राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और ट्रस्ट से जुड़े इस्तीफों की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इस पूरे विवाद की सच्चाई क्या है? जांच में अब तक क्या सामने आया है, जिम्मेदारी किसकी तय होगी और श्रद्धालुओं का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

संत कबीर दास जी 1000 वर्ष पहले कह गए थे राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट। अंतकाल पछतायगा, जब प्राण जायेंगे छूट॥ आज वह चरितार्थ हो रहा है क्या भगवान के घर में भी चोरी हो सकती है? क्या करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ? क्या राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी सिर्फ कुछ कर्मचारियों तक सीमित है… या इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा है? और आखिर क्यों… जिस राम मंदिर को लेकर पूरा देश गर्व करता है… आज वही मंदिर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है?
आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे—
- 8 लोगों पर FIR कैसे हुई?
- SIT जांच में क्या सामने आया?
- चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े इस्तीफों की चर्चा क्यों हो रही है?
- विपक्ष क्या आरोप लगा रहा है?
- और आखिर 12 करोड़ का सरयू वाटर मेट्रो क्रूज तीन महीने से घाट पर क्यों खड़ा है?
अंत तक जरूर पढ़े क्योंकि आखिर में कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब हर श्रद्धालु जानना चाहता है।
पूरा मामला कैसे शुरू हुआ?
7 जून 2026… समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहली बार सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई है। इसके बाद लगातार सोशल मीडिया पोस्ट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सवाल उठने लगे। 9 जून को कई सवाल पूछे गए…….13 जून को SIT जांच पर सवाल उ….14 जून को आगरा में भी अखिलेश यादव ने निष्पक्ष जांच और दोषियों से पैसा वसूलने की मांग दोहराई….इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया।….यहीं से मामला पूरी तरह राष्ट्रीय बहस बन गया।
पिछले दो-तीन दिन से कागभुशुंडि की प्रतिमा और चांदी की ईंटें गायब होने की बात सामने आई। 24 जून को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा-अब दान में दिए गए ‘कागभुशुंडि’ के गायब हो जाने की निंदनीय खबर आई है। जिस तरह हर दिन ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी का नया भंडाफोड़ हो रहा है, उसे देखकर नेपाल और बाकी बॉर्डर बंद कर देने चाहिए, जिससे आरोपी फरार न हो सकें।
SIT रिपोर्ट के बाद बड़ा एक्शन
SIT की रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई।…..इसके बाद पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की।…..इनमें टिन्नू यादव समेत कई लोगों के नाम सामने आए। लकिन कई बड़े नाम नहीं आये…..पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। यानी जांच अभी खत्म नहीं हुई है। इसी बीच मंदिर प्रबंधन और चढ़ावा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे।
चंपत राय और ट्रस्ट पर क्यों बढ़ा दबाव?
मामले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर हुई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि हरिद्वार में हुई बैठकों के बाद उन पर दबाव बढ़ा। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। इस बीच यह भी चर्चा रही कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और ट्रस्ट की साख बचाने के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़े। हालांकि जांच एजेंसियां अभी भी पूरे मामले की जांच कर रही हैं। यानी अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दबाव में दिया। इसकी स्क्रिप्ट 8 दिन पहले हरिद्वार में लिखी गई। विश्व हिंदू परिषद की 18 और 19 जून को हरिद्वार में बैठक थी। इसमें अयोध्या से चंपत राय और गोपाल राव शामिल हुए थे। सूत्र बताते हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दोनों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जानकारी ली। चढ़ावे के हिसाब-किताब में हेराफेरी को लेकर दोनों को फटकार लगाई थी। बैठक के बाद चंपत राय पर दबाव बढ़ने लगा। संघ के बड़े पदाधिकारियों ने उनसे दूरी बना ली।
19 जून को सीएम योगी अयोध्या दौरे पर गए थे। उस वक्त चंपत राय को सीएम के कार्यक्रमों से दूर रखा गया था। लगातार किरकिरी और बढ़ते दबाव को देखकर चंपत राय और अनिल मिश्रा ने आखिरकार शुक्रवार को अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया।
पूरी रात चंपत राय के पास RSS और विहिप नेताओं के फोन आए
7 जून को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके 18 दिन बाद ट्रस्ट के 8 लोगों पर FIR हुई। इसमें ट्रस्ट के बड़े चेहरों के नाम नहीं थे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर किरकिरी होने लगी। विपक्षी पार्टियों के लोग बयानबाजी करने लगे कि बड़े लोगों को बचा लिया गया।
