निजीकरण से युवाओं का रोजगार बेच रही सरकार-अखिलेश

     भाजपा सरकार तो अपनी डांवाडोल आर्थिक स्थिति के कारण व्यापक स्तर पर सरकारी सेवाओं को निजी हाथों में देने जा रही है लेकिन इसके दुष्प्रभावों के बारे में उसे चिंता नहीं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि भारत में 40 करोड़ रोजगार जा सकते हैं। उसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे महायुद्ध के बाद कोरोना काल में यह सबसे भयानक संकट की आहट है। श्रमिकों और व्यवसायों को तबाही का सामना करना पड़ेगा।

अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार ने देश को डुबो दिया है। देश का शासन चलाने की जगह वह देश के साधनों और संसाधनों का बाजार लगा रही है। इसने देश-प्रदेश में टोल, मण्डी, सरकारी माल,आईटीआई, पाॅलिटेक्निक, हवाई अड्डा, रेल सहित बीमा कम्पनी के निजीकरण से युवाओं के रोजगार के अवसरों को बेच डाला है।

     स्थिति यह है कि रोजगार की स्थिति पिछले 15 सालों में सबसे खराब है। नौकरियां मिलने के बजाय छूट रही हैं। कम्पनियां अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। रेलवे अस्पतालों को बेचने के लिए टेण्डर मांगे गए हैं। डेढ़ साल तक मंहगाई भत्ता बंद करने के बाद रेलवे में सेवानिवृत्ति के बाद खाली पदों में 50 प्रतिशत की समाप्ति की रणनीति बनी है। करीब डेढ़ लाख रेल कर्मचारियों की नौकरी से छुट्टी होनी है। भारतीय रेल ने 109 रूट पर अत्याधुनिक प्राइवेट ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इसमें विदेशी कम्पनियां भी शामिल हो सकती है।

     देश में सरकारी बैंकों की संख्या 12 से पांच करने की तैयारी है। उनका निजीकरण होगा। पिछले वर्ष 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला लिया गया। अब सरकार उन बैंकों की हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेचने की तैयारी कर रही है, जिनका विलय नहीं किया गया है। केन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर अमल हुआ तो जल्द ही पुलिस विभाग में 50 से अधिक सेवाएं पूर्ण या आंशिक रूप से निजी हाथों में होंगी। बीमा कम्पनियों का भी निजीकरण प्रस्तावित है। एयरपोर्ट तो प्राईवेट कम्पनियों को दे ही दिये गये हैं। तीन लाख करोड़ की सम्पत्ति वाले बीएसएन एल को 950 करोड़ रूपये में बेचने की तैयारी है।

   समाजवादी पार्टी यह कहती रही है कि भाजपा की गलत नीतियों नोटबंदी, दोषपूर्ण जीएसटी, आर्थिक अस्थिरता के डर और कुछ अपने चहेते पूंजीपतियों को बचाने और उनको लाभ पहुंचाने के कारण देश की जीडीपी में भीषण गिरावट आई है। आजाद भारत के इतिहास में इस भाजपा सरकार में देश से अधिकारिक रूप से सबसे ज्यादा पैसा विदेशों में गया है। भारत की अर्थव्यवस्था बर्बादी की ओर है।

   कैसी विडम्बना है कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के विरोध में अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखने वाले युवा समाजवादी सिपाहियों पर बर्बरता से लाठीचार्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाती है। बेरोजगारों की जायज मांग उठाने वालों के खिलाफ यह कायराना हरकत है। समाजवादी नौजवान सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते रहेंगे। समाजवादी सत्य पर डटे रहेंगे और अन्याय नहीं सहेंगे।

     युवाओं ने वस्तुतः भाजपा के शासनकाल की उल्टी गिनती की शुरूआत कर दी है। कल नौजवानों के समर्थन में समाजवादी साथियों ने मोमबत्तियां जलाकर युवाक्रान्ति की दिशा में सार्थक पहल की है। भाजपा को नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी के खिलाफ जंग में नौजवानों को बेकारी भत्ता और बड़ी तादात में नौकरियां देने के साथ कौशल प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई थी ताकि वे बेहतर रोजगार पा सकें। भाजपा ने निराशा और कुंठा में ग्रस्त नौजवानों को अंधेरी गुफा में ढकेलने का काम किया है। सन् 2022 में नौजवान भाजपा से उसके कामों का पूरा हिसाब लेंगे।

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