महिला सशक्तिकरण पर योगी सरकार का बड़ा कदम, हर जिले में बनेगा जेंडर एक्शन प्लान

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, हर जिले में बनेगा जेंडर एक्शन प्लान।यूपी में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए हर जिले में जेंडर एक्शन प्लान बनेगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने 14 दिन में ऋण आवेदनों के निस्तारण और पांच विभागों को लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार ने नई पहल तेज कर दी है। महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक (WEE Index-2.0) के निष्कर्षों के आधार पर अब प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जेंडर एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। इसके तहत महिलाओं की रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता में भागीदारी बढ़ाने के लिए विभागवार लक्ष्य, समय-सीमा और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित बैठक में महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक के निष्कर्षों की समीक्षा की गई। बैठक में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में मौजूद कमियों की पहचान, उनके कारणों के विश्लेषण और सुधारात्मक कदम उठाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कम महिला भागीदारी वाले जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक को केवल आंकड़ों के मूल्यांकन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे विभागीय नियोजन और नीतिगत निर्णयों का आधार बनाया जाए। प्रत्येक संबंधित विभाग सूचकांक के आधार पर जनपदवार जेंडर एक्शन प्लान तैयार करेगा। कार्ययोजना में महिलाओं की कम भागीदारी के कारण, समाधान के लिए प्रस्तावित कदम, मापनीय लक्ष्य, समय-सीमा और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन जिलों में महिलाओं की भागीदारी कम अथवा शून्य है, वहां इसके वास्तविक कारणों की पड़ताल की जाए। जागरूकता की कमी, आवागमन की सुविधा, छात्रावास, बाल देखभाल केंद्र, दस्तावेजीकरण और विभागीय क्रियान्वयन जैसी बाधाओं की पहचान कर उनका समाधान किया जाए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की सफल कार्यप्रणालियों को दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा।

महिला उद्यमियों के लिए विशेष पंजीकरण और ऋण शिविर

बैठक में एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं की उद्यमिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि उद्यम (Udyam) पंजीकरण में महिलाओं की कम भागीदारी वाले जिलों में जिला उद्योग केंद्रों, कॉमन सर्विस सेंटर और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विशेष पंजीकरण अभियान चलाए जाएं।

महिलाओं को पंजीकरण प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देने के साथ उन्हें पूरा सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। जिन जिलों में महिला उद्यमियों का पंजीकरण शून्य है, वहां इस स्थिति को समाप्त कर महिलाओं की भागीदारी राज्य के औसत स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा जाएगा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), एक जनपद एक उत्पाद (ODOP), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और अन्य ऋण एवं मार्जिन मनी सहायता योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष ऋण शिविर तथा आवेदन सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने ऋण आवेदनों के निस्तारण की अधिकतम समय-सीमा 14 दिन निर्धारित करते हुए जिला उद्योग केंद्रों और बैंकिंग संस्थानों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए।

पांच विभागों को बनानी होगी परिणाम आधारित कार्ययोजना

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए आगामी चरण में पांच विभागों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें व्यावसायिक शिक्षा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), श्रम, प्राविधिक शिक्षा और ग्राम्य विकास विभाग शामिल हैं।

इन विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से जुड़ी कमियों की पहचान कर स्पष्ट लक्ष्यों और परिणामों के साथ कार्ययोजना तैयार करनी होगी।

इसके साथ ही जिन जिलों में विशिष्ट एमएसएमई क्षेत्रों और ओडीओपी उत्पादों की मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी कम है, वहां क्लस्टर आधारित सहयोग, कौशल प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और उद्यम इनक्यूबेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

WEE Index डैशबोर्ड से होगी हर महीने निगरानी

मुख्य सचिव ने महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक के डैशबोर्ड का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके माध्यम से संकेतकवार प्रगति, जिलों के प्रदर्शन और महिलाओं की भागीदारी में मौजूद अंतर का विश्लेषण किया जाएगा।

प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी और जनपद स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही मासिक समीक्षा की व्यवस्था लागू होगी, ताकि निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष प्रगति का आकलन किया जा सके।

सरकारी योजनाओं में जेंडर आधारित आंकड़े होंगे अनिवार्य

मुख्य सचिव ने सभी विभागीय योजनाओं में जेंडर डेटा एंड डेवलपमेंट (GDD) की अवधारणा शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के निर्माण से लेकर लाभार्थियों के चयन, क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन तक हर चरण में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल किया जाए।

इसके लिए महिला और पुरुष लाभार्थियों के अलग-अलग आंकड़ों का संकलन, सत्यापन और नियमित विश्लेषण अनिवार्य किया जाएगा। इससे योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने और आवश्यक सुधार करने में मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक का मूल उद्देश्य महिलाओं की रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता संबंधी गतिविधियों में वास्तविक भागीदारी बढ़ाना है। इसलिए केवल योजनाओं के संचालन या गतिविधियों की संख्या को सफलता का आधार न मानकर महिलाओं को मिलने वाले वास्तविक लाभ और परिणामों को प्राथमिकता दी जाए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रम डॉ. आशीष कुमार गोयल, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य वी. हेकाली झिमोमी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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