Wednesday, March 11, 2026
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योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

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योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
योगी मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-


पंजीकरण से पूर्व खतौनी एवं अन्य स्वामित्व सम्बन्धी अभिलेखों के अवलोकन व परीक्षण करने के बाद ही पंजीकरण की कार्यवाही के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की वर्तमान प्रभावी धारा-22 एवं 35 के उपरान्त प्रस्तावित धारा-22।ए 22ठ एवं 35। जोड़े जाने हेतु आवश्यक संशोधन करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। प्रस्तावित संशोधन से सम्बन्धित विधेयक पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त विधानमण्डल की स्वीकृति प्राप्त की जायेगी। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में धारा-22 एवं 35 के उपरान्त धारा-22।ए 22ठ एवं 35। को जोड़ा जा रहा है। धारा-22। विनिर्दिष्ट श्रेणियों के दस्तावेजों को पंजीकरण के लिये प्रतिबन्धित करेगी। धारा 22ठ द्वारा पंजीकरण से पहले अचल सम्पत्ति की पहचान के उपबन्ध किये गये हैं। धारा 35। ;1द्ध में धारा 17 ;1द्ध के अन्तर्गत आने वाली अचल सम्पत्ति के लिये प्रस्तुत लिखतों के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जे अथवा अन्तरण सम्बन्धी अन्य अधिकारों से सम्बन्धित ऐसे दस्तावेज, जोकि राज्य सरकार द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचना के माध्यम से विनिर्दिष्ट किये जायें, संलग्न नहीं हैं, तो पंजीकरण अधिकारी उन्हें पंजीकृत करने से इन्कार कर देगा। इस प्रस्ताव को लागू किये जाने से जनसामान्य को अनावश्यक कोर्ट केसेज एवं अन्य असुविधाओं से राहत मिलेगी। प्रस्तावित संशोधन भारतीय संविधान की अनुसूची-7 की तृतीय सूची (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि-6 के अन्तर्गत प्रस्तुत किया जा रहा है।


ज्ञातव्य है कि वर्तमान समय में सम्पत्ति के स्वामी से विरत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा सम्पत्ति का विक्रय, निषेधित/प्रतिबन्धित सम्पत्ति का विक्रय, किसी व्यक्ति द्वारा अपने अधिकार/स्वामित्व से अधिक सम्पत्ति का विक्रय, किसी सम्पत्ति के विधिक स्वामी द्वारा कुर्क सम्पत्ति का विक्रय, केन्द्र/राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सम्पत्तियों के विक्रय विलेख का पंजीकरण करा लिया जाता है, जिससे विभिन्न विवाद निरन्तर संज्ञान में आते रहते हैं। इसके कारण जनसामान्य को मुकदमेबाजी एवं अन्य असुविधाओं का सामना करना पड़ता हैं, जिससे शासन एवं विभाग की छवि भी धूमिल होती है।

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम एवं नियमावली के अन्तर्गत किसी भी विलेख के पंजीकरण से इन्कार के सम्बन्ध में उप निबन्धक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-35 के अन्तर्गत अत्यन्त सीमित अधिकार प्राप्त हैं। अन्य प्रदेशों में उपरोक्त समस्या के निराकरण हेतु समय-समय पर रजिस्ट्रीकरण अधिनियम एवं नियमावली में विभिन्त्र संशोधनों के माध्यम से उक्त समस्याओं पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया गया है। उपरोक्त परिस्थिति में यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश में भी, कतिपय राज्यों में किये गए संशोधनों एवं प्रयासों की तरह, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम एवं नियमावली में संशोधन किये जायें। इसके दृष्टिगत मंत्रिपरिषद द्वारा यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के सम्बन्ध में


मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। योजना का उद्देश्य प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों को परिवहन सेवा से जोड़ना, ग्रामीण जनता को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक सीधी एवं सुरक्षित पहुँच प्रदान करना तथा निजी क्षेत्र के बस संचालकों के माध्यम से ग्रामीण मार्गों पर सेवा प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के अधीन संचालित होने वाले वाहनों को राज्य सरकार द्वारा परमिट की अनिवार्यता से छूट प्रदान किये जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी। भविष्य में यदि कोई संशोधन आवश्यक हो, तो उक्त पर निर्णय लेने के लिये मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है। ज्ञातव्य है कि मोटरयान अधिनियम-1998 की धारा-66 (3)(द) की व्यवस्थानुसार ग्राम एवं ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिये संचालित होने वाले वाहनों को अधिनियम की धारा 66 (1) के अधीन परमिट की आवश्यकता से छूट प्रदान करने का प्राविधान है।


