यूपी और एमपी में नाइट कर्फ्यू राजस्थान में कब करेंगे…?

आखिर राजस्थानियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कब कार्यवाही करेंगे? यूपी और एमपी में नाइट कर्फ्यू।नव वर्ष पर होने वाले जश्नों पर तत्काल रोक लगे। अजमेर में बांदनवाड़ा रिसोर्ट से लेकर अजमेर क्लब तक में हो रहे बड़े जश्न।

एस पी मित्तल

कोरोना संक्रमण को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चुनाव टालने के लिए चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निर्देश दिए हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने नव वर्ष के कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए सरकार को आदेश दिए हैं। हर राज्य अपने स्तर पर कोरोना के बचाव के उपाय कर रहा है, लेकिन इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि राजस्थानियों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है, जबकि प्रदेश भर में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में फिर से मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। मलमास होने के कारण इन दिनों शादियों पर तो रोक लगी हुई है, लेकिन नव वर्ष के जश्न प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर हो रहे हैं । ऐसे जश्नों को रोकने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि नव वर्ष के जश्नों में एक स्थान हजारों लोग जमा होंगे। छोटे छोटे होटलों और रिसोर्ट में क्षमता से अधिक युवक युवतियां आएंगी। सरकार कोविड-19 के नियमों की पालना की कितनी भी अपील करें, लेकिन अब लोग न तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर रहे हैं और न ही मास्क लगा रहे हैं।

घर पहुंचने पर हाथ धोना भी भूल गए हैं। अब जब 2021 की विदाई और 2022 के स्वागत के जश्न मनाएंगे तो कोरोना का संक्रमण तो बढ़ेगा ही। यह माना कि नव वर्ष के जश्न होटल कारोबार के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन जान बचेगी तो ऐसे जश्न अगले वर्ष भी हो सकते हैं। मौत को निमंत्रण देकर कोई जश्न मनाना अक्लमंदी नहीं है। अच्छा हो कि तत्काल प्रभाव से राजस्थान में नाइट कर्फ्यू लागू हो, ताकि होटलों और रिसोट में नव वर्ष के जश्नों पर रोक लगा सके। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तो खुद भुक्तभोगी हैं। कोरोना संक्रमण के कारण गहलोत एक वर्ष तक सरकारी बंगले से बाहर ही नहीं निकले। संक्रमण के बाद गहलोत के शरीर पर जो असर हुआ उसकी वजह से उन्हें एंजियोप्लास्टी तक करवानी पड़ी। यानी गहलोत को कोरोना के दर्द का अहसास है। मुख्यमंत्री होने के कारण अशोक गहलोत कोरोना वायरस के हमले को झेल गए, लेकिन हजारों राजस्थानियों ने सरकारी और निजी अस्पतालों में दम तोड़ दिया। राजस्थानियों को बचाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ही है। नाइट कर्फ्यू लगा कर कोरोना के खिलाफ शुरुआती कार्यवाही की जा सकती है।


अजमेर में भी नव वर्ष के आयोजन-

अजमेर में तो कोरोना का विस्फोट हो रहा है। आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एक ओर संक्रमण बढ़ रहा है तो दूसरी ओर नव वर्ष पर जश्न मनाने की तैयारियां भी हो रही है। अजमेर जिले का शायद ही कोई होटल रिसोर्ट होगा, जिसमें नव वर्ष का जश्न न मनाया जा रहा हो। बांदनवाड़ा के रिसोर्ट से लेकर कलेक्ट्रेट के निकट अजमेर क्लब तक में बड़े पैमाने पर जश्न की तैयारियां हो रही है। बांदनवाड़ा के रिसोर्ट तो रशियन बैले डांस तक होंगे, जबकि अजमेर क्लब के सभी सदस्यों की परिवार सहित उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है। भाग न लेने वाले सदस्य को भी जश्न का शुल्क जमा करवाना अनिवार्य है, इसलिए अजमेर क्लब में कुछ ज्यादा ही भीड़ होगी। जिले में जिस प्रकार नव वर्ष के आयोजन हो रहे हैं, उन्हें देखते हुए जिला और पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर भी निर्णय ले सकता है। कोरोना संक्रमण के कारण जिस प्रकार कैंटोनमेंट जोन बनाए जा रहे है, उसी प्रकार प्रशासन को नव वर्ष के जश्नों को नियंत्रित करने की कार्यवाही कर सकता है।

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