
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-
प्रदेश में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों का इण्टर्नशिप भत्ता 4,000 रु0 प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रु0 प्रतिमाह किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश पं0 दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा तथा कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अन्तर्गत संचालित आचार्य नरेन्द्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल, कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में अध्ययनरत पशु चिकित्सा के छात्रों का इण्टर्नशिप भत्ता 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस सम्बन्ध में सम्भावित अतिरिक्त व्यय-भार की पूर्ति विश्वविद्यालय को प्रदत्त शासकीय अनुदान के अन्तर्गत गैर वेतन मद से सम्बन्धित लेखा शीर्ष से की जाएगी।
उत्तर प्रदेश विशाल जनसंख्या, पशु संख्या एवं विस्तृत क्षेत्रफल वाला प्रदेश है। सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश को आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाने हेतु पशुपालन विभाग द्वारा भी समन्वित पशु स्वास्थ्य सुरक्षा एवं चिकित्सा कार्यक्रमों की क्षमता का उपयोग कर पशुओं को स्वस्थ रखने, विभिन्न पशु महामारियों के नियंत्रण एवं उन्मूलन हेतु सघन प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के आर्थिक विकास में अन्य संसाधनों की भांति पशुधन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। मानव स्वास्थ्य के समान ही पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य एवं उन्नत नस्ल के संवर्धन तथा उनकी चिकित्सा/उपचार में पशु चिकित्सकों की महती भूमिका है। प्रस्तावित इण्टर्नशिप भत्ता अनुमोदित होने की स्थिति में तीनों विश्वविद्यालयों में अनुमोदित छात्र संख्या-300 के सापेक्ष सम्भावित अतिरिक्त व्यय-भार 4.20 करोड़ रुपये आएगा। अन्य राज्यों/छात्रों के क्रम में प्रदेश के पशु चिकित्सा के छात्रों को 12,000 रुपये प्रतिमाह इण्टर्नशिप भत्ता दिए जाने पर छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और कार्य के प्रति उनका उत्साहवर्धन भी होगा, जो समानता के सिद्धान्त के अनुकूल भी है।
उ0प्र0 राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत निकायों में आरक्षण प्रदान करने के आशय से पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों की समकालीन, सतत्, अनुभवजन्य जांच व अध्ययन करने और इस प्रकार निर्धारित अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को निकायवार आनुपातिक आरक्षण दिए जाने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इस आयोग में 05 सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, जो पिछड़े वर्गों से सम्बन्धित मामलों का ज्ञान रखते हों। इनमें से एक सदस्य मा0 उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नामांकित किया जाएगा। आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यगणों का कार्यकाल सामान्य तौर पर नियुक्ति से 06 माह का होगा।
मंत्रिपरिषद द्वारा यह निर्णय भी लिया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की नीति में किसी संशोधन/परिवर्तन को मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन से किया जा सकेगा। प्रदेश में ग्रामीण निकायों में राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्राविधानों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों के पदों पर आरक्षण के निर्धारण के सम्बन्ध में कार्यवाही की जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा तत्क्रम में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क तथा धारा-12(5) और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-6क, 7क, 18क व 19क में प्राविधानित व्यवस्था के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन हेतु 02 नियमावलियां-उत्तर प्रदेश पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथासंशोधित) एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथासंशोधित) प्रख्यापित हैं। उक्त दोनों नियमावलियों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों (चेयरपर्सन) एवं स्थानों (सदस्यों) के आरक्षण एवं आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित है।
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क (2) एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा-7क (1) एवं धारा-19क (1) में प्रदत्त प्राविधानानुसार ‘‘राज्य सरकार, आदेश द्वारा त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों एवं पदों को अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित करेगी।’’ राज्य में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की संख्या का अनुपात कुल पदों की संख्या से यथाशक्य वहीं होगा, जो राज्य की अनुसूचित जातियों की या राज्य की अनुसूचित जनजातियों की या राज्य के पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या से है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण त्रिस्तरीय पंचायतों के पदों की कुल संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा एवं यदि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध न हो, तो नियत रीति से सर्वेक्षण करके उनकी जनसंख्या अवधारित की जा सकती है।