इस योजना के अन्तर्गत 15-28 सीट क्षमता (लम्बाई 07 मीटर) वाले डीजल, सी0एन0जी0/इलेक्ट्रिक वाहन संचालित किये जायेंगे। पंजीयन तिथि से अधिकतम 08 वर्ष तक की आयु के वाहन योजना के अन्तर्गत संयोजित हो सकेंगे। वाहन की मेक, मॉडल एवं पंजीयन तिथि में 01 वर्ष से अधिक का अन्तर नहीं होगा। एन0सी0आर0 क्षेत्र में सी0एन0जी0/इलेक्ट्रिक वाहनों का ही संचालन अनुमन्य होगा एवं सी0ए0क्यू0एम0 नॉर्म्स का पालन करना होगा। योजना के अन्तर्गत प्रत्येक आवेदक को, जिस ब्लॉक हेतु उसने आवेदन किया है, की समस्त ग्राम पंचायत/रूट पर अपने विवेकानुसार वाहन संचालित करने, फेरों की संख्या एवं रूट निर्धारित करने का अधिकार होगा। ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार वाहन की सेवा प्रदान करेगा। ग्राम पंचायत से ब्लॉक तक का शॉर्टेस्ट रूट उक्त वाहन का मार्ग होगा। ग्राम पंचायत से ब्लॉक तक जाने के मार्ग पर उक्त ब्लॉक में पड़ने वाली समस्त ग्राम पंचायत उक्त सेवा से आच्छादित होगी। सेवा ग्राम पंचायत से ब्लॉक-तहसील-जिला मुख्यालय तक जा सकती है। प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम 02 वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जायेगा।


मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 परिवहन निगम की विशेष अनुबन्ध योजना के रूप में लागू होगी तथा निगम की पूर्व एवं वर्तमान अनुबन्ध योजनाओं से इस सीमा तक स्वतः संशोधित मानी जायेगी। योजना की विज्ञप्ति परिवहन निगम मुख्यालय द्वारा प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करायी जायेगी, जो सम्बन्धित जनपद के उस समाचार पत्र के अंक में भी प्रकाशित होगी। आवेदन हेतु 15 दिवस की अवधि का उल्लेख विज्ञप्ति में किया जायेगा। आवेदन मुख्यालय द्वारा नाम निर्दिष्ट सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक (जिन जनपदों में एक से अधिक डिपो स्थापित हैं, के लिये, जोकि विज्ञप्ति में उल्लिखित होगा)/सम्बन्धित जनपद के सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक द्वारा प्राप्त किये जायेंगे।


इस योजना के क्रियान्वयन हेतु आवेदन की स्क्रीनिंग हेतु 15 दिवस, आवेदक के सफल चयन के बाद वाहन उपलब्ध कराने हेतु 15 दिवस तथा निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिवस में पूर्ण कर लिया जाएगा। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सफल आवेदक का चयन सम्बन्धित जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जायेगा। सम्बन्धित मुख्य विकास अधिकारी तथा सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी समिति के सदस्य एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक परिवहन निगम समिति के सदस्य सचिव होंगे। उक्त कमेटी द्वारा सेवा प्रदाताओं का चयन करते हुए रूट्स का भी अंतिमीकरण किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण का दायित्व सम्बन्धित क्षेत्रीय प्रबन्धकों का होगा तथा वे नियमित रूप से (न्यूनतम मासिक) मण्डलायुक्त को अवगत कराना सुनिश्चित करेंगे।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अन्तर्गत भागीदारी में किफायती आवास और किफायती किराया आवास घटकों के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश (नीति)-2026 जारी करने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अन्तर्गत भागीदारी में किफायती आवास (ए0एच0पी0) और किफायती किराया आवास (ए0आर0एच0) घटकों के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश (नीति)-2026 जारी किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। दिशा-निर्देश (नीति)-2026 में भविष्य में किसी प्रकार के संशोधन, परिवर्तन, परिवर्धन किये जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णयों की मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी देने हेतु आहूत ब्रीफिंग में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न जनपदों में मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के अन्तर्गत निर्मित आवासों में अनाधिकृत रूप से रहने वालों से उक्त आवासों को खाली कराते हुए उनकी रंगाई-पुताई करायी जाए। तत्पश्चात उक्त आवास अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र व्यक्तियों को आवण्टित कर दिये जाएं।


ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा निर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 सम्बन्धी दिशा-निर्देश के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अन्तर्गत भागीदारी में किफायती आवास (ए0एच0पी0) घटक के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश (नीति) 2026 और किफायती किराया आवास (ए0आर0एच0) घटक के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश (नीति)-2026 जारी किया जाना प्रस्तावित है। प्रश्नगत योजना के अन्तर्गत मध्यम से दुर्बल आय वर्ग भवनों के निर्माण हेतु केन्द्रांश के रूप में 1.50 लाख रुपये एवं राज्यांश के रूप में 01 लाख रुपये देय होगा। इससे मध्यम एवं दुर्बल आय वर्ग के लाभार्थियों को सस्ती दरों पर आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

योजना के अन्तर्गत वाइट-लिस्टेड परियोजनाओं हेतु विकासकर्ताओं को इन्सेन्टिव के रूप में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति, वाह्य विकास शुल्क एवं लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में छूट अनुमन्य की गयी है। ए0आर0एच0 मॉडल-2 के अन्तर्गत शहरी गरीबों, कामकाजी महिलाओं, उद्योगों, औद्योगिक सम्पदा, संस्थानों के कर्मचारियों और अन्य पात्र ई0डब्ल्यू0एस0/एल0आई0जी0 परिवारों के लिए निजी/सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किराये के आवास का निर्माण, संचालन और रखरखाव का प्राविधान किया गया है।

मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत सम्बन्धित अभिकरणों यथा-बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर एवं मऊ हेतु सीड कैपिटल के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत सम्बन्धित अभिकरणों यथा-बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर एवं मऊ हेतु सीड कैपिटल के रूप में 425 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया है। उक्त योजना में आवश्यकतानुसार किसी संशोधन/परिमार्जन के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है। ज्ञातव्य है कि नगरीय क्षेत्रों में सुनियोजित व सुव्यवस्थित विकास के साथ-साथ नगरीय जनसंख्या को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराये जाने हेतु मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना लागू है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नये शहरों का समग्र एवं समुचित विकास मद में 3,000 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।

इस योजना के अन्तर्गत नये शहरों के समग्र एवं समुचित विकास हेतु शासनादेश दिनांक 06 अप्रैल, 2023 द्वारा दिशा-निर्देश निर्गत किये गये हैं। योजना के अन्तर्गत भूमि अर्जन में आने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्ष की अवधि के लिए दिये जाने का प्राविधान है।

जनपद अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के अन्तर्गत स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु 2,500 वर्गमीटर नजूल भूमि नगर निगम, अयोध्या के पक्ष में
निःशुल्क आवण्टित/हस्तान्तरित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने जनपद अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के अन्तर्गत स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु चक नं0-4 मोहल्ला वशिष्ठ कुण्ड, परगना हवेली अवध, तहसील सदर स्थित नजूल भूमि गाटा संख्या-1026, 1027, 1029, 1030, 1031, 1033 मि0 एवं 1035 कुल 07 किता क्षेत्रफल-2,500 वर्गमीटर को नगर निगम, अयोध्या के पक्ष में निःशुल्क आवण्टित/हस्तान्तरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।


जनपद अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजनान्तर्गत स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु चिन्हित भूमि को प्रभावी जिलाधिकारी, सर्किल दर पर छूट प्रदान करते हुये कतिपय शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन नगर निगम, अयोध्या के पक्ष में निःशुल्क आवण्टन/हस्तान्तरण अपवादस्वरूप होगा। इसे भविष्य में दृष्टान्त के रूप में नहीं माना जायेगा। इस निर्णय से जनपद अयोध्यावासियों एवं आगन्तुकों को एक उपयोगी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स मिल सकेगा, जहां उन्हें खेल की सुविधा प्राप्त होगी। वहाँ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जा सकेंगे।

उ0प्र0 आवास एवं विकास परिषद, विकास प्राधिकरणों एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में एक मुश्त समाधान योजना (ओ0टी0एस0) 2026 लागू करने के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, विकास प्राधिकरणों एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में सम्पत्तियों के डिफॉल्टर आवण्टियों एवं मानचित्र स्वीकृति के सापेक्ष बकाये की वसूली हेतु एक अवसर प्रदान करने के लिए एक मुश्त समाधान योजना (ओ0टी0एस0) 2026 लागू किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। योजना के क्रियान्वयन में भविष्य में किसी संशोधन/परिमार्जन की आवश्यकता प्रतीत होने पर मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।


ओ0टी0एस0 योजना सभी प्रकार की सम्पत्तियों पर लागू होगी। मानचित्र डिफॉल्टर के प्रकरणों पर भी ओ0टी0एस0 योजना लागू होगी। ओ0टी0एस0 योजना के अन्तर्गत सभी डिफॉल्टर आवण्टियों से साधारण ब्याज लिया जायेगा। आवण्टियों से किसी प्रकार का दण्ड ब्याज नहीं लिया जायेगा। ओ0टी0एस0 योजना हेतु आवेदन करने के लिए 03 माह तथा उसके पश्चात आवेदनों का निस्तारण 03 माह में किया जायेगा। ओ0टी0एस0 योजना से अभिकरणों की सम्पत्तियों के डिफॉल्टर आवण्टियों एवं मानचित्र स्वीकृति के सापेक्ष बकाया धनराशि की वसूली हो सकेगी।

अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अन्तर्गत गंगा एक्सप्रेस-वे के सन्निकट जनपद मेरठ में इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स के अवस्थापना विकास कार्यों के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने गंगा एक्सप्रेस-वे के सन्निकट जनपद मेरठ में इण्टीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) का निर्माण कार्य ई0पी0सी0 मोड पर किये जाने हेतु व्यय-वित्त समिति द्वारा पूँजीगत मदों के लिए मूल्यांकित लागत 21381.93 लाख रुपये को अनुमोदित किया है। यूपीडा द्वारा विकसित किये गये एक्सप्रेस-वे यथा-आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे एवं विकासशील एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे 29 स्थलों पर इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत इण्टीग्रेटेड मैनुफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) की स्थापना व विकास किया जा रहा है।

इण्टीग्रेटेड मैनुफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (आई0एम0एल0सी0) के मेरठ नोड में सड़क, आर0सी0सी0, नालियों, आर0सी0सी0 कल्वर्ट, फायर स्टेशन, अवर जलाशय, वॉटर सप्लाई लाइन, फैन्सिंग, इलेक्ट्रिसिटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि के निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। परियोजना का वित्त पोषण अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध धनराशि से कराया जाना प्रस्तावित है।

ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर शहर से जोड़ने हेतु गंगा नदी पर 04 लेन सेतु एवं पहुंच मार्ग के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर शहर से जोड़ने हेतु गंगा नदी पर 04 लेन सेतु एवं पहुंच मार्ग के निर्माण सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। व्यय-वित्त समिति द्वारा प्रायोजना की अनुमोदित धनराशि 75313.24 लाख रुपये के सापेक्ष यूपीसीडा द्वारा वांछित धनराशि 46 लाख रुपये है। शेष अनुमोदित धनराशि प्राधिकरण द्वारा अपने स्रोतों से वहन किये जाने के दृष्टिगत, मंत्रिपरिषद द्वारा 46,000 लाख रुपये की धनराशि पर अनुमोदन प्रदान किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के अन्तर्गत जनपद कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को कानपुर शहर से जोड़ने हेतु गंगा नदी पर 04 लेन सेतु, पहुँच मार्ग का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। यह उच्च स्तरीय सेतु ट्रासगंगा सिटी को कानपुर शहर से जोड़ेगा। कानपुर नगर एवं आस-पास की औद्योगिक इकाईयों को प्रस्तावित स्थल पर स्थानान्तरित किये जाने हेतु यूपीसीडा द्वारा ट्रांसगंगा सिटी विकसित की जा रही है।

ट्रांसगंगा सिटी के विकसित होने के पश्चात गंगा नदी पार करने हेतु भारी एवं हल्के वाहनों के आवागमन हेतु यातायात का अत्यधिक दबाव रहेगा। ऐसी परिस्थिति में वर्तमान गंगा बैराज मार्ग पर अत्यधिक जाम की स्थिति उत्पन्न होगी। उक्त के दृष्टिगत गंगा नदी पर चार लेन सेतु के निर्माण की आवश्यकता है। 04 लेन सेतु कानपुर शहर में एक जगह मर्ज करने से मर्जिंग प्वाइण्ट पर आवागमन का अत्याधिक घनत्व हो जायेगा, जिससे आवागमन बाधित हो जायेगा। ऐसी परिस्थिति में 04 लेन सेतु के स्थान पर 02-02 लेन के दो अलग-अलग सेतुओं का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।

एफ0डी0आई0 नीति के अन्तर्गत मे0 टीआई मेडिकल्स प्रा0लि0 को अनुमन्य फ्रण्ट-एण्ड लैण्ड सब्सिडी का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेण्ट (एफ0डी0आई0), विदेशी पूंजी निवेश (एफ0सी0आई0), फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फार्च्यून इण्डिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के अन्तर्गत इम्पावर्ड कमेटी की संस्तुति पर औद्योगिक इकाई मेसर्स टीआई मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुमन्य फ्रण्ट-एण्ड लैण्ड सब्सिडी के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
ज्ञातव्य है कि मेसर्स टीआई मेडिकल्स प्रा0लि0 द्वारा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एमडीपी क्षेत्र में 4.48 हेक्टेयर (44,800 वर्गमीटर) भूमि पर 215.20 करोड़ रुपये के निवेश से चिकित्सा उपकरण विनिर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु ’फॉर्च्यून इण्डिया श्रेणी’ के अन्तर्गत फ्रण्ट-एण्ड भूमि सब्सिडी के सम्बन्ध में आवेदन किया गया।


कम्पनी को मेडिकल डिवाइस पार्क क्षेत्र, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर में भूमि आवंटित की गई है। भारत सरकार की मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अन्तर्गत उद्यमियों को सब्सिडाइज्ड दर पर भूमि उपलब्ध कराये जाने का प्राविधान है। उत्तर प्रदेश एफ0डी0आई0, एफ0सी0आई0, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इण्डिया 500 कम्पनियों के निवेश हेतु प्रोत्साहन नीति-2023 के अन्तर्गत फॉर्च्यून इण्डिया-500 श्रेणी में नोडल संस्था की संस्तुति पर प्राधिकृत समिति की बैठक दिनांक 05 जुलाई, 2024 को अनुमोदन प्रदान किया जा चुका है। कम्पनी द्वारा नीति के अन्तर्गत पात्रता प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा चुका है।


इम्पावर्ड कमेटी द्वारा यह मत अवधारित किया गया कि उत्तर प्रदेश की एफ0डी0आई0 नीति-2023 के अन्तर्गत अनुमन्य सब्सिडी की 75 प्रतिशत धनराशि की सीमा तक सब्सिडी प्रदान की जा सकती है। शर्त यह है कि भारत सरकार की मेडिकल डिवाइस पार्क योजना के अन्तर्गत प्राप्त सब्सिडी की धनराशि घटा दी जाएगी। चूंकि एफ0डी0आई0 नीति के अन्तर्गत अनुमन्य सब्सिडी की धनराशि 41,52,24,000 रुपये में से 26,74,56,000 रुपये प्राप्त हो चुके हैं। अतः अन्तर की धनराशि 14,77,68,000 रुपये यीडा को प्रतिपूर्ति किये जाने की स्वीकृति प्रदान की जा सकती है।

मेसर्स टीआई मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को यीडा द्वारा आवंटित भूमि रकबा 44,000 वर्गमीटर कुल प्रीमियम मूल्य 55,36,32,000 रुपये के सापेक्ष अनुमन्य सब्सिडी की धनराशि 41,52,24,000 रुपये में से मेडिकल डिवाइस पार्क के अन्तर्गत प्राप्त सब्सिडी की धनराशि 26,74,56,000 रुपये को घटाते हुए 14,77,68,000 रुपये की प्रतिपूर्ति यीडा को किये जाने के बिन्दु पर मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।

