उत्तर प्रदेश में जंगलराज सभी सीमाएं पार-पूर्व मुख्यमंत्री


भाजपा सरकार में लगातार शराब माफिया जहर मिलाकर लोगों की जान ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अब पुलिस कर्मियों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। भाजपा राज में कानपुर काण्ड के बाद कासगंज में सत्ता संरक्षित शराब माफिया द्वारा पुलिस टीम पर हमला कर एक सिपाही की हत्या कर दी गई, दारोगा गम्भीर रूप से घायल है। माफिया और सत्ताधीशों के सिंडीकेट ने एक बार फिर अपने फर्ज को अंजाम देने निकले पुलिसकर्मियों के लहू से धरती को रक्त रंजित कर दिया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज सभी सीमाएं पार कर चुका है। भाजपा सरकार की कुनीतियों से समाज का हर वर्ग अपने को प्रताड़ित महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री जब तब अपराध के खिलाफ जीरो टालरेंस का सबक पढ़ते हैं परन्तु हकीकत में कोई उनको भाव नहीं देता है। अपराधी बेखौफ हैं और उन्हें विधिव्यवस्था के तंत्र की जरा भी परवाह नहीं है। कानून व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद और चौपट है।

अम्बेडकरनगर के बसखारी थाना क्षेत्र में ताड़ी पीने से एक ग्रामीण मर गया और दूसरा अस्पताल में जिन्दगी-मौत से जूझ रहा है। आगरा में छापामार कार्यवाही होने के साथ-साथ मथुरा में भी नकली दवाएं पकड़ी गई। फैक्टरी में नकली दवा बनाने वाली मशीने भी पकड़ी गई। गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र में कच्ची शराब, शराब बनाने के उपकरण बरामद किए गए। यह स्थिति लगभग पूरे प्रदेश में है। अपराधी अपना समानांतर राज चला रहे हैं।

राजधानी लखनऊ में महिला उत्पीड़न की घटनाएं थम नहीं रही है। बाबा साहब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ में एक छात्रा से सरेराह छेड़छाड़ हुई, विरोध पर भाई को पीटा गया। सूचना के घंटों बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। आशियाना थाना क्षेत्र में एक युवक की पिटाई के बाद गले से चेन लूट ली गई। अपराध के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों से सम्बन्धित अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की ठोको नीति चल रही है। ठोको नीति के चलते पुलिस बेकसूर जनता को ठोक रही है।प्रदेश में किसान आंदोलन के चलते राजनीतिक उथलपुथल की स्थिति बन गई है। जनता समझ रही है कि नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा करना भाजपा सरकार के वश की बात नहीं रह गई है। इसे सत्ता से हटाने का समय आ गया है। उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी पर जनता का भरोसा मजबूत हुआ है।

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