डॉ0 राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, लखनऊ के नवीन परिसर (शहीद पथ) में 1,010 बेडेड मल्टी स्पेशियलिटी इमरजेन्सी सेण्टर अस्पताल, टीचिंग ब्लॉक व नवीन ओ0पी0डी0 ब्लॉक की निर्माण प्रायोजना स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने डॉ0 राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, गोमतीनगर विस्तार, सेक्टर-7, लखनऊ स्थित संस्थान के नवीन परिसर (शहीद पथ) में 1,010 बेडेड मल्टी स्पेशियलिटी इमरजेन्सी सेण्टर अस्पताल, टीचिंग ब्लॉक व नवीन ओ0पी0डी0 ब्लॉक के निर्माण कार्य सम्बन्धी प्रायोजना की आकलित लागत 855 करोड़ 04 लाख 34 हजार रुपये मात्र के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
परियोजना के अन्तर्गत हॉस्पिटल भवन में कुल 1,010 बेड की स्थापना के साथ ही, एक नया ओ0पी0डी0 ब्लॉक और 200 सीटों की क्षमता का एक नवीन शिक्षण ब्लॉक का निर्माण कराया जाएगा। यह परियोजना चिकित्सा छात्रों को अत्याधुनिक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराएगी। हॉस्पिटल के निर्माण से रोगियों हेतु चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिसका लाभ सम्पूर्ण प्रदेश के जनमानस को प्राप्त होगा।
राजकीय मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज से सम्बद्ध स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के विस्तार/उच्चीकरण हेतु 31,314 वर्ग मी0 भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में 90 वर्ष के पट्टे पर हस्तांतरित करने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज से सम्बद्ध स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर के विस्तार/उच्चीकरण हेतु चिकित्सालय एवं महात्मा गांधी मार्ग से जुड़ी पूल्ड हाउसिंग की मौजा नीबी बाग, परगना व तहसील सदर स्थित नॉन जेड0ए0 खतौनी फसली सन् 1428 के खाता संख्या-38, 39 तथा 44 में से 31,314 वर्गमीटर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पक्ष में 01 रुपये वार्षिक किराए पर 90 वर्ष के पट्टे पर हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज से सम्बद्ध स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर की स्थापना सन् 1961 में की गयी थी। यह चिकित्सालय प्रयागराज मण्डल का सबसे बड़ा टर्शियरी लेवल का राजकीय चिकित्सालय है, जहां पर समीपवर्ती जनपदों एवं सीमावर्ती राज्य मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में गम्भीर मरीज उच्चस्तरीय उपचार हेतु प्रतिदिन आते हैं।
चिकित्सालय परिसर में चिकित्सा एवं जांच सुविधाओं का विस्तार किए जाने के सम्बन्ध में अतिमहत्वपूर्ण एवं आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाना होगा। इन सुविधाओं के विस्तार हेतु वर्तमान में उपलब्ध चिकित्सालय परिसर के भूखण्ड में रिक्त स्थान उपलब्ध नहीं हैं। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय परिसर के विस्तार/उच्चीकरण से चिकित्सीय उपचार एवं जनपद प्रयागराज व इसके निकटवर्ती जनपदों यथा-प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कौशाम्बी, फतेहपुर, जौनपुर, मीरजापुर, भदोही, बांदा, चित्रकूट के निवासियों को उच्चस्तरीय चिकित्सीय उपचार में सहायता मिलेगी।
लखनऊ मेट्रो परियोजना फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) के एम0ओ0यू0 के निष्पादन के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने लखनऊ मेट्रो फेज़-1 बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) परियोजना की भारत सरकार द्वारा अनुमोदित लागत 5801.05 करोड़ रुपये तथा न्याय विभाग द्वारा संशोधित/विधीक्षित एम0ओ0यू0 के आलेख के अनुसार आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार एवं उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मध्य निष्पादित होने वाले एम0ओ0यू0 एवं इसमें अंकित राज्य सरकार की भूमिका एवं दायित्वों के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
एम0ओ0यू0 को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हस्ताक्षरित किए जाने हेतु प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को मंत्रिपरिषद द्वारा अधिकृत किया गया है। परियोजना के सम्बन्ध में भारत सरकार के परामर्श अथवा अन्य कारणों से भविष्य में किए जाने वाले संशोधनों/परिवर्तनों तथा अन्य बिन्दुओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के दृष्टिगत आवश्यकतानुसार यथोचित निर्णय लेने के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि 05 मार्च, 2024 को सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में लखनऊ मेट्रो परियोजना फेज़-1 बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) की डी0पी0आर0 को अनुमोदित किया गया था। केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पत्र दिनांक 03.09.2025 द्वारा परियोजना की कुल लागत 5801.05 करोड़ रुपये स्वीकृत करते हुए परियोजना पर अनुमोदन प्रदान किया गया। भारत सरकार के उक्त पत्र दिनांक 03.09.2025 के प्रस्तर-9(ग) में उल्लिखित शर्त के अनुसार राज्य सरकार, एकल प्रयोजन साधन (उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) तथा भारत सरकार के मध्य त्रिपक्षीय मेमोरेण्डम ऑफ अण्डरस्टैण्डिंग (एम0ओ0यू0) निष्पादित किया जाना है।
आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मेट्रो कॉरिडोर-।। (आगरा कैण्ट से कालिन्दी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण हेतु भूमि आवंटन/हस्तांतरण के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अन्तर्गत मेट्रो कॉरिडोर-।। (आगरा कैण्ट से कालिन्दी विहार) में मेट्रो स्टेशन एवं वायडक्ट सेक्शन के निर्माण हेतु मौजा चक अव्वल, तहसील सदर, आगरा के खसरा संख्या-618 नजूल भूखण्ड संख्या-1619 में संचालित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय परिसर की पार्क के रूप में रिक्त नजूल भूमि में से 550 वर्गमीटर भूमि उ0प्र0 मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि0 को प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल दर पर छूट प्रदान करते हुए कतिपय शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन निःशुल्क आवंटित/हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