उ0प्र0 सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से नियमावली के नियम-21 में एक कैलेण्डर वर्ष में 06 माह के मूल वेतन से अधिक की धनराशि स्टॉक, शेयर अथवा अन्य निवेश में निवेशित किये जाने की सूचना समुचित प्राधिकारी को दिये जाने की व्यवस्था लायी जा रही है। नियम-24 में 01 माह के मूल वेतन के स्थान पर 02 माह से अधिक मूल्य की किसी चल सम्पत्ति के क्रय की सूचना समुचित प्राधिकारी को दिये जाने के अलावा, प्रत्येक 05 वर्ष व्यतीत हो जाने पर अचल सम्पत्ति की घोषणा करने के स्थान पर, प्रत्येक 01 वर्ष की अवधि व्यतीत होने पर अचल सम्पत्ति घोषित करने की व्यवस्था लायी जा रही है।

उ0प्र0 उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवाँ संशोधन) नियमावली, 2026 को प्रख्यापित/अधिसूचित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मा0 उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवाँ संशोधन) नियमावली, 2026 का प्रख्यापन प्रस्तावित किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा के भर्ती का स्रोत सम्बन्धी नियम-5, कोटा सम्बन्धी नियम-6, चयन प्रक्रिया सम्बन्धी नियम-18 के उप-नियम (1) के खण्ड (ख), न्यायिक सेवा के सदस्यों की पदोन्नति सम्बन्धी नियम-20, नियुक्ति सम्बन्धी नियम-22 के उप-नियम (2) एवं परिशिष्ट ‘1’ को संशोधित/प्रतिस्थापित किया जा रहा है।


उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति हेतु श्रेष्ठता-सह-ज्येष्ठता के आधार पर और उपयुक्तता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) में से, मानक दिव्यांगजन के लिए आरक्षण के नियम के अध्यधीन कोटा 65 प्रतिशत के स्थान पर 50 प्रतिशत निर्धारित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नति हेतु सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की समिति विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से श्रेष्ठता के आधार पर उस संवर्ग में अन्यून तीन वर्ष की निरन्तर सेवा रखने वाले और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में अन्यून सात वर्ष की सेवा रखने वाले में से, मानक दिव्यांगजन के लिए आरक्षण के नियम के अध्यधीन कोटा 10 प्रतिशत के स्थान पर 25 प्रतिशत निर्धारित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा में अधिवक्ता (बार) से सीधी भर्ती हेतु कोटा पूर्व की भांति 25 प्रतिशत रहेगा।

जनपद बांदा में 20 हजार ली0 प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लाण्ट की स्थापना तथा जनपद झांसी में पूर्व स्थापित 10 हजार ली0 प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लाण्ट
का 30 हजार ली0 प्रतिदिन तक क्षमता विस्तारीकरण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने बुन्देलखण्ड पैकेज के अन्तर्गत जनपद बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लाण्ट की स्थापना तथा जनपद झांसी में पूर्व से स्थापित 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लाण्ट की क्षमता का 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक विस्तारीकरण किये जाने की परियोजनाओं हेतु सिविल एवं मैकेनिकल कार्यां के लिए टर्न-की के आधार पर नामित कार्यदायी संस्था मैसर्स इण्डियन डेयरी मशीनरी लिमिटेड (मै0आई0डी0एम0सी0लि0) को नियमानुसार सेण्टेज चार्ज अनुमन्य किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। सेण्टेज चार्ज अनुमन्य किये जाने पर आने वाला व्यय भार राज्य सरकार द्वारा अपने स्रोतों से वहन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है। प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इसलिए दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का बाजार आधारित लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सकेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, यह प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य प्राप्त करने में भी सहायक होगा।


पूर्व में कानपुर नगर, कन्नौज, फिरोजाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद, गोरखपुर, मेरठ, फैजाबाद, बरेली एवं वाराणसी में मल्टी प्रोडक्ट डेयरी फूड प्रोजेक्ट की स्थापना तथा प्रयागराज, झाँसी, अलीगढ़ एवं पराग डेयरी नोएडा के डेयरी प्लाण्ट के सुदृढ़ीकरण परियोजनाओं में मै0आई0डी0एम0सी0लि0 को मंत्रिपरिषद् के अनुमोदनोपरान्त सेण्टेज चार्ज प्रदान किया गया है ।
अतः बुन्देलखण्ड पैकेज के अन्तर्गत जनपद बांदा तथा जनपद झांसी में उक्त परियोजनाओं हेतु नामित कार्यदायी संस्था मैसर्स इण्डियन डेयरी मशीनरी कम्पनी लि0 को नियमानुसार सेण्टेज चार्ज अनुमन्य किये जाने तथा इस पर आने वाले व्यय भार का राज्य सरकार द्वारा अपने स्रोतों से वहन किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी। इन डेयरी प्लाण्ट्स की स्थापना से बुन्देलखण्ड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण में वृद्धि होगी, दुग्ध उत्पादकों को लाभकारी मूल्य प्राप्त होगा। इससे उनके आर्थिक हितों की रक्षा होगी एवं बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।

उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्व-वित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों, राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है। मुख्यमंत्री की पहल पर मंत्रिपरिषद द्वारा इस सुविधा के दायरे में शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी शामिल किये जाने की जानकारी आज यहां मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा दी गयी। 05 सितम्बर, 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के कतिपय शिक्षकों इत्यादि को कैशलेस सुविधा प्रदान करने के सम्बन्ध में की गयी घोषणा के क्रियान्वयन हेतु उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उक्त प्रस्ताव रखा गया।

प्रदेश में मुख्य खनिजों की ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रियात्मक कार्यवाही हेतु एम0एस0टी0सी0 लि0 को नीलामी प्लेटफॉर्म प्रदाता तथा एस0बी0आई0 कैपिटल
मार्केट्स लि0 को ट्रान्जेक्शन एडवाइजर नामित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में मुख्य खनिजों की ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रियात्मक कार्यवाही हेतु एम0एस0टी0सी0 लिमिटेड को नीलामी प्लेटफॉर्म प्रदाता तथा एस0बी0आई0 कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड को ट्रान्जेक्शन एडवाइजर नामित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। पूर्व निष्पादित अनुबन्ध की समाप्ति तिथि 09.02.2026 के उपरान्त दिनांक 10.02.2026 से प्रदेश में मुख्य खनिजों के ब्लॉकों की ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रियात्मक कार्यवाही सम्पन्न कराने हेतु एस0बी0आई0 कैपिटल मार्केट्स लि0 को ट्रान्जेक्शन एडवाइजर के रूप में 01 वर्ष के लिए तथा ऑक्शन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने हेतु एम0एस0टी0सी0 लि0 को पुनः नामित किया जा रहा है।


इससे मुख्य खनिजों के ब्लॉकों की ई-नीलामी पारदर्शी ढंग से सम्पन्न होती रहेगी, राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों हेतु खनिज उपलब्ध होंगे और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। ज्ञातव्य है कि खनिज (नीलामी) नियमावली-2015 में यह प्राविधान है कि मुख्य खनिजों की नीलामी ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। राज्य सरकार ऐसे किसी ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेगी, जो मानकीकरण जाँच और गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ई-प्रोक्योरमेण्ट सिस्टम्स की गुणवत्ता सम्बन्धी अपेक्षाओं के अनुपालन से जुड़े मार्गदर्शक सिद्धान्तों में यथा-निर्दिष्ट तकनीकी अपेक्षाओं को पूरा करता है।

उत्तर प्रदेश में 05 चरणों की एन0आई0टी0ई0/ई-निविदा सह ई-नीलामी की कार्यवाही सम्पन्न की गयी है, जिसमें 06 ब्लॉक कम्पोजिट लाइसेंस (सी0एल0) एवं 03 ब्लॉक खनन पट्टा (एम0एल0) लाइसेंस पर सफलतापूर्वक ऑक्शन हुए हैं। एस0बी0आई0 कैपिटल मार्केट्स लि0 द्वारा 16 प्रदेशों तथा भारत सरकार के खान मंत्रालय में ट्रान्जेक्शन एडवाइजर के रूप में कार्य किया जा रहा है। एम0एस0टी0सी0 लि0 द्वारा खान मंत्रालय, भारत सरकार सहित 07 राज्यों में ऑक्शन प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर के रूप में कार्यवाही की जा रही है।

उ0प्र0 क्रिकेट एसोसिएशन को ग्रीनपार्क स्टेडियम, कानपुर दिये जाने के सम्बन्ध में निष्पादित अनुज्ञा-अनुबन्ध में शुल्क निर्धारण सम्बन्धी संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को ग्रीनपार्क स्टेडियम दिये जाने के सम्बन्ध में निष्पादित अनुज्ञा-अनुबन्ध में शुल्क निर्धारण से सम्बन्धित संशोधन किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को ग्रीनपार्क स्टेडियम, कानपुर के आवंटन से सम्बन्धित शासनादेश दिनांक 28 अप्रैल, 2015 में निर्धारित शर्तों एवं अनुज्ञा-अनुबन्ध में कतिपय आयोजन यथा प्रतिभा-खोज कार्यक्रम के अन्तर्गत आयोजित उत्तर प्रदेश टी-20 लीग तथा द्वितीय श्रेणी के अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच उदाहरणार्थ भारत ’ए’ बनाम ऑस्ट्रेलिया ’ए’ जैसे मैच) के सम्बन्ध में शुल्क निर्धारित नहीं है। उक्त आयोजन को व्यवहार्य एवं आकर्षक बनाए रखते हुए राजस्व प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए शुल्क निर्धारण के उद्देश्य से शासन द्वारा आयुक्त, कानपुर मण्डल की अध्यक्षता में गठित समिति की गयी। समिति की संस्तुतियों के क्रम में मंत्रिपरिषद द्वारा उक्त निर्णय लिया गया है। इसके अनुसार अनुज्ञा-अनुबन्ध में अन्य आयोजनों के लिए निर्धारित 25 लाख रुपये के शुल्क के सापेक्ष 90 प्रतिशत की छूट उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को प्रदान करते हुए, प्रतिभा खोज कार्यक्रम के अन्तर्गत आयोजित उत्तर प्रदेश टी-20 लीग के लिए 2.50 लाख रुपये प्रति मैच प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया जायेगा। द्वितीय श्रेणी के अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच (उदाहरणार्थ भारत ’ए’ बनाम ऑस्ट्रेलिया ’ए’ जैसे मैच) के लिए 05 लाख रुपये प्रति मैच प्रतिदिन शुल्क निर्धारित किया जायेगा।


