
उत्तर प्रदेश के जनपद हमीरपुर निवासी पीड़ित सौरभ सिंह ने भावुक अपील भारत की 140 करोड़ जनता से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है।
सौरभ सिंह का आरोप है कि उन्हें कथित रूप से खनन माफियाओं और उनसे जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों से गंभीर जान का खतरा है।
पीड़ित ने कहा कि उसके साथ भी भरत तिवारी जैसा एनकाउंटर की साजिश रची जा सकती है।
सिसोलर में कथित खनन माफियाओं का आतंक युवक और उसके परिवार पर हमला, विधवा मां घायल — पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल।
माफियाओं द्वारा हमीरपुर एवं आस-पास के इलाकों के निवासियों कि जान से किया जा रहा खिलवाड़,अवैध खनन से वाटर लेवल कम हो रहा, जमीन कमजोर हो रही हवा पानी दूषित हो रहे एक्सीडेंट का खतरा चरम पर।
उत्तर प्रदेश/ हमीरपुर। सिसोलर थाना क्षेत्र निवासी सौरभ सिंह ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में सक्रिय कथित खनन माफियाओं द्वारा उन पर और उनके परिवार पर सुनियोजित हमला किया गया, जिसमें उनकी विधवा माता घायल हो गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मृगांक शेखर पाठक ने एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सौरभ सिंह का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय कथित खनन माफिया गिरोह की अगुवाई करने वाली महिला उन्नति के संबंध कुछ प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों से हैं, जिनमें CO मौदहा राजकुमार पांडेय, SHO मौदहा संतोष कुमार तथा SHO सिसोलर बृजेश कुमार यादव के नाम प्रमुख रूप से लिए जा रहे हैं। उनका दावा है कि अवैध खनन से जुड़े तथ्यों, वीडियो और अन्य साक्ष्यों को उजागर करने के कारण उनके खिलाफ लगातार मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर झूठे मुकदमे दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया(SCBA) के अधिवक्ता इसरार ने कथित घटनाक्रम को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। आरोप है कि प्रारंभिक बातचीत में जिलाधिकारी (DM) अभिषेक गोयल और पुलिस अधीक्षक (SP) मृगांक शेखर पाठक की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में जब अधिवक्ता द्वारा एडवोकेट उमंग खरखोदिया के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया कि सौरभ सिंह प्रकरण में क्या कार्रवाई हुई, तो कथित रूप से जिलाधिकारी ने कहा कि इस विषय में उन्हें फोन न किया जाए। वहीं पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वयं कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के माध्यम से भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस के इस रवैये से यह संदेह और गहरा हो गया है कि कथित खनन माफियाओं को केवल कुछ पुलिस अधिकारियों का ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी संरक्षण प्राप्त है। सौरभ सिंह का कहना है कि इसी संरक्षण के चलते 16 जून क देर रात लगभग 01:40 AM उनके घर पुलिस भेजी गई, जहां उनकी पत्नी के साथ कथित अभद्र व्यवहार किया गया तथा उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई कि उनका “एनकाउंटर” कर दिया जाएगा।
सौरभ का यह भी आरोप है कि जब इन घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर सार्वजनिक किया गया और मामला व्यापक रूप से चर्चा में आया, तब पुलिस ने अपनी रणनीति बदलते हुए उनके घर के बाहर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि उन्हें जान का खतरा है और सुरक्षा प्रदान की जा रही है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि यह कदम वास्तविक सुरक्षा से अधिक छवि प्रबंधन का प्रयास प्रतीत होता है।
पीड़ित पक्ष की प्रमुख मांगें CO मौदहा राजकुमार पांडेय, SHO मौदहा संतोष कुमार एवं SHO सिसोलर बृजेश कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। कथित खनन माफियाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। संबंधित पुलिस अधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाए।
सौरभ सिंह और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान कर निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जाए। कथित अवैध खनन नेटवर्क एवं उसे संरक्षण देने वाले व्यक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।



