
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा ने अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक चाल चल दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नई टीम का ऐलान कर दिया है और इस टीम में जातीय संतुलन का ऐसा समीकरण बनाया गया है, जो सीधे तौर पर 2027 की चुनावी रणनीति को दर्शाता है। राजनाथ सिंह के बेटे की एंट्री से मचा सियासी भूचाल! वहीं सपा से आयी पूजा पाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। PDA बनाम BJP! नई टीम में छिपा चुनावी गणित। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा ने ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की है? क्या राजपूत नेताओं का दबदबा अब भी कायम है? और क्या अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले का जवाब भाजपा अपनी नई टीम के जरिए देने की तैयारी कर रही है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नई कार्यकारिणी में 19 प्रदेश उपाध्यक्ष, 8 प्रदेश महामंत्री और 46 प्रदेश मंत्रियों की नियुक्ति की है। नई टीम को देखकर साफ दिखाई देता है कि भाजपा ने 2027 चुनाव से पहले जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है। सबसे ज्यादा 11 ब्राह्मण नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समाज के एक वर्ग की नाराजगी की चर्चाएं सामने आ रही थीं। ऐसे में भाजपा ने उन्हें बड़ा प्रतिनिधित्व देकर स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाले राजपूत समाज का दबदबा भी कम नहीं हुआ है। नई टीम में 9 राजपूत नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि भाजपा अपने पारंपरिक और प्रभावशाली वोट बैंक को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहती।
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सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह हैं नीरज सिंह। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीँ पंकज सिंह विधायक राजनाथ सिंह के बड़े बेटे को नई कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह पहले से ही नोएडा से विधायक हैं और अब नीरज सिंह की संगठन में एंट्री ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। वहीं सपा से आयी पूजा पाल को भी प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है।
भाजपा ने सिर्फ सवर्ण वोट बैंक पर ही फोकस नहीं किया है। पाल, कुशवाहा, कुर्मी, लोधी और अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण का जवाब माना जा रहा है।हालांकि नई टीम में यादव समाज से केवल एक नेता अनिल यादव को जगह मिली है, जिसको लेकर भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
महिलाओं को भी संगठन में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रियंका रावत, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल और डॉ. कृतिका अग्रवाल जैसी नेताओं को महत्वपूर्ण पद देकर भाजपा ने महिला वोटरों को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
इसके अलावा पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा मोर्चा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के लिए भी नए प्रदेश अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। यानी भाजपा ने बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मनीष दीक्षित को फिर से मीडिया की कमान: प्रदेश अध्यक्ष ने 2017 से लगातार प्रदेश भाजपा की मीडिया टीम की कमान संभालने वाले मनीष दीक्षित को एक बार फिर से अपनी टीम में भी मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि 2027 में होने वाले चुनाव को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया प्रबंधन के लिहाज से दीक्षित के अनुभव को देखते हुए जिम्मेदारी दी है। दीक्षित इससे पहले भी केशव प्रसाद मौर्या, महेंन्द्र नाथ पांडेय, स्वतंत्रदेव सिंह और भूपेंन्द्र चौधरी के कार्यकाल में भी मीडिया प्रभारी के तौर पर काम कर चुके हैं। 2022 में हुए विधानसभा और 2019 और 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में मीडिया प्रबंधन का काम देख चुके हैं।
ये संगठन से हुए बाहर:- उपाध्यक्ष : पंकज सिंह, विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, कांता कर्दम, सलिल विश्नोई, नीलम सोनकर, कमलावती सिंह, सुनीता दयाल, दिनेश कुमार शर्मा, मानवेंद्र सिंह, पदम सेन चौधरी, त्रयंबक त्रिपाठी।
महामंत्री :- गोविंद नारायण शुक्ल, अमरपाल मौर्य, अनूप गुप्ता, सुभाष यदुवंश, राम प्रताप सिंह चौहान।
मंत्री :- डॉ. चंद्रमोहन, मीना चौबे, अंजुला माहौर, शंकर लोधी, डॉ. शकुंतला चौहान, अनामिका चौहान, पूनम बजाज, अमित वाल्मिकी, सुरेश पासी, डीपी भारती।
इनको दोबारा मौका :- पिछली टीम में उपाध्यक्ष रहे सत्यपाल सिंह सैनी, बृज बहादुर, मोहित्त बेनीवाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, देवेश कुमार कोरी के नाम शामिल हैं। महामंत्री रहे संजय राय और राम प्रताप सिंह चौहान को इसी पद पर दुबारा मौका दिया गया है। जबकि विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह भी अपना मंत्री पद बचाने में कामयाब रहे
ये हुए पदोन्नत :- नई टीम के कई पुराने पदाधिकारियों को तरक्की भी दी गई है। इनमें प्रियंका रावत को महामंत्री से उपाध्यक्ष, शंकर गिरी, अर्चना मिश्रा मंत्री से उपाध्यक्ष और अभिजात मिश्रा को मंत्री से महामंत्री पद पर प्रमोट हुए हैं।
नई टीम में ओबीसी पर खास फोकस 64 लोगों की सूची में सबसे अधिक संख्या पिछड़ा वर्ग की है। इस सूची में कुल 30 लोगों के नाम को शामिल किया गया है, जिसमें जाट, यादव, कुर्मी, पाल, शाक्य, गुर्जर, लोधी समेत सभी पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। वहीं, सामान्य वर्ग के 27 लोगों के नाम सूची में हैं। इनमें भी ब्राम्हण, क्षत्रिय, भूमिहार, वैश्य, कायस्थ और त्यागी शामिल हैं। जबकि एसटी वर्ग के छह और एससी वर्ग के एक सदस्य को भाजपा की नई टीम में स्थान मिला है। टीम में विभिन्न जातियों की 12 महिलाएं भी हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा की यह नई टीम 2027 में सत्ता की हैट्रिक दिलाने में सफल होगी? क्या ब्राह्मण, राजपूत और ओबीसी समीकरण बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा, या फिर विपक्ष का PDA फॉर्मूला इस रणनीति पर भारी पड़ेगा?



