आती है जब रात तो, थमता दिन का शोर। चुपके से फिर जागते, मन के सारे छोर॥
आती है जब रात तो, चाँद करे संवाद। तारों की झिलमिल कहे, रहो सदा आबाद॥
आती है जब रात तो, यादें देती साथ। बीते पल की छाँव में, चलती मन की बात॥
आती है जब रात तो, सोते हैं बाजार। जाग-जागकर सोचता, मन अपना संसार॥
आती है जब रात तो, थककर सोए पाँव। नींद ओढ़कर चाँदनी, ढक ले पूरा गाँव॥
आती है जब रात तो, शांत हुआ आकाश। मन के भीतर दीप-सा, जगता कहीं प्रकाश॥
आती है जब रात तो, लौटे पंछी नीड़। माँ की ममता खींचती, दूर हुई सब पीड़॥
आती है जब रात तो, मन करता संवाद। खुद से मिलने की यही, है सुंदर फरियाद॥
आती है जब रात तो, सपनों का संसार। आशाओं के पंख ले, उड़ता मन हर बार॥
आती है जब रात तो, मिटता दिन का भार। हवा सुनाती तब हमें, जीवन का विस्तार॥
आती है जब रात तो, तारों की बारात। नीले नभ की गोद में, सजती सुंदर रात॥
आती है जब रात तो, मन होता गंभीर। अपने भीतर झाँकता, हर मानव ले पीर॥
आती है जब रात तो, लेकर दिन के लेख। क्या पाया, क्या खो दिया, मन कहता है देख॥
आती है जब रात तो, मौन बने संसार। मौन हृदय को दे तभी, गूढ़ प्रश्नों का सार॥
आती है जब रात तो, दीपक देता ज्ञान। छोटी-सी इक रोशनी, हरती घोर अज्ञान॥
आती है जब रात तो, कल का होता भान। नया सवेरा आएगा, लेकर फिर अरमान॥
आती है जब रात तो, जीवन कहता बातअ। अँधियारे के बाद फिर, उजली सदा प्रभात॥



