चुनौतियों के बीच नई आर्थिक शक्ति बनते एफटीए

डॉ.जयंतीलाल भंडारी
(ख्यात अर्थशास्त्री)
डॉ.जयंतीलाल भंडारी
(ख्यात अर्थशास्त्री)

यकीनन 20 अक्टूबर, विजयादशमी का दिन भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के सुनहरे अध्याय में भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के लागू होने के दिवस के रूप में ऐतिहासिक बन गया है। इस एफटीए के मद्देनजर कस्टम टैरिफ नियम, 2026 की अधिसूचना के द्वारा 20 अक्टूबर से भारत और न्यूजीलैंड के बीच आयात-निर्यात प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया गया है। यह एफटीए भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।

उल्लेखनीय है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित यह व्यापार समझौता केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा क्षेत्र और श्रम-गहन उद्योगों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलता है। इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय वस्तुओं की सभी श्रेणियों पर सीमा शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को अभूतपूर्व प्रोत्साहन प्राप्त होगा। इस ऐतिहासिक समझौते से भारत के प्रमुख क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक और श्रम-गहन उद्योगों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए सीमा शुल्क समाप्त होने से न्यूजीलैंड में भारतीय जेनेरिक दवाओं, जीवन रक्षक औषधियों और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की पहुंच सस्ती और सुलभ हो जाएगी। इसके अलावा, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद, मसाले, चाय और जैविक उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार पूरी तरह खुल जाएगा। वहीं दूसरी ओर, आईटी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए काम और अध्ययन के नए अवसर बनेंगे, जबकि कपड़ा, चमड़ा और इंजीनियरिंग जैसे एमएसएमई उद्योगों को बल मिलने से देश के भीतर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे।

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड से पहले, 15 जुलाई से लागू हुआ भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारत की आर्थिक कूटनीति के लिए एक युगांतरकारी मोड़ सिद्ध हो चुका है। जिस ब्रिटेन ने कभी भारत पर शासन किया था, आज उसी की अर्थव्यवस्था का भारत एक मजबूत और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 55 से 60 अरब डॉलर के बीच है, जिसे वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन जाने वाली लगभग 99 प्रतिशत भारतीय वस्तुओं पर शून्य सीमा शुल्क लागू किया गया है, जिससे ब्रिटिश बाजार में भारतीय उत्पाद काफी प्रतिस्पर्धी हो गए हैं।

भारत-ब्रिटेन समझौते की एक और बड़ी उपलब्धि सेवा क्षेत्र और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर मिली रणनीतिक राहत है। भारतीय आईटी विशेषज्ञों, डॉक्टरों, वित्तीय विश्लेषकों और इंजीनियरों के लिए ब्रिटेन में कार्य करना अब पहले से कहीं अधिक सुलभ और पारदर्शी हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ऐतिहासिक सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत भारतीय पेशेवरों को ब्रिटेन में रहने के दौरान वहां नेशनल इंश्योरेंस योगदान देने के बाद भारत लौटने पर दोबारा सामाजिक सुरक्षा कर नहीं देना पड़ेगा।

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ध्यान देने योग्य बात यह है कि पिछले 5 वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों को शामिल करते हुए 9 महत्वपूर्ण एफटीए किए हैं। भारत ने दुनिया के प्रमुख देशों एवं आर्थिक ब्लॉकों के साथ कई दूरगामी एफटीए किए हैं, जिनसे देश को महत्वपूर्ण आर्थिक, औद्योगिक और सामरिक लाभ प्राप्त हुए हैं।

पहले प्रमुख समझौते के तहत भारत-यूएई सीईपीए (मई 2022) में यूएई ने भारत के लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य सीमा शुल्क (जीरो ड्यूटी एक्सेस) की सुविधा प्रदान की है। इसके फलस्वरूप वस्त्र, रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी), चमड़ा और इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में भारी उछाल आया है तथा द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुँच गया है। इसके अलावा, भारत-मॉरीशस सीईसीपीए और ओमान सीईपीए ने अफ्रीकी महाद्वीप एवं पश्चिम एशिया में भारतीय कंपनियों तथा सेवाओं के निर्यात को नया आधार दिया है। भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए (दिसंबर 2022) के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया ने भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों (लेबर-इंटेन्सिव सेक्टर्स) जैसे टेक्सटाइल और खेल सामान को तत्काल शुल्क-मुक्त बाजार पहुँच दी है। वहीं, भारत को विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के लिए ऑस्ट्रेलियाई कोकिंग कोल, लिथियम और तांबे जैसे सस्ते व आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे भारतीय उद्योगों की लागत घटी है। इसके साथ ही, भारतीय स्नातकों के लिए 2 से 4 वर्ष का पढ़ाई के बाद काम करने का वीजा (पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा) मिलना आसान हुआ है। स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देशों के साथ भारत-ईएफटीए समझौते के तहत भारत के इतिहास में पहली बार अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार की प्रतिबद्धता शामिल की गई है।

इसके अतिरिक्त, भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच दिसंबर 2026 में औपचारिक रूप से मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। लगभग दो दशकों की लंबी वार्ताओं और वैश्विक व्यापारिक बदलावों के बाद यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के रणनीतिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। यह समझौता केवल माल और सेवाओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटलीकरण में द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देगा।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ के बीच यह साझेदारी दोनों पक्षों को आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी। जहां अमेरिका के साथ व्यापार समझौता का पहला चरण लगभग अंतिम रुप ले चुका है, वहीं कनाडा, आसियान, दक्षिण अफ्रीका, इजरायल आदि देशों के साथ एफटीए वार्ताएं प्रगति पर हैं।

निश्चित रूप से भारत की मुक्त व्यापार समझौतों की डगर काफी तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे देश निर्यात का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है। विश्व भर में पश्चिमी देश अब ‘चीन से इतर’ आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की नीति पर काम कर रहे हैं, ऐसे समय में भारत के एफटीए देश को एक वैश्विक, विश्वसनीय और रणनीतिक सप्लाई चेन हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं। हालांकि, इन एफटीए का पूर्ण लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों के सख्त स्वास्थ्य और तकनीकी मानकों का पालन करना होगा तथा गुणवत्ता और पैकेजिंग में सुधार करना होगा। उम्मीद करें कि भारत के एफटीए का नया व्यापारिक ढांचा वर्ष 2047 तक भारत को एक सशक्त, समृद्ध और ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के सपने को साकार करने में सबसे बड़ा रणनीतिक आर्थिक हथियार सिद्ध होगा।

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