स्टार्टअप नीति-2026 रोजगार सृजन और नवाचार को नई गति देगी :मुख्यमंत्री

यूपी को देश का अग्रणी स्टार्टअप हब बनाने की दिशा में नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार होगी।

  • युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाना लक्ष्य।
  • महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और बुंदेलखंड-पूर्वांचल के स्टार्टअप्स को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन।
  • डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए बढ़ेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस।
  • उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के गठन की तैयारी, स्टार्टअप इकोसिस्टम होगा और मजबूत।
  • स्टार्टअप रैंकिंग-2025 में ‘टॉप परफॉर्मर’ बनने के बाद नई नीति पर सरकार का फोकस।
  • एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी निभाएगा अग्रणी भूमिका।
  • लखनऊ और नोएडा के यू-हब बनेंगे डीप-टेक नवाचार के प्रमुख केंद्र।
  • विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के समन्वय से प्रयोगशालाओं से बाजार तक पहुंचेगा नवाचार।
  • स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल, मेंटरशिप और वैश्विक बाजारों तक पहुंच दिलाने पर जोर।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी स्टार्टअप गंतव्य बनाने के लिए नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की युवा शक्ति, विशाल बाजार, तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल एवं औद्योगिक आधार तथा निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण उत्तर प्रदेश को नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं।

मुख्यमंत्री रविवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि नई नीति ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाए तथा प्रदेश को स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाए।

प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2018 में ‘एस्पायरिंग लीडर’ श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश वर्ष 2025 में भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में ‘टॉप परफॉर्मर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्टार्टअप्स को प्रारंभिक चरण से लेकर विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक हर स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़े प्रोत्साहनों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों तथा पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्र के स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रावधान शामिल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उन्हें उत्कृष्ट एक्सेलेरेटर कार्यक्रमों, निवेशकों, उद्योग जगत और अनुसंधान संस्थानों से जोड़ा जाना चाहिए। नई नीति में मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग और नए बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने वाले प्रावधान शामिल किए जाएं।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, स्पेस टेक्नोलॉजी और हेल्थ-टेक जैसे क्षेत्रों में डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाने तथा उन्हें भविष्य की उन्नत प्रौद्योगिकियों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश भी दिए।

योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर नवाचार को प्रयोगशालाओं से बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने लखनऊ और नोएडा में प्रस्तावित यू-हब को डीप-टेक नवाचार के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप गतिविधियों के संचालन, प्रोत्साहन, वित्तीय प्रबंधन, निगरानी, क्षमता निर्माण तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का गठन आवश्यक है। यह मिशन स्टार्टअप नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ युवाओं को अपने नवाचारों को सफल उद्यम में बदलने के लिए बेहतर सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रस्तावित मिशन को पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था के साथ संचालित किया जाए, ताकि प्रदेश में एक मजबूत, समावेशी और परिणामोन्मुख स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित किया जा सके।

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