“अयोध्या धाम” नामकरण किया जाय

श्याम कुमार

वर्ष 2018 में लम्बे अंतराल के बाद अयोध्या जाना हुआ। जब महंत रामचंद्र परमहंस थे तो उनके पास मैं प्रायः जाता था। वह रामजन्मभूमि मंदिर अभियान के सूत्रधार थे तथा बड़े ही सज्जन एवं सरल स्वभाव के थे। आडम्बर उन्हें छू नहीं गया था। इसी से उनसे निकटता हो गई थी तथा उनसे मिलना एवं वार्तालाप करना सुखद महसूस होता था। वह पाक-कला में प्रवीण थे तथा बड़ा स्वादिष्ट भोजन बनाते थे। जब मैं उनसे मिलने जाता था, वहां मुझे भोजन करना ही होता था। एक बार मैं उनके यहां पहुंचा तो वह रसोई में व्यस्त थे। थोड़ी देर में फारिग होने की बात कहकर उन्होंने बगल के एक कमरे में बैठने को कहा। मैं कमरे में गया तो वहां योगी आदित्यनाथ बैठे हुए थे। उस समय कल्पना नहीं हो सकती थी कि वह कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। उनका प्रखर हिंदू चेहरा माना जाता था। मेरा योगी आदित्यनाथ से विविध विषयों पर वार्तालाप हुआ था। मैंने उनका फोन-नंबर लिख लिया था तथा उस पर कभी-कभी बात हो जाती थी। उस दिन जब मैं अयोध्या पहुंचा तो महंत रामचंद्र परमहंस की बहुत याद आई। जब उनका निधन हुआ था तो मैंने मांग की थी कि सरयू पर निर्मित सेतु का नाम ‘महंत परमहंस सेतु’ रख दिया जाय। लेकिन मेरी उस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मेरी तथा ‘उत्तर प्रदेश नागरिक परिषद’ व ‘रंगभारती’ की ओर से, जिन संस्थाओं का मैं अध्यक्ष हूं, पुनः मांग है कि सरयू पर बने हुए पुल का नाम अयोध्या के प्राणतत्व रहे स्वर्गीय महंत रामचंद्र परमहंस के नाम पर ‘महंत परमहंस सेतु’ रख दिया जाय। मैंने वहां जितने लोगों से बात की, सब मेरे विचारों से सहमत थे। फैजाबाद से अयोध्या की दूरी लगभग दस किलोमीटर है तथा चूंकि अब फैजाबाद का नाम भी अयोध्या कर दिया गया है, इसलिए उससे भ्रम उत्पन्न हो रहा है। उक्त समस्या के निदान के लिए दोनों इकाइयों के नामकरण में अंतर किया जाना चाहिए। यदि फैजाबाद जनपद का नाम ‘अयोध्या’ के बजाय ‘साकेत’ कर दिया जाता तो समस्या न होती। किन्तु अब फैजाबाद शहर का नाम ‘अयोध्या नगर’, अयोध्या जिले का नाम ‘अयोध्या’ तथा पूर्ववर्ती अयोध्या नगरी का नाम ‘अयोध्या धाम’ कर दिया जाय तो भ्रम नहीं उत्पन्न होगा तथा समझने में आसानी होगी।

उत्तर प्रदेश सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। फैजाबाद एवं अयोध्या नगरी पहले जितने गंदगी से भरे दिखाई देते थे, आश्चर्यजनक रूप से इस बार उतने ही साफसुथरे मिले। जब कल्याण सिंह एवं राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो मैंने दोनों को ज्ञापन देकर अनुरोध किया था तथा अपने आलेखों में भी लिखा था कि सर्वाेच्च न्यायालय में जितनी भूमि का विवाद विचाराधीन है, उतनी जगह छोड़कर शेष सम्पूर्ण अयोध्या को इतना सुंदर एवं विकसित कर दिया जाय कि वह बेहद उन्नत व आकर्षक बन जाय तथा देशभर से वहां आने वाले तीर्थयात्री उसकी प्रशंसा करें। मेरा दृष्टिकोण था कि इससे अयोध्या पर्यटन का बहुत बड़ा केंद्र बन जाएगा तथा वहां के लोगों के आर्थिक स्तर के उन्नयन में मदद मिलेगी। भारतीय जनता पार्टी की उन सरकारों ने तो वैसा नहीं किया, किन्तु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या का जबरदस्त कायाकल्प कर रहे हैं। उनकी सरकार ऐसी अनेकानेक योजनाओं पर अमल कर रही है, जो अयोध्या को न केवल अतिविकसित करेंगी, बल्कि उसकी भव्यता विश्वभर में चर्चित होने लगेगी। उसकी विश्व के महत्वपूर्ण पर्यटन-केंद्रों में गणना होने लगेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक खतरे की ओर अवश्य सतर्क रहना चाहिए।

