विश्व मानता है भारत आध्यात्मिकता की ताकत-योगी

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कर्नाटक और उ0प्र0 का बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध, कर्नाटक संकट का साथी रामराज्य की आधारशिला को मजबूत करने की प्रथम भूमि कर्नाटक मानी जाती है। देश की योग एवं नेचुरोपैथी की परम्परा ‘शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्’ को मानती है।मुख्यमंत्री ने बेंगलूरू में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र ‘क्षेमवन’ का उद्घाटन किया। आई0टी0 व बायो टेक्नोलॉजी का हब बेंगलूरू अब तेजी के साथ परम्परागत चिकित्सा पद्धति के नये हब के रूप में दुनिया को मार्गदर्शन करता दिखायी दे रहा। दुनिया ने योग एवं आयुष की ताकत को सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड-19के दौरान स्वीकार किया, इम्युनिटी को बढ़ाने में आयुष ने प्रमुख भूमिका निभाई। उ0प्र0 में महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना करायी जा रही। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश 05 ट्रिलियन डॉलरकी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर। हमें अपनी कार्य पद्धति को प्रोफेशनलिज्म एवं टेक्नोलॉजीके साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ाने की आवश्यकता। सरकार के प्रयास के साथ सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिकऔर वाणिज्यिक संस्थान मिलकर कार्य करें। विश्व के 175 देशों ने 21 जून को योग परम्परा से जुड़कर भारत की आध्यात्मिकता की ताकत को महसूस किया।

बेंगलूरू/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेंगलूरू, कर्नाटक के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र ‘क्षेमवन’ का उद्घाटन करने के बाद इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने श्री क्षेत्र धर्मस्थल मंजूनाथ स्वामी मंदिर के धर्माधिकारी डॉ0 श्री वीरेन्द्र हेगड़े एवं उनके सहयोगियों को भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने के लिए हृदय से बधाई देते हुए कहा कि श्री हेगड़े द्वारा भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति को योग और नेचुरोपैथी के माध्यम से पहले शान्तिवन फिर सौम्यवन और अब बेंगलूरू में क्षेमवन के रूप में आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की योग व नेचुरोपैथी की परम्परा ने माना है कि ‘शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्।’ जितने भी धर्म के साधन हैं ये सभी शरीर के माध्यम से ही पूरे हो पाएंगे। एक स्वस्थ शरीर ही कार्यों को सम्पन्न कर सकता है।



कर्नाटक और उत्तर प्रदेश का बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध है। यह घनिष्ठ सम्बन्ध इस रूप में है कि कर्नाटक में भगवान श्री मंजूनाथ की परम्परा, नाथ सम्प्रदाय की शैव परम्परा को ही आगे बढ़ाती है और एक-दूसरे को सुदृढ़ आध्यात्मिक भाव के साथ जोड़ती है। कर्नाटक को संकट का साथी कहा गया है। इसी कर्नाटक क्षेत्र में प्रभु श्रीराम के सहयोग के लिए बजरंगबली मारूतिनन्दन हनुमान जी आगे आये थे। हनुमान जी की सहायता से उस समय जो मजबूत सेतुबन्ध का निर्माण हुआ था, वह भारत में रामराज्य की स्थापना का आधार बना था। रामराज्य की आधारशिला को मजबूत करने की प्रथम भूमि कर्नाटक मानी जाती है।


जब भारत को आधुनिक तकनीक की आवश्यकता थी, तो आई0टी0 के रूप में बेंगलूरू उसका हब बना। भारत को जब भी किसी क्षेत्र में आगे बढ़ने की आवश्यकता पड़ी तो बेंगलूरू ने उस समय संकट के साथी के रूप में मजबूती के साथ अपने कदम को आगे बढ़ाया है। बेंगलूरू आई0टी0 व बायो टेक्नोलॉजी का हब माना जाता है। अब यह तेजी के साथ परम्परागत चिकित्सा पद्धति के एक नये हब के रूप में दुनिया को मार्गदर्शन करता दिखायी दे रहा है।भारत की अर्थव्यवस्था 05 ट्रिलियन डॉलर बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में अपनी कार्य पद्धति को प्रोफेशनलिज्म एवं टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इस आवश्यकता के अनुरूप देश की अर्थव्यवस्था को 05 ट्रिलियन डॉलर की बनाने के लिए सरकार के प्रयास के साथ सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और वाणिज्यिक संस्थान मिलकर कार्य करेंगे, तो इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते दिखायी देंगे।


भारत को दुनिया की एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के लिए अग्रसर हैं। इसमें भारत के धर्मस्थलों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री जी ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैसूर में योग दिवस का शुभारम्भ किया था। योग दिवस भारत की उस परम्परा का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारत की आध्यात्मिक परम्परा को वैश्विक मंच पर एक नया स्थान दिलाती है। आज पूरा विश्व 21 जून की तिथि को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है। पहले योग के बारे में कई भ्रान्तियां थीं। आज भारत में करोड़ों लोग योग की परम्परा से जुड़ रहे हैं। विश्व के 175 देशों ने 21 जून को योग परम्परा से जुड़कर भारत की आध्यात्मिकता की ताकत को महसूस किया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग व आयुष की ताकत को दुनिया ने सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड-19 के दौरान स्वीकार किया। आधुनिक चिकित्सा पद्धति का अपना महत्व है, लेकिन शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए पम्परागत चिकित्सा पद्धति की तरफ जाना पड़ेगा। इस पद्धति में योग, नेचुरोपैथी, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा की अपनी भूमिका है। इस दृष्टि से बेंगलूरू में स्थापित ‘क्षेमवन’ भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने हेतु दिया गया एक महाप्रसाद है। इस प्रकार के केन्द्र की आवश्यकता पूरे देश में है। कोविड-19 महामारी के दौरान जिस प्रकार की चुनौती विश्व मानवता के सामने आयी थी, प्रधानमंत्री ने देश को कोविड महामारी से सुरक्षित निकाला था। भारत की आबादी 135 करोड़ है। भारत की तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका की आबादी एक चौथाई है। लेकिन कोविड से संयुक्त राज्य अमेरिका में होने वाली मृत्यु भारत से दोगुनी है। भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) ने व्यक्ति के जीवन को मजबूती प्रदान करते हुए उसकी इम्युनिटी को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।


आज उत्तर प्रदेश में महायोगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना करायी जा रही है। आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने डॉ0 नगेन्द्र जी का मार्गदर्शन लिया। डॉ0 नगेन्द्र जी ने उत्तर प्रदेश की टीम को स्वयं आकर मार्गदर्शन प्रदान किया था। उन्होंने कहा कि क्षेमवन, बेंगलूरू से नैचुरोपैथी में डिग्री प्राप्त करने वाले युवाआंे को उत्तर प्रदेश में कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। यहां की डिग्री का जो सम्मान कर्नाटक में है, वही उत्तर प्रदेश में भी होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई जी ने जिस मिशन भाव व कर्मठता के साथ कर्नाटक की जनता की सेवा का अद्भुत कार्य किया है। कर्नाटक में कराये जा रहे विकास से यह राज्य एक समृद्ध व सुरक्षित कर्नाटक बनने की ओर अग्रसर है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई तथा श्री आदि चुनचुन गिरी महा संस्थान मठ के स्वामी जगद्गुरु श्री श्री डॉ0 निर्मलानन्द नाथ स्वामी जी ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।

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