सवालों के घेरे में काकोरी पशु चिकित्सालय

  • सरकारी दवा पर वसूली का आरोप, वीडियो वायरल से मचा हड़कंप।
  • काकोरी पशु चिकित्सालय सवालों के घेरे में, किसानों में आक्रोश।
  • जीरो टॉलरेंस नीति को चुनौती? जांच और कार्रवाई की उठी मांग।

त्रिनाथ शर्मा

लखनऊ। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के खिलाफ लगातार जीरो टॉलरेंस नीति की बात करते रहे हैं, लेकिन राजधानी के काकोरी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय से सामने आए एक कथित वसूली प्रकरण ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में तैनात एक फार्मासिस्ट का कथित रूप से रुपये लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद किसानों और पशुपालकों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह सरकार की पारदर्शी व्यवस्था और मंत्री की सख्त नीति को खुली चुनौती देने जैसा मामला है।

राजधानी के काकोरी स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में तैनात ललित फार्मासिस्ट का कथित रूप से रुपये लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद किसानों और पशुपालकों में नाराजगी व्याप्त है। मामला सामने आने के बाद सरकारी व्यवस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और पशुपालकों का आरोप है कि पशुओं के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाएं लेने के दौरान उनसे 100 से 200 रुपये तक की मांग की जाती है। आरोप है कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है और आर्थिक रूप से कमजोर पशुपालक विरोध करने के बजाय मजबूरी में रुपये देकर दवा लेने को विवश हो जाते हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी संबंधित फार्मासिस्ट को कथित रूप से रुपये लेते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार पशुपालकों को निशुल्क उपचार और दवा उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, तो फिर दवा वितरण के दौरान धन लेने की नौबत क्यों आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे किसानों में नाराजगी और अविश्वास बढ़ रहा है। किसानों का कहना है भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति पर भी सवाल खड़े करता है। क्षेत्रीय नागरिकों और पशुपालकों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। इस सम्बन्ध में जब वायरल वीडियो के संबंध में फार्मासिस्ट ललित से फोन पर बात की गई तो उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वीडियो में जो रुपये लेते हुए दिखाई दे रहे हैं, वह सरकारी दवा के बदले नहीं बल्कि तैनात चिकित्सक द्वारा बाहर से लिखी गई दवाएं बाजार से मंगाने के लिए किसानों द्वारा दिए गए पैसे हैं। उन्होंने दावा किया कि मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

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