विशेष
विशेष,विशेषता से युक्त,विशिष्ट,असाधारण ।विशेष का मतलब विशेष बेस्ट होता है। विशेष का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब विशेष बेस्ट है। जिसे काफी अच्छा माना जाता है। साहस एक ऐसा मूल्य है जो विषय को उनके डर को दूर करने और प्रतिकूलताओं को दूर करने के लिए नेतृत्व करता है, जो आमतौर पर सार्थक है।
जब व्यक्ति में साहस नहीं होता है, तो वह मुश्किल क्षणों को पार नहीं कर सकता है। असाधारण साहस का प्रदर्शन तब किया जाता है। जब व्यक्ति अपनी सीमाओं से परे जाने या सामान्य माना जाता है। तथ्य यह है कि एक व्यक्ति यह दर्शाता है कि साहस सभी सामान्यता से बाहर है। जो इसे बहुत अलग तरीकों से पहचानता है। इस प्रकार, दुनिया भर में, ऐसे पुरस्कार और पुरस्कार हैं जिनका स्पष्ट उद्देश्य है।शौर्य के विपरीत कायरता है, जो साहस और साहस की कमी है।
यदि कोई ऐसा बच्चा है जो किसी विषय की आंखों के सामने डूब रहा है जो तैरना जानता है, तो बहादुरी से उस व्यक्ति को बचाव की कोशिश करने के लिए खुद को पानी में फेंकने की अनुमति होगी, जबकि कायरता व्यक्ति को बिना हस्तक्षेप किए देखती रहेगी। आज के इस युग में कंप्यूटर का विशेष महत्व है। पिछले कुछ वर्षों से जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का इस्तेमाल होता आ रहा है।
आज के आधुनिक जीवन में मनुष्य जन-जन के सम्पर्क में कंप्यूटर की वजह से ही है। वर्तमान युग में आप कंप्यूटर चलाना जानते हैं। कंप्यूटर ज्ञान से आप अपने बिजनेस, रोजगार को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। किसी भी प्रकार की गणना का कार्य कंप्यूटर की मदद से चंद सेकंडों में कर सकते हैं।
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खतरे में मधुमक्खियां का जीवन..!
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प्रकृति का सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत
महान साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत की जयंती 20 मई पर विशेष… सुमित्रानंदन पंत : प्रकृति का सुकुमार कवि, छायावादी युग का स्तंभ।साहित्य सृजन से लेकर स्वाधीनता आंदोलन के सेनानी, मानवतावादी दृष्टिकोण लोगों के लिए है प्रेरणा पुंज। प्रदीप कुमार वर्मा सुमित्रानंदन पंत आधुनिक हिंदी साहित्य में ‘छायावादी युग’ के श्रेष्ठ कवि थे। सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के उपासक और प्रकृति की सुंदरता का वर्णन करने वाले कवि के रूप में भी जाना जाता है। पंत को ऐसी कविताएँ लिखने की प्रेरणा उनकी अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड से ही मिली। जन्म के छह-सात घंटे बाद ही माँ से बिछुड़ जाने के दुख ने पंत को प्रकृति के करीब ला दिया था। पंत ने सात वर्ष की अल्प आयु में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनकी कविताओं में प्रकृति का सौन्दर्य चित्रण के साथ-साथ नारी चेतना और ग्रामीण जीवन की विसंगतियों का मार्मिक चित्रण देखने को मिलता हैं। यही वजह है कि सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में भी जाना जाता है। यही नहीं पंत जी का साहित्य सज्जन आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय माना जाता है। सुमित्रानंदन पंत का जन्म उत्तराखंड राज्य बागेश्वर ज़िले के कौसानी में 20 मई 1900 को हुआ था। सुमित्रानंदन पंत के पिता कानाम गंगादत्त पंत और माता का नाम सरस्वती देवी था। यह विधाता की करनी ही थी कि पंत के जन्म के कुछ घंटो बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया। जिसके बाद उनका लालन-पोषण उनकी दादी ने किया। बचपन में उनका नाम गुसाईं दत्त था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कौसानी गांव से ही शुरू की। लेकिन हाई स्कूल के समय रामकथा के किरदार लक्ष्मण के व्यक्तित्व एवं लक्ष्मण के चरित्र से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम गुसाई दत्त से बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया। हाई स्कूल के बाद वह वाराणसी आ गए और वहां के जयनारायण हाईस्कूल में शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद सुमित्रानंदन पंत वर्ष 1918 में इलाहबाद चले गए और ‘म्योर कॉलेज’ में बाहवीं कक्षा में दाखिला लिया उस समय पूरे भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। इलाहाबाद में पंत गांधी जी के संपर्क में आए। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने म्योर कॉलेज को छोड़ दिया और आंदोलन में सक्रिय हो गए। इसके बाद वह घर पर रहकर स्वयंपाठी के रूप में हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन करने लगे। इसके साथ ही सुमित्रानंदन पंत अपने जीवन में कई दार्शनिकों-चिंतकों के संपर्क में आए। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और श्रीअरविंद के प्रति उनकी अगाध आस्था थी। वह अपने समकालीन कवियों सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और हरिवंशराय बच्चन से भी प्रभावित हुए। पंत जी के साहित्य में प्रकृति का प्रमुखता से चित्रण मिलता है। इस संदर्भ में पता चलता है कि उनकी मां के स्वर्गवास के बाद प्रकृति की रमणीयता ने पंत जी के जीवन में माँ की कमी को न केवल पूरा किया, बल्कि अपनी ममता भरी छाँह में पंत जी के व्यक्तित्व का विकास किया। इसी कारण सुमित्रानंदन पंत जीवन-भर प्रकृति के विविध रूपों को प्रकृति के अनेक आयामों को अपनी कविताओं में उतारते रहे। यहां यह भी बताना उचित रहेगा की सत्य, शांति, अहिंसा, दया, क्षमा और करुणा जैसे मानवीय गुणों की चर्चा बौद्ध धर्म-दर्शन में प्रमुख रूप से होती है। इन मानवीय गुणों को पंत जी की कविताओं में भी देखा जा सकता है। …
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