अयोध्या के विकास एवं सुंदरीकरण के लिए जो भी घोषणाएं की गई हैं, उनके रास्ते में सबसे बड़ी समस्या लाल फीताशाही एवं भ्रष्टाचार में डूबी नौकरशाही की हो सकती है। योगी जी ने एक कमाल किया है कि उन्होंने दीपावली पर बहुत विशाल पैमाने पर दीपोत्सव का आयोजन कर विश्व-पटल पर अयोध्या की धूम मचा दी है। वह दीपोत्सव न केवल ‘गिनीज बुक’ में दर्ज हुआ, बल्कि उससे अयोध्यावासियों को त्रेतायुग के उस पुनीत अवसर की अनुभूति हुई, जब भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तथा आनंदित अयोध्यावासियों ने दीपोत्सव मनाया था। योगी आदित्यनाथ के अयोध्या-दीपोत्सव की सम्पूर्ण देश में भारी सराहना हुई है। जब अयोध्या धाम में रामलला का भव्यतम मंदिर तैयार हो जाएगा तो अयोध्या का गौरव पूरे विश्व में विख्यात हो जाएगा।

नेहरू वंश ने इस पवित्र कार्य में शुरू से एक के बाद एक बाधाएं डालीं। यहां तक कि मंदिर-निर्माण के विरुद्ध सर्वाेच्च न्यायालय में दो दर्जन बड़े वकीलों को लगाकर मंदिर का निर्माण रोकने की हरसंभव कोशिश की गई। लेकिन भगवान राम का आशीर्वाद नरेंद्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ को प्राप्त था, इसलिए मंदिर-निर्माण का महान कार्य पूरे उत्साह से सम्पन्न हो रहा है। अयोध्या धाम में रामलला का सुंदरतम मंदिर तो निर्मित हो ही रहा है, अयोध्या में अन्यत्र भगवान राम की उच्चाकार मूर्ति भी स्थापित हो रही है। उसका निर्माण पूरा होने में भी कुछ समय लगेगा। जहां वह मूर्ति स्थापित हो, उसके इर्दगिर्द विशाल क्षेत्र को अत्यंत रमणीक उपवन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। रामलला मंदिर परिसर के साथ वहां भी भगवान राम की पूरी वंशावली अंकित की जानी चाहिए। उक्त प्रामाणिक वंशावली से उन हिंदू-विरोधियों को उत्तर मिल सकेगा, जो रामायण एवं भगवान राम को काल्पनिक मानते हैं। कांग्रेस की मनमोहन सिंह/सोनिया गांधी की सरकार ने तो सर्वाेच्च न्यायालय में अपना लिखित बयान दिया था कि भगवान राम काल्पनिक हैं। तीन वर्ष पूर्व जब मैं रामलला का दर्शन करने पहुंचा था तो तम्बू में उन्हें देखकर यह विचार मन में उठा था- ‘सत्ता धोखे से हथियाकर नेहरू ने षड्यंत्र किया, महलों में हैं नेता अपने, तम्बू में भगवान।

’हनुमानगढ़ी में ऐसा प्रतीत होता है, जैसे हनुमान जी साक्षात दर्शन दे रहे हैं। मुझे याद आया, वहां महंत ज्ञानदास ने रोजा-अफ्तार आयोजित किया था, जिसकी बड़ी आलोचना हुई थी। लोगों ने सवाल किया था कि महंत ज्ञानदास धार्मिक सौहार्दभाव का हवाला देकर हनुमानगढ़ी में रोजा-अफ्तार का आयोजन कर रहे हैं, किन्तु क्या उनमें साहस है कि उसी सौहार्दभाव को बढ़ावा देने के लिए किसी मसजिद में रामकथा या रामकीर्तन का आयोजन करें? जानकी भवन में दर्शन के उपरांत मैं उस कार्यशाला में गया था, जहां मंदिर-निर्माण के लिए पत्थर तराशे जा रहे हैं, उस समय बताया गया था कि प्रथम तल में उपयोग के लिए सारे पत्थर तैयार हो चुके हैं। उस अवधि में अयोध्या में डाॅ. अनिल कुमार जिलाधिकारी थे तथा मंडलायुक्त मनोज मिश्र थे। दोनों मेेरे पूर्व-परिचित थे। अयोध्या में अब तो बहुत बड़े पैमाने पर मंदिर का निर्माण-कार्य चल रहा है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां आते हैं।

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