शासकीय सेवकों के लिए बजट में कोई योजना नही-हरि किशोर तिवारी

लखनऊ। राज्य में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व मेें बनी दूसरी बार की सरकार के पहले बजट में राज्य कर्मचारियों की पूरी तरह अनदेखी का आरोप लगाते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने कहा क रोके गए भत्ते, कैशलेस योजना और सरकारी नौकरी पर स्पष्ट नजरिया बजट में नही है। वैसे तो लोक लुभावन वादे हर बजट में होते है वैसे ही वायदे हर संवर्ग के लिए इस बजट में किए गए है।


इं0 हरि किशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव का कहना है कि कोविड-19 काल में कर्मचारियों के समाप्त किए गए अथवा रोके गए भक्तों की बहाली पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है।कर्मचारियों के कल्याण के लिए किसी योजना को नहीं रखा गया है। बहुप्रतीक्षित दीनदयाल उपाध्याय कर्मचारी कैशलेस योजना को अमल किए जाने में भी कोई बात नहीं की गई है। कर्मचारियों के लिए कार्यालयों में शौचालय आदि पर विशेष फोकस दिए जाने की बात समय-समय पर मंत्री गण के माननीय मुख्यमंत्री जी करते रहे हैं तथापि बजट में कोई योजना नहीं घोषित की गई है। रिक्त पदों पर भर्ती के संबंध में कोई रोस्टर की घोषणा नहीं हुई है। पिछले 5 सालों में 4.50 लाख पदों की भर्ती के विषय में बजट में कहा गया है जिसमें चार लाख 22 हजार कौशल विकास मिशन में प्रशिक्षण देने के उपरांत निजी क्षेत्रों में सेवायोजन जो प्राइवेट सेक्टर के अंतर्गत आता है में कराया गया जाना बताया गया है। शेष 28000 ही ऐसे शासकीय पद हैं जिन के विषय में भर्ती की बात कही गई है वर्तमान में स्वीकृत पदों के सापेक्ष लगभग 44 परसेंट पद खाली है। बेहतर होता कि बजट में प्राथमिकता के आधार पर सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले कर्मचारियों को भर्ती का स्पष्ट उल्लेख होता। यह बजट चुनाव के वक्त जारी भाजपा के घोषणा पत्र की तरह दिखाई पड़ रहा है।

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