गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध सरकार। प्रधानाचार्यों की भूमिका विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण।
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के विस्तार, नवाचार को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता, संस्कार और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में प्रधानाचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेशीय सम्मेलन एवं शैक्षिक उन्नयन विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानाचार्य केवल विद्यालय के प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने और उनके व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक सुधार और विकास के लिए कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रभाव और जिम्मेदारी का बोध कराया जाए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सामने आने वाली व्यवहारिक समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से मिलने वाला जमीनी फीडबैक सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बेसिक से तकनीकी शिक्षा तक समस्याओं पर चर्चा
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में विधान परिषद में शिक्षक एवं स्नातक क्षेत्र के सदस्यों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक हुई, जिसमें बेसिक, माध्यमिक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठकों से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी समस्याओं को समझने और उनके व्यावहारिक समाधान निकालने में मदद मिलती है।
प्रधानाचार्यों की गरिमा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता
प्रधानाचार्य परिषद की ओर से रखी गई समस्याओं पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानाचार्यों के सम्मान और उनकी गरिमा से जुड़े विषयों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करने के बाद किसी अन्य व्यक्ति के चयनित होकर आने पर पूर्व प्रधानाचार्य को उसी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य करना पड़े तो इससे उनकी गरिमा प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय में शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जाएगी।
विद्यालयों की समस्याओं के समाधान का भरोसा
केशव प्रसाद मौर्य ने विद्यालयों में विद्युत व्यवस्था सहित परिषद के ज्ञापन में उठाए गए अन्य मुद्दों पर भी संबंधित स्तर पर चर्चा कर समाधान का प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा संबंधी सुविधाओं से शिक्षक वर्ग को राहत मिली है। वहीं प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से सहायता प्राप्त विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
विकसित उत्तर प्रदेश के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जरूरी
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसके भविष्य के निर्माण में शिक्षा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आत्मनिर्भरता, नवाचार और संस्कारयुक्त शिक्षा को और मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने प्रधानाचार्यों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराते हुए भविष्य के लिए तैयार करें।
सम्मेलन में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राघवेंद्र पांडे, प्रदेश उपाध्यक्ष मधुबाला, महामंत्री संगठन डॉ. मदन मोहन शंकर, सतीश कथेरिया, मंडल अध्यक्ष बृजेश कुमार तिवारी सहित परिषद के पदाधिकारी, सदस्य और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।



