अन्य खर्चों में कोई असामान्य अंतर तो नहीं है।

जहाँ आवश्यक हो, संबंधित करदाताओं द्वारा लिए गए कर-लाभ कटौतियों और उनके समर्थन में दाखिल दस्तावेजों की भी जांच की जाए तथा गलत दावा पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो। यह भी देखा जाए कि गुजरात में सामने आया यह मॉडल कहीं उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में अज्ञात अथवा मुखौटा संगठनों के माध्यम से धन के इस्तेमाल का रास्ता तो नहीं बना रहा है।

जांच में सामने आने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय सूचना भारत निर्वाचन आयोग के साथ साझा की जाए, ताकि आयोग लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए, 29बी, 29सी तथा अपने रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) और कंट्रीब्यूशन रिपोर्टिंग (अंशदान रिपोर्टिंग) के दिशा निर्देशों के तहत ऐसे दलों के पंजीकरण और वित्तीय अनुपालन के संबंध में आवश्यक सतर्कता बरत सके और बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के ऐसे संगठनों के अबाध पंजीकरण पर भी पुनर्विचार कर सके। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि जागरूक जनता और राजनीतिक दल अब ऐसे मामलों को अनदेखा नहीं करेगी। राजनीतिक दलों को मिलने वाले धन का स्रोत, उसका वास्तविक लाभार्थी और उसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक पारदर्शिता का विषय है।

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