
मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास तथा रोजगार सृजन को औरअधिक व्यापक व परिणामोन्मुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्यकी अर्थव्यवस्था और प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति। श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता। ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विस्तारित किया जाए। कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे, बालश्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों सेजोड़ा जाए और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए। ‘सेवामित्र व्यवस्था’ रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल, तकनीक आधारितऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती। उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीचसंतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा। निर्माण श्रमिकों के लिए सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधाकेन्द्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए। प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजनाकौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, उद्योगों की आवश्यकताओंके अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांगप्रदेश के युवाओं को स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विकस्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सेवायोजन विभाग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिकऔर डिजिटल रोजगार तंत्र के रूप में विकसित किया जाए। रोजगार संगम पोर्टल में ए0आई0 आधारित सेवाओं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउन्सलिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए।
लखनऊ। आज आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में श्रम एवं सेवायोजन विभाग की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और प्रस्तावित योजनाओं की मुख्यमंत्री योगी ने समीक्षा की। बैठक में श्रमिक कल्याण, कौशल विकास तथा रोजगार सृजन को और अधिक व्यापक व परिणामोन्मुखी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये। मुख्यमंत्री जी ने ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विस्तारित करने, ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को और अधिक प्रभावी बनाने, निर्माण श्रमिकों के लिए बड़े शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केन्द्र विकसित करने तथा रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रगति की सबसे बड़ी शक्ति हैं। श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण और बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए। निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्ष 2020 में प्रारम्भ की गई ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ के अन्तर्गत 08 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में योजना 20 जनपदों में संचालित है। मुख्यमंत्री जी ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जनपदों में लागू करने के निर्देश दिए।
योगी ने ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती हैं। इसे और अधिक प्रभावी तथा जनोपयोगी बनाया जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेन्टर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1,097 सेवा प्रदाता, 5,049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री जी ने सरकारी विभागों में भी आवश्यकता के अनुसार सेवामित्र व्यवस्था के उपयोग के प्रस्ताव को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
श्रम विभाग में हुए संस्थागत सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक जहां यह संख्या 14,176 थी, वहीं अप्रैल 2017 के बाद 18,407 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4,860 कारखानों का पंजीकरण किया गया। विभाग को बी0आर0ए0पी0 के क्रियान्वयन में ‘टॉप अचीवर’ के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है तथा उद्योग समागम 2025 में श्रम क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के लिए सभी औद्योगिक शहरों में प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केन्द्रों यानी ‘लेबर अड्डों’ को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन केन्द्रों को केवल श्रमिकों के एकत्रीकरण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि श्रमिक सहायता एवं सुविधा केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बड़ी संख्या में दूसरे क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना को कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि विष्णुपुरी स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला प्रशिक्षण संस्थान प्रस्तावित है, जहां कारपेन्टरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लम्बर, पेन्टर और बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त बेनाझाबर स्थित भूमि पर 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला छात्रावास भी प्रस्तावित है।
रोजगार सृजन को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं को स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि जुलाई, 2025 में गठित ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के माध्यम से युवाओं को देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। रोजगार मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से 27,555 युवाओं का चयन किया गया, जिनमें 2,300 युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार हेतु हुआ।
वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 3,030 रोजगार मेलों और कैम्पस प्लेसमेन्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 3,74,776 अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। इसी अवधि में आयोजित 4,873 करियर काउन्सलिंग कार्यक्रमों में 6,80,469 युवाओं ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रोजगार मेलों को केवल औपचारिक आयोजन न बनाकर उन्हें उद्योगों की वास्तविक मांग और युवाओं की क्षमता से जोड़ा जाए। इसे सरदार वल्लभभाई पटेल इण्डस्ट्रियल एण्ड एम्प्लॉयमेंट ज़ोन से भी जोड़ा जाए। वैश्विक रोजगार अवसरों को लेकर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा विश्वस्तरीय अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम है। बैठक में बताया गया कि जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य सहित विभिन्न देशों में रोजगार की सम्भावनाएं चिन्हित की गई हैं। जापानी, जर्मन और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ करने के लिए समझौते किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सेवायोजन विभाग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और डिजिटल रोजगार तंत्र के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रोजगार संगम पोर्टल में ए0आई0 आधारित सेवाओं, डिजिटल जॉब मैचिंग और ऑनलाइन काउन्सलिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए।






