प्रबन्ध निदेशक उ0प्र0 मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि0 के अनुरोध एवं जिलाधिकारी, आगरा से प्राप्त प्रस्ताव के क्रम में वित्त (लेखा) अनुभाग-2 के कार्यालय ज्ञाप संख्या-ए-2-75/दस-77-14(4)/74 दिनांक 03.02.1977 के प्राविधानों को शिथिल करते हुए अपवादस्वरूप उक्त कार्यालय ज्ञाप के अधीन यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। यह हस्तांतरण अपवादस्वरूप होगा तथा इसे भविष्य में दृष्टांत के रूप में नहीं माना जाएगा।
765/400 के0वी0 मीरजापुर पूलिंग उपकेन्द्र एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति
मंत्रिपरिषद ने 765/400 के0वी0 मीरजापुर पूलिंग उपकेन्द्र एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश में बढ़ती विद्युत मांग की पूर्ति हेतु प्रस्तावित तापीय एवं पम्प स्टोरेज परियोजनाओं द्वारा उत्पादित ऊर्जा की समुचित निकासी के लिए इस परियोजना का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2799.47 करोड़ रुपये है, जिसमें उपकेन्द्र एवं ‘बे’ निर्माण हेतु 1315.91 करोड़ रुपये तथा पारेषण लाइनों हेतु 1483.56 करोड़ रुपये सम्मिलित है। यह परियोजना एक कॉमन पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित की जाएगी, जिससे प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं निरन्तरता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा सभी उपभोक्ताओं-घरेलू, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक-को बेहतर एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सुदृढ़ पारेषण अवसंरचना के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों को गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपलब्ध होने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि, लागत में कमी एवं प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, जिससे औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही, मजबूत अवसंरचना निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। परियोजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार यह परियोजना प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति एवं जनकल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निजी क्षेत्र में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर की स्थापना हेतु आशय पत्र निर्गत किए जाने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 के अन्तर्गत निजी क्षेत्र में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था एपेक्स वेलकेयर ट्रस्ट, वाराणसी को कतिपय शर्तों तथा अधिनियम की धारा-6 के प्राविधानों के अन्तर्गत आशय पत्र निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार प्रायोजक संस्था द्वारा इस आशय का शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाएगा कि सम्पर्क मार्ग के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार के विवाद, शासन के संज्ञान में आने पर विवाद को गुणदोष/प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए शासन द्वारा आशय पत्र वापस लिया जा सकता है और इस पर प्रायोजक संस्था को कोई आपत्ति नहीं होगी।
प्रायोजक संस्था द्वारा विश्वविद्यालय संचालन से पूर्व अतिरिक्त निर्मित भवन/भूखण्ड का मानचित्र नियमानुसार स्वीकृत/शमन कराने की सूचना अनुपालन आख्या के साथ उपलब्ध करायी जाएगी। प्रायोजक संस्था द्वारा 12.50 एकड़ से अधिक धारित भूमि का विनियमितीकरण कराकर अनुपालन आख्या के साथ उपलब्ध कराया जाएगा। ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश में नये निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना करने, विद्यमान निजी विश्वविद्यालयों को निगमित करने तथा उनके कृत्यों को विनियमित करने के उद्देश्य से ’उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019’ प्रवर्तित किया गया है। उक्त अधिनियम की धारा-4 में नये विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने, धारा-5 में प्रस्ताव का मूल्यांकन किये जाने व धारा-6 में आशय-पत्र निर्गत किये जाने विषयक प्राविधान विहित किये गये हैं।
उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की धारा 58 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल द्वारा, उत्तर प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय स्थापित किये जाने की प्रक्रिया को विनियमित करने की दृष्टि से, उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली, 2021 का प्रख्यापन किया गया है। उक्त नियमावली के नियम-14 के अन्तर्गत उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति के समक्ष मन्तव्य एवं संस्तुति सहित प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने का प्राविधान है।
उच्च स्तरीय समिति की बैठक दिनांक 20.05.2025 को सम्पन्न हुई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत जनपद मीरजापुर के ग्राम-समसपुर, तहसील-चुनार में 50.45 एकड़ भूमि पर सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर, उत्तर प्रदेश की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किये जाने की संस्तुति की गयी। उच्च स्तरीय समिति की संस्तुति के संदर्भ में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय-पत्र निर्गत किये जाने का प्रस्ताव है।























