गुरु दीपक सम ज्ञान के, हरें सब अँधियार। जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
शब्द नहीं बस सीख हैं, जीवन का आधार। गुरु के चरणों में मिला, अनुभव का संसार॥
संशय के वन बीच भी, दिखला दें सत्-द्वार— जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
हार मिले तो धैर्य दें, जीत मिले तो धीर। कर्म-पथों की सीख दे, रखें हृदय गंभीर॥
ज्ञान नहीं केवल कथन, आचरणों का सार— जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
ग्रंथ अनेक पढ़े भले, यदि न बदले ज्ञान। गुरु की वाणी तब बने, जीवन अंतरध्यान॥
सद्भावों की छाँव में, खिलता हर व्यवहार— जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
दीप स्वयं जलता सदा, देता जग को ज्योति। गुरु भी तपकर बाँटते, शिक्षा, प्रेम, प्रीति॥
उनके ऋण से धन्य है, यह मानव-परिवार— जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
‘सौरभ’ गुरु-आशीष से, ऊँचा हो इंसान। विद्या संग संस्कार हों, यह सच्चा सम्मान॥
गुरु दीपक सम ज्ञान के, हरें सब अँधियार। जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥
—– डॉ. प्रियंका सौरभ



