क्या मोदी की गारंटी पर खरा उतरेंगे मोहन यादव..?

बृजनन्दन राजू


देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब 2024 में मोदी के विजय रथ को रोक पाना विपक्ष के लिए आसान नहीं है। चुनाव से ठीक पहले जातिगत जनगणना को लेकर समाज को बांटने का प्रयास किया गया। कांग्रेस ने मतदाताओं को तरह—तरह के प्रलोभन भी दिये फिर भी मोदी मैजिक ने विपक्ष की हवा निकाल दी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों को जितना दुख तीनों राज्यों में भाजपा की जीत से नहीं हुआ उससे अधिक कष्ट नये मुख्यमंत्रियों के नामों से हो रहा है। क्योंकि अब अगड़े पिछड़े के नाम पर विपक्ष की दुकान नहीं चलने वाली है। तीनों राज्यों में सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव का रहा है। क्योंकि भाजपा किसी यादव को भी मुख्यमंत्री बना सकती है। यह बात किसी के गले उतरने वाली नहीं थी। लेकिन मोदी जब कहते हैं सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास तो यह केवल कोरा नारा नहीं है। इस नारे को मोदी ने चरितार्थ भी किया है। क्या मोदी की गारंटी पर खरा उतरेंगे मोहन यादव..?


मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से मध्य प्रदेश के साथ—साथ उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान व हरियाणा में एक बड़ा वोट बैंक भाजपा को मिलने वाला है। वहीं छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को मुख्यमंत्री न बनाकर एक वनवासी चेहरे विष्णु देव साय को मुख्यमंत्री बनाकर छत्तीसगढ़ समेत झारखण्ड और उड़ीसा के वनवासियों का ह्रदय जीतने का काम किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में राज्य का गठन हेने के बाद से एक आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग की जा रही थी जिसे अब भाजपा ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाकर पूरा कर दिया है। वहीं राजस्थान में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर सवर्ण समाज को भी साधने का प्रयास किया है। इससे विपक्ष का अगड़ा पिछड़ा कार्ड भी नहीं चलेगा। मोदी ने कांग्रेस के साथ—साथ अखिलेश व लालू को भी रगड़ा है। भाजपा ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर अखिलेश यादव के पीडीए की हवा निकाल दी है। मोदी पर जनता को भरोसा है। मध्य प्रदेश का विकास उनकी प्राथमिकता में है। मध्य प्रदेश के चुनाव में भाजपा ने नारा दिया था एमपी के मन में मोदी और मोदी के मन में एमपी।

 बिना किसी चेहरे को आगे किये चुनाव लड़ रही भाजपा ने प्रचार के दौरान ही यह तय कर लिया था कि अगर सरकार बनती है वह राज्य की कमान पिछड़े वर्ग के नेता को ही सौंपेगी। मोहन यादव का नाम किसी टीवी चैनल की डिबेट में नहीं था। मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर व उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने राज्य के मतदाताओं के बीच गजब की सोशल इंजीनियरिंग की है। पिछली सरकार में जहां नरोत्तम मिश्रा ब्राह्मण चेहरा थे वहीं अब मोहन यादव की सरकार में राजेंद्र शुक्ल ब्राह्मण चेहरा बनकर उभरे हैं। वहीं जगदीश देवड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष बनाये गये हैं।

मोहन यादव काफी पढ़े लिखे हैं। मोहन यादव ने बीएससी, एलएलबी, एमबीए और पीएचडी भी की है। सबसे महत्व की बात यह है कि वह बाल्यकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक है। उज्जैन में वह खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह भी रहे। महाविद्यालयीन शिक्षा के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आये। सन 1982 में वह माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के स​ह सचिव व 1984 में छात्रसंघ के अ​ध्यक्ष रहे। इसके बाद विद्यार्थी परिषद में उज्जैन नगर के नगर मंत्री,राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा प्रदेश मंत्री रहे। विद्यार्थी परिषद में कई ​वर्षों तक विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने के बाद भाजपा में आये। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे। भजपा के जिला महामंत्री और बाद में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे। उमा भारती की सरकार में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे। सन 2011—2013 तक मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रहे। शिवराज सिंह चौहान के साथ उच्च शिक्षा मंत्री रहे।


डॉ. मनमोहन यादव का अपने क्षेत्र की जनता के साथ मधुर संबंध है। यही कारण है कि क्षेत्र में हर समाज से उनको वोट मिलता है।राजनैतिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद वह संघ की गतिविधियों में मनोयोग से भाग लेते हैं। संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के वह प्रिय हैं। मध्य प्रदेश में सहज व सरल नेता के रूप में उनकी प्रसिद्ध है। एक कुशल संगठक के रूप में उनकी मजबूत छवि है। हिन्दू जीवनमूल्यों के आग्रही हैं। वह स्वदेशी,स्वभाषा व स्वधर्म पर स्व की प्रेरणा से काम करने वाले हैं।


उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में उनकी ससुराल है। मुख्यमंत्री के नाते मोहन यादव के नाम की घोषणा हुई तब उनकी ससुराल सुल्तानपुर में भी उत्सव मनाया गया। मोहन यादव अयोध्या धाम के प्रख्यात संत एवं रामघाट स्थित सीताराम आश्रम के संस्थापक स्वामी आत्मानंददास  उर्फ नेपाली बाबा के शिष्य हैं। आशा है कि मोहन यादव नयी ऊर्जा और नये जोश के साथ कार्य करेंगे। क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी मिलनसार व्यक्तित्व है। मुख्यमंत्री रहते हुए वह सर्वसुलभ रहते थे। इसलिए मोहन यादव के समक्ष मुख्यमंत्री के रूप में सबसे बड़ी चुनौती जनता से जुड़ाव की होगी। वे उत्साही कर्मठ धार्मिक और राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता हैं। प्रदेश को उनसे बहुत आशा है।


आम चुनाव से ठीक पहले तीन राज्यों में मिली करारी हार से यह सिद्ध हो चुका है कि सीधे मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला कांग्रेस नहीं कर सकती। चुनाव से ठीक पहले जातिगत जनगणना को लेकर समाज को बांटने का प्रयास किया गया। फिर भी जनता ने उन्हें नकारा। क्योंकि आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रखर हिन्दुत्व के साथ-साथ जनता की मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया करा रही है। भाजपा केवल विकास का नारा ही नहीं लगाती। केन्द्र की योजनाएं धरातल पर दिख रही हैं। आमजनता को सरकारी की योजनाओं का फायदा मिल रहा है। इसलिए अब जनता कांग्रेस के बहकावे में आने वाली नहीं है। मध्य प्रदेश में दो दशक से भाजपा की सरकार है फिर भी प्रचण्ड बहुमत से सत्ता में आना आसान नहीं था।

मध्य प्रदेश में चुनाव पूर्व कमलनाथ से कई बार कहा कि मैं गर्व से कहता हूं कि मैं हिंदू हूं। फिर भी जनता ने उन पर विश्वास नहीं किया । कांग्रेस के कवि कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में कथाएं भी करवाई फिर भी हिन्दुओं का विश्वास जीतने में वह सफल नहीं हुए। क्योंकि एक तरफ सनातन का अपमान और दिखावे की श्रद्धा जनता सब समझती है। कुछ भी हो लेकिन मध्य प्रदेश में जीत का श्रेय नरेन्द्र मोदी के बाद यदि किसी को दिया जाना चाहिए तो वह व्यक्ति हैं भाजपा को वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव। चुनाव संचालन की पूरी कमान भूपेन्द्र यादव के हाथ में रही। चुनाव के दौरान उनका
सतत संपर्क राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ रहा।

केंद्रीय नेतृत्व की उपस्थिति से स्थानीय कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कार्य किया। इसका फायदा पार्टी को मिला। इसके साथ ही भाजपा ने तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों दो पूर्व सांसदों और एक राष्ट्रीय महासचिव को चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतारा। इसका भी सकारात्मक संदेश मतदाताओं में गया। यद्यपि इनमें एक केंद्रीय मंत्री और एक सांसद चुनाव हार गए पर इन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से आसपास की कमजोर सीटों पर वातावरण बना जिसका लाभ पूरे संसदीय क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवारों को मिला। वहीं अन्य केंद्रीय मंत्री चुनाव जीते ही साथ ही उनके संसदीय क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों को फायदा मिला। अब देखना यह है कि क्या मोहन यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी पर खरा उतर पायें​गे कि नहीं।


हिन्दू समाज की एकता और सामाजिक समरसता आज की नितांत आवश्यकता है। कांग्रेस पार्टी को ना देश की एकात्मता का ध्यान है और न ही समाज की समस्या से कोई लेना देना है। उसे केवल कुर्सी की चिंता है। जाति के नाम पर हिन्दू समाज के अंतर्गत संघर्ष खड़ा करने का वह निरंतर प्रयास करती है। वैसे हिन्दू समाज अब जागृत हो चुका है। हिन्दू जीवन मूल्यों का संरक्षण व संवर्धन करने वाला ही सत्ता में आएगा। क्या मोदी की गारंटी पर खरा उतरेंगे मोहन यादव..?

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