छात्रसंघ को मिले वैधानिक दर्जा। नई पीढ़ी संवाद में प्रदेश में जवाबदेह सरकार का संकल्प, पूर्वांचल में चलेगा अभियान।
लखनऊ/वाराणसी। रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान (रोसा) के तरफ से आयोजित नई पीढ़ी संवाद के छात्रसंघ चुनाव—छात्र राजनीति, लोकतांत्रिक अधिकार और नई पीढ़ी की भूमिका पर आयोजित विशेष सत्र में बीएचयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि सरकारों और विश्वविद्यालय प्रशासन की छात्रसंघ को भंग कर देने की मनमानी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संविधान में छात्रसंघ को वैधानिक दर्जा देने की बात होनी चाहिए।
कहा कि छात्रसंघ छात्रों की आवाज को बुलंद करने, छात्र समस्याओं का लोकतांत्रिक समाधान करने, सामाजिक सरोकार के सवालों पर समझ बनाने और इसके साथ समाज में फैल रही गंभीर सांप्रदायिकता को भी रोकने में मददगार रहे हैं। उन्होंने नौजवानों का आवाहन किया कि अपने लोकतांत्रिक मंच छात्रसंघ और अपने संवैधानिक अधिकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए वह खड़े हो रोसा उनकी पूरी मदद करेगा।
इस सत्र को संबोधित करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विजय शंकर पांडे ने कहा कि दरअसल शिक्षा के बाजारीकरण, निजीकरण, सेमेस्टर प्रणाली, फीस वृद्धि, वित्त पोषित कोर्सेज शुरू करने के जो छात्र विरोधी कार्य सरकारों द्वारा किए जा रहे हैं इस पर प्रतिवाद ना खड़ा हो इसलिए छात्रसंघ को खत्म किया गया है। विशेष सत्र की अध्यक्षता कुंवर सुरेश सिंह और संचालन डाक्टर शम्मी कुमार सिंह व छात्र नेता रोहित राना ने की। विशेष सत्र से पूर्व हुए सत्र वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संवैधानिक लोकतंत्र की चुनौतियाँ और जनआंदोलन की भूमिका पर गाज़ीपुर पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र के हेड रहे प्रोफेसर श्रीकांत पांडे ने विस्तार से अपनी बात रखी।
इसके बाद हुए समापन सत्र को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि विचारधारात्मक बहसों में उलझने की जगह आज जन मुद्दों की राजनीति को खड़ा करना वक्त की जरूरत है। आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में एक जवाबदेह सरकार बनाने के लिए काम करते हुए घृणा एवं बुलडोजर राजनीति के खिलाफ लोकतंत्र की सभी ताकतों के साथ एकताबद्ध होगें।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मीडिया प्रभारी आनंद मिश्रा ने कहा कि नई पीढ़ी संवाद के संदेश को पूरे पूर्वांचल के गांव, कस्बे, विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों तक ले जाया जायेगा।
संवाद में लिए संकल्प में कहा गया कि सभागार में उपस्थित सभी लोग यह महसूस करते हैं कि देश स्तर पर चल रहा एसआईआर मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए नहीं बल्कि नागरिकता को समाप्त करने की कार्रवाई है। देशभर में एसआईआर की संविधान और पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट में कोई व्यवस्था नहीं है। संविधान में महज आपदा की स्थिति में महज किसी विधानसभा के कुछ क्षेत्रों में एसआईआर कराने का प्रावधान है। इसलिए संविधान विरुद्ध जारी एसआईआर को रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून 2023 को खत्म करने पर चल रहे देशव्यापी आंदोलन में रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान शामिल रहते हुए इसे मजबूत करने का संकल्प लेता है। बीएचयू छात्रसंघ पूर्व महामंत्री सूबेदार सिंह, पल मिश्रा, शिव कुमार राजभर, अमन कुमार सिंह, शिव जनक गुप्ता, अंकित चौरसिया, निकेश सिंह, हिमांशु गिरी, मुरारी यादव, प्रदीप कुमार मौर्य, शिवांगी पांडेय आदि ने सत्र में बात रखी।