उपर्युक्त निर्धारित शुल्कों पर अनुज्ञा-अनुबन्ध में अन्य आयोजनों के लिये विद्यमान व्यवस्था के अनुरूप प्रत्येक 05 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 25 प्रतिशत की वृद्धि प्राविधानित किया जायेगा। खेल प्रतिभा खोज तथा खेल प्रोत्साहन के लिए उक्त प्रकृति की छूट का प्राविधान तथा शुल्क निर्धारण सरकार द्वारा खेल हित में किया जा रहा है। राज्य सरकार को यह अधिकार होगा कि वह समय-समय पर अथवा सुविचारित प्रस्ताव प्राप्त होने पर उक्त छूट/शुल्क निर्धारण पर एकपक्षीय रूप से पुनर्विचार कर सकेगी। इस निर्णय से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। इससे राज्य सरकार पर कोई व्यय-भार नहीं आएगा। प्रदेश के खिलाडियों के लिये उत्तर प्रदेश टी-20 मैच तथा अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होने से खेल एवं खिलाडियों को प्रोत्साहन मिलेगा। शुल्क निर्धारण स्पष्ट एवं पारदर्शी होने से आयोजन को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे स्थानीय जन सामान्य के लिये अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

उत्तराखण्ड में निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना की पुनरीक्षित लागत के सापेक्ष उ0प्र0 का शेयर 356.07 करोड़ रु0 तथा हिमाचल प्रदेश
में निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना की लागत के सापेक्ष उ0प्र0 का शेयर 361.04 करोड़ रु0 का व्यय प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून/टिहरी गढ़वाल जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर निर्माणाधीन लखवार बहुउद्देशीय परियोजना की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार की सलाहकार समिति की 141वीं बैठक दिनांक 11 फरवरी, 2019 के द्वारा स्वीकृत पुनरीक्षित लागत 5747.17 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) के सापेक्ष उत्तर प्रदेश राज्य का शेयर 356.07 करोड़ रुपये तथा हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर जनपद में गिरी नदी पर निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना की लागत 6946.99 करोड़ रुपये (प्राइस लेवल 2018) (जल घटक की लागत 6647.46 करोड़ रुपये) के सापेक्ष उत्तर प्रदेश राज्य का शेयर 361.04 करोड़  रुपये के व्यय प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून/टिहरी गढ़वाल जिलों में लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊँचा बांध, 300 मेगावॉट की स्थापित क्षमता वाले एक भूमिगत बिजलीघर और एक बैराज सहित एक संतुलय जलाशय (बेलेन्सिंग रिजर्वायर) के निर्माण की लखवार बहुउद्देशीय परियोजना हेतु लाभार्थी राज्यों के द्वारा वहन की जाने वाली धनराशि 1146.69 करोड़ रुपये के सापेक्ष उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा अपने जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत के आधार पर वहन किये जाने वाले 356.07 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति प्रदान की गयी है। 

इस परियोजना से 33,780 हेक्टेयर क्षेत्र में लाभार्थी राज्यों (हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड) को सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जायेगा तथा परियोजना से घरेलू एवं औद्योगिक उद्देश्यों के लिए 78.83 एम0सी0एम0 जल और 300 मेगावॉट/572.54 मिलियन यूनिट का आकस्मिक विद्युत उत्पादन किया जाना प्रस्तावित किया गया है। इस परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। इस परियोजना का दिसम्बर, 2031 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है।

हिमाचल प्रदेश राज्य के सिरमौर जनपद में गिरी नदी पर 148 मीटर ऊँचा व 430 मीटर लम्बा बांध, जल संचयन क्षमता 498.00 एम0सी0एम0, लाइव संचयन क्षमता 330.00 एम0सी0एम0 तथा विद्युत उत्पादन क्षमता 40 मेगावॉट की निर्माणाधीन रेणुकाजी बांध परियोजना हेतु लाभार्थी राज्यों के द्वारा वहन की जाने वाली धनराशि 1162.66 करोड़ रुपये के सापेक्ष उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा अपने जल उपभोग शेयर 31.05 प्रतिशत के आधार पर वहन किये जाने वाले 361.04 करोड़ रुपये के व्यय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी है। 
इस परियोजना द्वारा संचायित जल का उपभोग सिंचाई हेतु लाभार्थी राज्यों (हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड) द्वारा किया जायेगा तथा दिल्ली राज्य को 23 क्यूसेक (09 महीने-सितम्बर से जून तक) पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इस परियोजना को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। इस परियोजना का दिसम्बर, 2032 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है।

उल्लेखनीय है कि लखवार बहुउद्देशीय परियोजना एवं रेणुकाजी बांध परियोजना पूर्ण होने से उत्तर प्रदेश को निर्धारित 3.721 बी0सी0एम0 (31.05 प्रतिशत) जल प्राप्त होगा, जिससे पूर्वी यमुना नहर प्रणाली एवं आगरा नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा यमुना नदी की तनुता में वृद्धि हो सकेगी।

