चिराग पासवान ने उड़ाई नीतीश खेमे की नींद

31 अक्टूबर, 2020 को चिराग पासवान जो महसूस कर रहे हैं, उसे ठीक-ठीक नापा नहीं जा सकता.

बिहार चुनाव को लेकर चिराग पासवान की रणनीति से एनडीए गठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. एनडीए के समर्थकों और ख़ासकर जनता दल यूनाइटेड के समर्थकों का कहना है कि चिराग पासवान के चलते कुछ जगहों पर समीकरण प्रभावित हो रहा है.

अकेले चुनाव लड़ने का फैसलासीटों के बँटवारे की चर्चाओं के बीच तीन अक्टूबर को चिराग पासवान ने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने का एलान कर दिया.बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ़ से कभी उन्हें यह नहीं कहा गया कि वे चुनाव में अकेले ना लड़ें. वे लगातार बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बने रहने की बात करते रहे.

ये पहला मौका है जब उनके जन्मदिन पर उनके पिता मौजूद नहीं हैं, लिहाज़ा चिराग को उनकी बेइंतहा कमी खल रही है, वहीं दूसरी ओर बिहार चुनाव के पहले चरण के मिले फ़ीडबैक ने उन्हें उत्साहित कर रखा है. वे इस बात से खुश हैं कि पिता जहां भी होंगे, उन्हें देखकर खुश हो रहे होंगे.

बिहार चुनाव के पहले चरण में जिन 71 सीटों पर चुनाव हुआ है, उन जगहों से मिल रहे फ़ीडबैक के मुताबिक़ चिराग की पार्टी के उम्मीदवारों ने जनता दल यूनाइटेड खेमे की नींद उड़ा दी है. जनता दल यूनाइटेड इन 71 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

इन 35 सीटों पर खड़े लोजपा के उम्मीदवारों के आधार पर ही चिराग पासवान दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार किसी भी हाल में 10 नवंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, हालांकि वे यह दावा भी करते हैं कि बीजेपी-एलजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में होगी.पहले चरण में जिन 71 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उनमें से 42 सीटों पर चिराग पासवान ने अपने उम्मीदवार उतारे थे. इनमें से 18-20 सीटों पर उनके उम्मीदवार जितने वोट जुटाने का दावा कर रहे हैं, उससे जनता दल यूनाइडेट के उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. चिराग को उम्मीद है कि आने वाले दो चरणों में भी उनके उम्मीदवार यही करने जा रहे हैं.

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