प्रमुख सचिव कारागार को नहीं दिखता विभाग का भ्रष्टाचार

  • प्रमुख सचिव कारागार को नहीं दिख रहा विभाग का भ्रष्टाचार।
  • एआईजी जेल बगैर दक्षिणा लिए शासन को नहीं भेजते फाइल!
  • एआईजी जेल की टेबल पर पिछले 20 दिनों से पड़ी जांच रिपोर्ट।
  • विभाग में वसूली के लिए चर्चित एआईजी जेल प्रशासन नहीं उठाते फोन।
राकेश यादव
राकेश यादव

लखनऊ। कारागार विभाग में वसूली के चर्चित अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के आए दिन नए नए मामले प्रकाश में आ रहे हैं। पहली बात तो एआईजी जेल अपने ही अधिकारियों ने नहीं मिलते हैं, वही दूसरी ओर एआईजी कार्यालय से बगैर दक्षिणा लिए कोई फाइल आगे ही नहीं बढ़ती है। पिछले दिनों फरारी के मामले में निलंबित किए गए अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पिछले करीब 20 दिनों से एआईजी जेल प्रशासन की टेबल पर पड़ी हुई इस सच को खुद ही प्रमाणित करती नजर आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि वसूली को लेकर सुर्खियों में बने रहने वाले एआईजी जेल प्रशासन इस कदर बेलगाम हो गए हैं कि वह जवाब नहीं देना पड़े इसलिए सीयूजी फोन तक नहीं उठाते हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक बीते जनवरी माह में 20 दिन के अंतराल में दो जेल से चार कैदियों की फरारी हो गई थी। कन्नौज और अयोध्या जेल में हुई इस घटना में दोनों जेल के अधीक्षक समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि पांच माह पूर्व हुई इन घटनाओं के लिए निलंबित किए गए अधीक्षकों की लंबी प्रक्रिया के तहत जांच हुई। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट मुख्यालय के सुपुर्द कर दी। जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने पर इन निलंबित अधिकारियों की बहाली पर निर्णय होना है।

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लंबी जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद जांच अधिकारी की सौंपी गई यह रिपोर्ट एआईजी जेल प्रशासन के हस्ताक्षर के बाद निर्णय के लिए शासन को भेजी जानी है। सूत्रों का कहना है कि पिछले करीब 20 दिन से यह जांच रिपोर्ट हस्ताक्षर के लिए एआईजी जेल प्रशासन की टेबल पर पड़ी हुई है। सूत्रों की माने तो एआईजी जेल प्रशासन बगैर लेने देन के कोई काम ही नहीं करते है। बताया गया है कि दक्षिणा नहीं मिल पाने की वजह से उन्होंने जांच रिपोर्ट को दबा रखा है। एआईजी की इस तानाशाही का खामियाजा घटना के बाद निलंबित हुए जेल अधीक्षकों को भुगतने के लिए विवश होना पड़ रहा है। उधर इस संबंध में जब एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो की प्रयासों के बाद भी उन्होंने सीयूजी ( 9454418152) फोन नहीं उठाया। प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से जब बात करने की कोशिश की गई तो निजी सचिव अमित गुप्ता ने साहब में मीटिंग में होने की बात कहकर बात कराने से मना कर दिया।

पांच माह बाद भी नहीं हो पाई निलंबित अधीक्षकों की बहाली

कारागार मुख्यालय में तैनात एआईजी जेल प्रशासन की ख़ाऊ कमाऊ नीति की वजह से निलंबन के पांच माह बाद अधीक्षकों की बहाली नहीं हो पाई है। बीते जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में कन्नौज जेल से सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर दो बंदी जेल के चहारदीवारी फांद कर फरार हो गए थे। इसी प्रकार 21 जनवरी को अयोध्या जेल से भी दो कैदी फरार हुए। इन मामलों में अधीक्षक, जेलर समेत कई सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से अधीक्षक बहाली का इंतजार कर रहे है, जबकि निलंबित अधीक्षकों को तीन माह में बहाल किए जाने का शासनादेश है।

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