चंपत राय के पास RSS और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेताओं के फोन गुरुवार को पूरी रात आते रहे। कुछ नेताओं ने उन्हें इस्तीफा देकर मामला शांत करने की सलाह दी। इसके बाद चंपत राय ने शुक्रवार सुबह पूजा-पाठ किया। फिर मणि रामदासजी की छावनी पहुंचे। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को भी बुलाया। सुबह करीब 11 बजे दोनों ने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
शुरुआती जांच में भूमिका पर सवाल-चढ़ावा चोरी की जांच के लिए बनी SIT की शुरुआती जांच में दान, चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिले। चंपत राय भी संदेह के दायरे में हैं।
FIR और गिरफ्तारियों से बढ़ा दबाव-SIT की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा। इससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
पूर्व ड्राइवर का नाम सामने आने से बढ़ीं मुश्किलें-FIR में चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष का नाम भी शामिल है। आरोप है कि टिन्नू ने मंदिर से जुड़े कुछ लोगों के साथ मिलकर चढ़ावे में हेराफेरी की, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
जांच पर सवाल न उठे, इसलिए इस्तीफा-ट्रस्ट का मानना था कि अगर सीनियर पदाधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कारण उन्होंने जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका देने के लिए पद छोड़ दिया।
राम मंदिर ट्रस्ट की साख बचाने की कोशिश-राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ट्रस्ट नहीं चाहता था कि जांच के दौरान संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, इसलिए पद छोड़ना उचित समझा। संतों की मांग- रामालय ट्रस्ट और निर्माण समिति के खर्च की भी जांच हो

राजनीति भी तेज हो गई
राम मंदिर का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। समाजवादी पार्टी लगातार सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रही है। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने SIT जांच पर भी सवाल उठाए।
वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि अगर FIR हुई है तो आगे क्या कार्रवाई होगी।
अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे में हुई करोड़ों रुपये की कथित चोरी के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला है।
महापाप और करोड़ों भक्तों का अपमान: अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस घटना को करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ धोखा और महापाप बताया है आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर बड़ा हमला बोलते हुए उसे ‘चंदा चोर पार्टी’ करार दिया है। आप नेताओं का आरोप है कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र को भी पैसे कमाने का जरिया बना दिया गया है। पार्टी का दावा है कि 200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित चढ़ावा घोटाले में दर्ज FIR और SIT जांच सिर्फ दिखावा है, जबकि असली साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश की जा रही है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है। इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी ने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग भी उठाई है।
दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद ने इस घटना को दुखद बताया लेकिन कहा कि पूरे ट्रस्ट को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं होगा। VHP नेताओं का कहना है कि जिन लोगों पर आरोप हैं उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
12 करोड़ का वाटर मेट्रो भी चर्चा में क्यों?
इसी बीच एक और मुद्दा तेजी से चर्चा में आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 में श्रद्धालुओं के लिए शुरू किया गया लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत वाला सरयू वाटर मेट्रो क्रूज। बताया जा रहा है कि लगभग 14 किलोमीटर के प्रस्तावित रूट पर चलने वाला यह क्रूज शुरुआती संचालन के बाद लंबे समय से तुलसीदास घाट प खड़ा है। अब लोग सवाल पूछ रहे हैं— आखिर करोड़ों की परियोजना बंद क्यों है?—–क्या तकनीकी समस्या है?—क्या संचालन में आर्थिक दिक्कत है? या प्रशासनिक लापरवाही? इन सवालों के जवाब भी सरकार और संबंधित विभागों को देने होंगे।
राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए यहां पारदर्शिता सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। अगर किसी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए। और अगर किसी पर गलत आरोप लगाए गए हैं तो जांच के बाद सच भी सामने आना चाहिए। क्योंकि भगवान के दरबार में देर हो सकती है… लेकिन न्याय जरूर होता है।
अब सबसे बड़ा सवाल… क्या यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है,या जांच आगे बढ़कर बड़े चेहरों तक भी पहुंचेगी?



