- राज्यपाल की अध्यक्षता में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय का 31वाँ दीक्षान्त समारोह सम्पन्न।
- सुल्तानपुर एवं बाराबंकी के लिए 300 एवं 200 आंगनबाड़ी किट का वितरण तथा 600 बालिकाओं का निःशुल्क एच0पी0वी0 टीकाकरण।
- समारोह में 1,66,055 विद्यार्थियों को उपाधियाँ व 120 पदक प्रदान किये गये।
- युवाओं से अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग राष्ट्रहित में करने का आह्वान।
- विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का आह्वान।
- नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने की अपील।
- प्रकृति आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर, इसका संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी।
अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या का 31वाँ दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हुआ। समारोह में सभी विद्यार्थियों की उपाधियाँ डिजीलॉकर पर अपलोड की गईं। राज्यपाल जी की प्रेरणा से जनपद सुल्तानपुर के लिए 300 तथा बाराबंकी के लिए 200 आंगनबाड़ी किट प्रदान की गईं। इसके साथ ही प्रदेश में अब तक 74,993 आंगनबाड़ी केन्द्रों को आंगनबाड़ी किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
राज्यपाल जी की प्रेरणा से जनपद सुल्तानपुर एवं बाराबंकी की 600 बालिकाओं को निःशुल्क एच0पी0वी0 टीकाकरण कराया गया। इसके साथ ही प्रदेश में अब तक 5,93,459 से अधिक एच0पी0वी0 वैक्सीन की डोज बालिकाओं को प्रदान की जा चुकी हैं। एच0पी0वी0 टीकाकरण के प्रति जागरूकता एवं प्रोत्साहन के लिए कार्यक्रम अधिकारी को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अपने सम्बोधन में राज्यपाल जी ने उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता माता-पिता, अभिभावकों एवं गुरुजनों के त्याग, परिश्रम और मार्गदर्शन का भी प्रतिफल है।
अयोध्या की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि यह भगवान श्रीराम की पावन जन्मभूमि है, जहाँ से सत्य, सेवा, त्याग, करुणा, मर्यादा एवं लोककल्याण का संदेश मिला। यह भूमि महर्षि वशिष्ठ की ज्ञान-परम्परा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के प्रगतिशील एवं लोकतांत्रिक चिंतन की भी साक्षी रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ दीं।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज 1,66,055 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें लगभग 60 प्रतिशत छात्राएँ हैं। 120 पदकों में से 86 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए, जो लगभग 72 प्रतिशत है। उन्होंने इसे बदलते भारत की नई तस्वीर बताते हुए युवाओं से अध्ययन, अनुशासन एवं लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने उनके प्रशासनिक अनुभव, पारदर्शी एवं निष्पक्ष कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शन विद्यार्थियों को उत्कृष्टता, ईमानदारी, उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रसेवा के आदर्शों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर राज्यपाल जी ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नवाचार एवं नेतृत्व क्षमता राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। भारत की युवा शक्ति विकसित भारत-2047 के संकल्प की आधारशिला है। उन्होंने युवाओं से अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया।

राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। एन0आई0आर0एफ0 इंजीनियरिंग श्रेणी में देश में 138वाँ तथा उत्तर प्रदेश में 18वाँ स्थान और राज्य विश्वविद्यालयों में द्वितीय स्थान प्राप्त करना विश्वविद्यालय की गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता का प्रमाण है। उन्होंने शोध एवं नवाचार में प्रगति की भी सराहना की।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तीन स्वर्ण, दो रजत एवं चार कांस्य पदक अर्जित कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। तकनीकी परिवर्तन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि विश्व चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रहा है। एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, जैव-प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा एवं डेटा विज्ञान भविष्य की महत्वपूर्ण शक्तियाँ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नई तकनीक अपनाने और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य ज्ञानवान, कौशलयुक्त, नवाचारी, अनुसंधानशील, उद्यमी एवं नैतिक मूल्यों से समृद्ध वैश्विक नागरिक तैयार करना है। उच्च शिक्षा में बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, डिजिटल प्रमाण-पत्र, शोध, स्टार्टअप, नवाचार एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया एवं इंडिया एआई मिशन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास युवाओं को रोजगार खोजने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। भारत का सशक्त स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं की प्रतिभा, नवाचार एवं परिश्रम का परिणाम है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं पुरातन धरोहरों की स्वदेश वापसी का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राचीन मूर्तियाँ, शिल्पकृतियाँ एवं पुरावशेष हमारी समृद्ध ज्ञान एवं सांस्कृतिक परम्परा के प्रमाण हैं। भारत सरकार द्वारा इनके पुनर्वापसी के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2021 से 30 जून 2026 तक 615 पुरातन वस्तुएँ भारत वापस लाई गई हैं, जो राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं सांस्कृतिक गौरव का विषय है।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि नशा युवा की शक्ति नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है। यह स्वास्थय, विवेक, आत्मविश्वास और परिवार के विश्वास को प्रभावित करता है। उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने ‘माय भारत’ मंच का उल्लेख करते हुए कहा कि यह युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा एवं नवाचार को राष्ट्रहित से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसर मिल रहे हैं।
राज्यपाल जी ने ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ को सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, कनेक्टिविटी, स्वास्थय, शिक्षा, पर्यटन, आजीविका एवं स्थानीय उद्यमों को सुदृढ़ किया जा रहा है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि प्रकृति आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है और इसका संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक सहित प्लास्टिक प्रदूषण को गंभीर चुनौती बताते हुए युवाओं से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान स्थानीय ज्ञान, नवाचार एवं सामूहिक प्रयासों से संभव है। विद्यार्थियों की शिक्षा समाज की समस्याओं के समाधान का आधार बने। उन्होंने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि नवाचार से अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।
राज्यपाल जी ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से ज्ञान, कौशल, संस्कार, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति, महिला भागीदारी, तकनीकी नवाचार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता के समन्वय से विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का संकल्प साकार होगा।
उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थय, कौशल, आत्मनिर्भरता एवं सम्मान के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
राज्यपाल जी ने काशी एवं आसपास के जनपदों में कार्य कर रही ‘ग्रीन आर्मी’ की महिलाओं के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महिलाओं ने समाज में परिवर्तन का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने तालाबों की खुदाई एवं स्वच्छता, बच्चों को विद्यालय भेजने, जुआ जैसी सामाजिक बुराइयों को रोकने तथा नदियों में स्नान के बाद फेंके गए कपड़ों को निकालकर उन्हें साफ कर उपयोगी उत्पाद तैयार करने जैसे कार्य किए हैं। महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई तथा विभिन्न संस्थाओं से जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि इन महिलाओं के बच्चों को विद्यालय जाने के लिए 100 साइकिल उपलब्ध कराई गईं तथा सूरत के एक सांसद के माध्यम से 1,000 ग्रीन साड़ियां उपलब्ध कराई गईं। स्लीपर चप्पल निर्माण के लिए मशीन खरीदने हेतु जन भवन की ओर से लगभग 8.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। इन महिलाओं को राजभवन आमंत्रित कर सम्मानित भी किया गया है।
राज्यपाल जी ने कहा कि नशामुक्ति अभियान को जनआंदोलन का रूप देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि नशे के लिए धन उपलब्ध हो जाता है, लेकिन बेटियों के स्वास्थय के लिए एच0पी0वी0 वैक्सीन के लिए धन नहीं रहता। उन्होंने लोगों से नशा छोड़ने तथा परिवार एवं समाज को भी नशामुक्त बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि जन भवन परिसर में भी जिन परिवारों में पहले नशे की प्रवृत्ति थी, वे भी अब नशामुक्त हो चुके हैं।
उन्होंने एच0पी0वी0 टीकाकरण अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बालिकाओं के लिए एच0पी0वी0 वैक्सीन टीकाकरण निःशुल्क कर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आगामी 17 सितंबर को माननीय प्रधानमंत्री जी के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक करोड़ बालिकाओं को एच0पी0वी0 वैक्सीन लगाने का लक्ष्य लेकर व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अधिकारियों से भी इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने और अभिभावकों को बालिकाओं के टीकाकरण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि अब तक लगभग 75,000 से अधिक आंगनबाड़ी किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इन आंगनवाड़ी किटों का अच्छा उपयोग हो रहा है और इनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं एवं महिलाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थय, योग, सुरक्षित प्रसव तथा मातृ एवं शिशु देखभाल के संबंध में जागरूक किया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ‘मां-बेटी सम्मेलन’ जैसी पहल प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका का स्वास्थय परीक्षण कराया जाए तथा किशोरियों को पोषण और स्वास्थय के प्रति जागरूक किया जाए।
राज्यपाल जी ने महिलाओं द्वारा लगाए गए पारंपरिक एवं पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक महिला एवं बालिका को स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों से विभिन्न व्यंजन बनाने की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण संबंधी जागरूकता बच्चों के जन्म से पहले ही प्रारंभ होनी चाहिए, ताकि स्वस्थ माताओं से स्वस्थ बच्चों का जन्म हो और उनका समुचित पालन-पोषण सुनिश्चित किया जा सके।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय द्वारा भग्गा लाल कुम्हार को मानद उपाधि प्रदान किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न प्रकार की कलात्मक मूर्तियां एवं पारंपरिक शिल्प तैयार करने वाले ऐसे कलाकारों को सम्मानित करना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि हमारी स्थानीय कला एवं पारंपरिक विधाओं में अपार संभावनाएं हैं। विश्वविद्यालय द्वारा कला एवं शिल्प से जुड़े व्यक्तियों को सम्मानित करना युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने गुजरात में अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान गठित ‘ग्राम श्री’ संस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से स्थानीय कला, शिल्प एवं प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में अपनी विशिष्ट कला, संस्कृति, शिल्प अथवा उत्पाद मौजूद हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। युवाओं एवं महिलाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम स्थापित करने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई सुंदर चित्रकलाओं की भी सराहना करते हुए उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
टीबी उन्मूलन अभियान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में टीबी रोगियों को उपचार एवं पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और चार लाख से अधिक टीबी रोगी स्वस्थ हो चुके हैं।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय की पुस्तकालय व्यवस्था एवं छात्रावास की सुविधाओं की सराहना करते हुए परिसर में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मिलावट से बचने तथा सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूक रहने का भी आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चार शिक्षकों को ‘उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन एवं विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
राज्यपाल जी को जन भवन विद्यालय के लिए 200 पुस्तकों का सेट एवं एक कलर भेंट किया गया।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने सम्बोधन में कहा कि उच्च शिक्षा की दिशा और दशा में व्यापक परिवर्तन आया है। आज उच्च शिक्षा का विस्तार देश के प्रत्येक प्रदेश में हो चुका है और युवाओं के लिए शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, संघर्ष एवं मार्गदर्शन का भी परिणाम है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से शिक्षा को समाज और राष्ट्र की सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री विद्यार्थियों के जीवन की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। डिग्री हाथ में आने के साथ अब जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, विवेक, संस्कार और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ने की अपील की
समारोह के मुख्य अतिथि यू.पी.पी.एस.सी. के चेयरमैन संजय श्रीनेत ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन के शुभारंभ का पर्व है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ चरित्र, सफलता के साथ विनम्रता और तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना को अपने जीवन का आधार बनाएं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 बिजेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय का संक्षिप्त वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्य, संकायाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, स्कूली बच्चे तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।



