गौमाता का पा लिया, जिसने सच्चा प्यार। रहे कृपा भगवान की, जीवन हो साकार॥
गौसेवा से मिल रहा, मन को सच्चा चैन। दया, धर्म, सद्भाव से, महके जीवन-नैन॥
गौमाता की छाँव में, मिलता सुख अपार। तन-मन दोनों हो उठें, निर्मल और उदार॥
गौवंशों से प्रेम है, खुशहाली का द्वार। घर-आँगन में तब रहे, सुख-शांति लाभ अपार॥
जहाँ बसे गौमात हैं, बसे वहाँ भगवान। सेवा से मिलता सदा, जीवन को सम्मान॥
गौमाता के चरण में, श्रद्धा जिसका वास। उसके जीवन में सदा, रहता सुख-उल्लास॥
गौसेवा का पुण्य फल, मिलता बारंबार। जीवन की हर राह पर, मिलता शुभ विस्तार॥
दूध, दही, घी दे रही, करती जग उपकार। गौमाता के ऋण तले, झुकता यह संसार॥
गौमाता का मान ही, मानव का सम्मान। दया, धर्म, सेवा बने, जीवन की पहचान॥
गौवंशों के रक्षक ही, कहलाते हैं वीर। दया जहाँ पर बस गई, मिटती हर इक पीर॥
गौमाता का स्नेह है, जीवन का आधार। इसके पावन प्रेम से, होता बेड़ा पार॥
सेवा से गौमात की, निर्मल हो मन-प्राण। हर संकट का मिल सके, सौरभ सहज निदान॥
गौमाता की धूल भी, माने जग उपकार। मान रखा जिसने यहाँ, उसका हुआ उद्धार॥
गौसेवा का भाव हो, निर्मल रहें विचार। द्वेष मिटे, सद्भाव बढ़े, महके घर-संसार॥
गौमाता के नेह से, जीवन हो निष्काम। सेवा का संदेश ही, सबसे सुंदर धाम॥
गौमाता के प्रेम में, छिपा सदा उपकार। दया और ममता मिले, जीवन को आकार॥
गौमाता की वंदना, करती मन उजियार। भक्ति, सेवा, प्रेम से, होता बेड़ा पार॥
गौसेवा से सीखिए, करुणा का व्यवहार। यही मनुज का धर्म है, यही सच्चा सार॥
गौमाता का प्रेम ही, सबसे बड़ा प्रसाद। जिसने पाया नेह यह, हुआ सदा आबाद॥
गौवंशों की कीजिए, तन-मन से रखवाल। सेवा से महके सदा, जीवन की हर डाल॥
गौमाता की शरण में, मिलता सच्चा ज्ञान। दया, धर्म, सद्भाव का, बढ़ता नित सम्मान॥
गौसेवा की भावना, रखिए सदा सँभाल। मानवता के पथ सदा, बनती सुदृढ़ ढाल॥
गौमाता का नाम ले, मिटता मन का भार। श्रद्धा से भर जाए तब, जीवन का विस्तार॥
गौसेवा के भाव से, खिलता हर विश्वास। ईश्वर की कृपा बने, मिलता मधुर प्रकाश॥
गौ माँ के आशीष से, मिटते मन के शूल। प्रेम, दया, सद्भाव के, खिलते सुंदर फूल॥
जिस आँगन में गौ बसे, रहता मंगल गान। सुख-समृद्धि का हो सदा, वहाँ मधुर वरदान॥
गौमाता का मान कर, बढ़ता मानव धर्म। सेवा से ही सार्थक हों, जीवन के सब कर्म॥
गौमाता का पा लिया, जिसने सच्चा प्यार।रहे कृपा भगवान की, जीवन हो साकार॥



