अजय सिंह
लखनऊ। यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतवर्ष सहित दुनिया के करोड़ों लोगों का जीवनस्तर निम्नतम और गरीबी यथावत अग्रसर है। विश्व में सुरसा की तरह मुंह फैलाती हुई गरीबी के निवारण और उन्मूलन के लिए हर साल पूरी दुनिया में 17अक्टूबर को “अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस” मनाया जाता है।
इस अवसर पर सपा नेता डीपी यादव नें कहा कि यह बहुत बड़ी विडंबना ही है कि भारतवर्ष में दिन-प्रतिदिन गरीबों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है,जो कि भारतीय लोकतंत्र तथा जनमानस के लिए बहुत ही अशुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत की लगभग 70% से अधिक संपत्ति पर भारत में मौजूद सिर्फ 1%लोगों का अधिकार है,जो कि अमीर और गरीब के बीच बढ़ती हुई खाई की भयावहता को बिल्कुल स्पष्ट करती है।
भारत में गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर-गरीब में ऊंच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी आदि है। भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 5.5 करोड़ लोग महंगी चिकित्सा व्यवस्था के कारण गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं,गरीबी के दलदल में फंस जाते हैं। गरीबी का कहर भारत में लगातार जारी है। गरीबी के कारण भारत में भुखमरी बढ़ रही है।
वैश्विक भुखमरी सूचकांक की गणना चार संकेतकों कुपोषण,चाइल्ड वेस्टिंग,बाल वृद्धि में रुकावट और बाल मृत्यु दर पर की जाती है।यह बहुत शर्म की बात है कि भारत की तुलना में भारत के पड़ोसी देश अपने नागरिकों को भोजन उपलब्ध कराने में बेहतर स्थिति में हैं।तो यह निश्चित है कि गरीबी बढ़ रही है और भुखमरी तथा बीमारी को भी लगातार बढ़ा रही है। डी.पी. यादव नें कहा कि सभी लोग मिल-जुलकर कोशिश करें कि सबको समान जीवन जीने का अवसर मिले और देश में गरीबी रहित ऊंच-नीच के भेदभाव से परे एक समतामूलक,समाजवादी समाज की स्थापना हो।