उ0प्र0 भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम-1975 की धारा 21 में संशोधन के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम-1975 की धारा 21 में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के दिनांक 07 मई, 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। संशोधन के अन्तर्गत धारा 21 से ‘कुष्ठ रोग’ सम्बन्धी प्राविधान हटाए जा रहे हैं तथा प्राविधानों को मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम, 2017 के अनुरूप किया गया है। इस निर्णय से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के साथ भेदभाव की समाप्ति तथा उनके गरिमामय जीवन के अधिकार की सुनिश्चितता होगी। प्रस्तावित उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्य विधानमण्डल में प्रस्तुत किया जाएगा।

जनपद अयोध्या में चक बाग बिजेसी स्थित चिन्हित 1,350 वर्ग मी0 नजूल भूमि उ0प्र0 सतर्कता अधिष्ठान के पक्ष में आवंटित/हस्तान्तरित किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने अपर निदेशक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, लखनऊ के अनुरोध एवं जिलाधिकारी, अयोध्या से प्राप्त प्रस्ताव/संस्तुति के क्रम में जनपद अयोध्या में चक बाग बिजेसी स्थित चिन्हित नजूल भूमि गाटा संख्या-33 मि0, 34 मि0, 35 मि0, 36 मि0 क्षेत्रफल 1,350 वर्गमीटर, मोहल्ला बाग बिजेसी, परगना हवेली अवध, तहसील सदर, जिला अयोध्या पर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के अयोध्या सेक्टर कार्यालय स्थापित किये जाने हेतु सतर्कता विभाग को कतिपय शर्तां एवं प्रतिबन्धों के अधीन प्रभावी जिलाधिकारी सर्किल दर पर सशुल्क भूमि आवंटित/हस्तान्तरित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।


प्रस्तावित शर्तां एवं प्रतिबन्धों के अन्तर्गत उक्त नजूल भूमि पर कोई धार्मिक अथवा ऐतिहासिक महत्व की इमारत न हो। हस्तान्तरित नजूल भूमि यदि प्रस्तावित कार्य से भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग की जाय, तो उसके लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन से पुनः अनुमति प्राप्त करनी होगी। नजूल भूमि का उपरोक्त आवंटन/हस्तान्तरण अपवादस्वरूप होगा तथा इसे भविष्य में दृष्टांत के रूप में नहीं माना जायेगा। उक्त भूमि का उपयोग केवल नियत प्रयोजन हेतु ही किया जायेगा। उक्त नजूल भूमि का आवंटन/हस्तान्तरण किसी अन्य विभाग/निजी संस्था/व्यक्ति को कदापि नहीं किया जायेगा। प्रभावी नियम/विनियमन/महायोजना में निर्धारित भू-उपयोग के अनुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। उपरोक्त आवंटन/हस्तान्तरण प्रकरण के सम्बन्ध में मा0 न्यायालय में विचाराधीन वादों (यदि कोई हो) में पारित अन्तिम निर्णय के अधीन होगा।

सिखों के विवाह के रजिस्ट्रीकरण हेतु ‘उ0प्र0 आनन्द विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026’ के प्रख्यापन का प्रस्ताव अनुमोदित


मंत्रिपरिषद ने सिखों के विवाह के रजिस्ट्रीकरण हेतु ‘उत्तर प्रदेश आनन्द विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026’ के प्रख्यापन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। मंत्रिपरिषद ने भविष्य में नियमावली में आवश्यकतानुसार संशोधन/परिवर्तन के सम्बन्ध में निर्णय लिये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है। प्रस्तावित नियमावली में आनन्द विवाह के रजिस्ट्रीकरण हेतु तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी, मण्डल स्तर पर मण्डलायुक्त एवं प्रदेश मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ़ को क्रमशः रजिस्ट्रार, जिला रजिस्ट्रार, मण्डलीय रजिस्ट्रार तथा मुख्य रजिस्ट्रार अधिसूचित किया गया है। आनन्द विवाह से सम्बन्धित पक्षकार/रिश्तेदार विवाह सम्पन्न होने की तिथि के तीन माह के अन्दर निर्धारित प्रारूप में न्यायालय शुल्क स्टाम्प के रूप में 1,500 रुपये के शुल्क के साथ रजिस्ट्रीकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित अवधि के पश्चात आनन्द विवाह के रजिस्ट्रीकरण हेतु दिये जाने वाले ज्ञापनों के आधार पर विवाह रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया एवं विलम्ब शुल्क का प्राविधान किया गया है।


असंतुष्ट पक्ष द्वारा रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध जिला रजिस्ट्रार के आदेश के विरुद्ध मण्डलीय रजिस्ट्रार के समक्ष अपील की जा सकेगी। आनन्द विवाह रजिस्टर के रख-रखाव एवं उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त किये जाने के प्राविधान भी किए गये हैं। उल्लेखनीय है कि सिखों में प्रचलित आनन्द विवाह, जिसे आमतौर पर आनन्द कारज कहा जाता है, के रजिस्ट्रीकरण को सुगम बनाने हेतु आनन्द विवाह अधिनियम, 1909 यथासंशोधित, 2012 की धारा-6 में राज्य सरकारों को नियम बनाने हेतु सशक्त किया गया है। रिट याचिका (सिविल) संख्या-911/2022 अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में मा0 सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 04 सितम्बर, 2025 में दिये गये निर्देशों के अनुपालन में प्रदेश में उत्तर प्रदेश आनन्द विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी है।