लखनऊ जेल अधीक्षक व जेलर के खिलाफ होगी कार्रवाई..!

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राकेश यादव

बगैर वारंट के जेल में बंदी रखना दंडनीय अपराध,लखनऊ जेल अधीक्षक व जेलर के खिलाफ होगी कार्रवाई….!

लखनऊ। राजधानी की जिला जेल में बंदियों का समय पर रिहा नहीं किये जाने और बगैर कस्टडी वारंट के जेल में रखे रहना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी जेल अधिकारियों ने एक बंदी का रिहाई आदेश आने के बाद भी उसको समय पर रिहा नहीं किया था। जबकि बंदी को बगैर वारंट के जेल में रखना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। न्यायालय ने इस लापरवाही के लिए अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा था। ऐसे मामले में लापरवाह जेल अफसरों को दंडित किये जाने का प्रावधान है। हकीकत यह है कि जेल अधिकारी कमाई के चक्कर मे नियम और कानून ही भूल गये।


मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी की जिला जेल में बगैर कस्टडी वारंट के बंदी कुलवंत को 17 दिन तक जेल अफसरों ने जेल में बंधक बनाए रखा। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बंदी को रिहा किया गया। यह पहला मामला नहीं है इससे पहले 10 अगस्त 2021 को दुराचार के मामले में बंद विचाराधीन बंदी विशाल का भी अदालत ने रिहाई आदेश भेजा। जेल प्रशासन के पास बंदी का अभिरक्षा वारंट नहीं होने की बात कहकर बंदी की रिहाई नहीं किया था। जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला की बंदी का अभिरक्षा वारंट खो गया। इस वजह से बंदी की रिहाई नहीं किया गया। बताया गया है कि बंदी विशाल 18 मई 2019 से लखनऊ जेल में बंद था। सूत्रों का कहना है कि अदालत ने बंदी का अभिरक्षा वारंट नहीं होने पर बंदी की जेल में प्रवेश व पेशी पर जाने की कार्यवाही के लिए लखनऊ जेल अधीक्षक को न्यायालय में तलब किया था।


सूत्रों का कहना है कि बगैर वारंट के किसी भी बंदी को जेल में रखा जाना दंडनीय अपराध माना जाता है। अभिरक्षा वारंट के बिना बंदी की जेल में आमद ही नियम विरुद्ध है। विचाराधीन बंदी कुलवंत व दुराचार के आरोपी बंदी विशाल की रिहाई आदेश आने के बाद रिहाई नहीं होने के मामलों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। हकीकत यह है कि जेल अधिकारी कमाई के चक्कर में अधिकारी जेल के नियम और कानून ही भूल गए हैं। जेल मुख्यालय का मातहतों अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं है। इस वजह से जेल अधिकारी बंदियों का आर्थिक शोषण करने में जुटे हुए हैं। उधर इस संबंध में जेल अधीक्षक आशीष तिवारी, जेलर योगेश कुमार व अजय राय से बात करने का प्रयास किया तो इन अधिकारियों ने तो फोन ही नहीं उठाया। [/Responsivevoice]

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