वर्ष 2030 तक यूपी में 2 गीगावॉट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य। यूपी को डेटा सेंटर और एआई हब बनाने की तैयारी, 2030 तक 2 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का लक्ष्य।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को देश में डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अवसंरचना का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप नई और अधिक आकर्षक डेटा सेंटर नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डेटा, एआई और डिजिटल अवसंरचना भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं और उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अभी से ठोस तैयारी करनी होगी।
उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक प्रदेश में 2 गीगावॉट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए नई नीति को व्यावहारिक, निवेशक-अनुकूल और समयानुकूल बनाया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि वर्ष 2026 तक देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8 से 9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत 900 मेगावॉट क्षमता विकसित करने और 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले अब तक 21,342.90 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा निवेशकों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए हैं।वर्तमान में प्रदेश में 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां संचालित हैं, जबकि 644 मेगावॉट की प्रतिबद्ध क्षमता पर कार्य प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नई नीति में एआई आधारित, ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रीन डेटा सेंटर, विश्वस्तरीय डिजिटल अवसंरचना, त्वरित अनुमोदन प्रणाली, निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा बेहतर कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने भूमि, पूंजी और ऋण संबंधी अनुदानों के साथ-साथ स्टाम्प शुल्क, विद्युत शुल्क तथा ट्रांसमिशन एवं व्हीलिंग शुल्क में दी जाने वाली रियायतों को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
योगी आदित्यनाथ ने एआई आधारित उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उन्नत एआई कंप्यूट संसाधन स्थापित करने वाले डेटा सेंटर पार्कों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिससे प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल अवसंरचना को मजबूती मिले।
मुख्यमंत्री ने हरित एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए उच्च स्तर का ग्रीन डेटा सेंटर प्रमाणन प्राप्त करने वाली इकाइयों और पार्कों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी समूह, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स और सिफी सहित कई प्रमुख कंपनियों की परियोजनाओं पर प्रदेश में कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर डिजिटल अवसंरचना का विकास हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने संभावित निवेश प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में 5,410 मेगावॉट क्षमता के डेटा सेंटर विकसित करने में रुचि दिखाई है। इन परियोजनाओं में लगभग 4.90 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश का अनुमान है। प्रस्तावित निवेशों में एएम ग्रीन, ट्राइफैक्टा कॉनेक्स, एस्सार, ग्रू एनर्जी, गोल्डन स्टेट कैपिटल, मैपलेट्री, CTRLS और एनएक्स्ट्रा सहित कई प्रमुख निवेशक शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा सेंटर विकास को केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र के साथ-साथ लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर जैसे शहरों में भी डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित किए जाएं, ताकि डिजिटल निवेश और रोजगार के अवसर प्रदेश के अधिकाधिक क्षेत्रों तक पहुंच सकें।



