देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग, लोकतंत्र और विपक्ष के अधिकारों को लेकर घमासान तेज हो गया है। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और अर्थव्यवस्था को तबाही की ओर धकेलने के गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर भी उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। आखिर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों से बीजेपी क्यों घिरी नजर आ रही है? क्या वाकई विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है? प्रमोद तिवारी के इन आरोपों से सियासी गलियारों में हलचल तेज है।
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि मोदी सरकार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात पहुंचाने के साथ अर्थ व्यवस्था को और तबाही की ओर लगातार ढकेल रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में जनता के अधिकार को बचाने के लिए राहुल गांधी व प्रियंका गांधी विपक्षी सांसदों के साथ चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने सवाल दागा कि आयोग पर विपक्ष के सवाल से मोदी और अमित शाह के प्रवक्ता आखिर क्यों बेचैन हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस तरह से आयोग के बचाव में उछल कूद कर रही है उससे यह साफ जाहिर हो गया है कि बेईमानी से चुनाव जीतने के तिकड़म में दोनों की मिली भगत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को कैबिनेट मंत्री का प्रोटोकॉल हुआ करता है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी के साथ शारीरिक खींचतान की गयी और प्रियंका गांधी के साथ अमर्यादित व्यवहार हुआ उससे यह भी सिद्ध हो गया कि अब मोदी सरकार तानाशाह है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी के साथ सरकार ने राजनैतिक प्रतिशोध में बर्बरता और नृशंसता तथा गंदे ढ़ग से अराजनैतिक आचरण की सीमा इंतहा कर दी। उन्होंने कहा कि तेरह करोड़ मतदाताओं के जबरिया नाम काट दिये गये और इतने गम्भीर मुद्दे पर विपक्ष आवाज न उठाये तो वह क्या करे। उन्होंने कहा कि डरी और सहमी सरकार लोगों के वोट के अधिकार से खिलवाड़ कर रही है। राहुल गांधी पर लोकतांत्रिक ढंग से धरना प्रदर्शन को लेकर दर्ज कराई गयी एफआईआर पर उन्होंने कहा कि यह डरी हुई मोदी सरकार की राजनैतिक हतासा के चेहरे को उजागर कर गयी है।
सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस और विपक्ष मोदी सरकार के हर जुल्म को भी सहने को तैयार है। वहीं उन्होंने आरबीआई द्वारा रेपोरेट में 0ण्25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को भी मोदी सरकार के द्वारा अर्थव्यवस्था की तबाही का एक और काला अध्याय कहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस फैसले से रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई के द्वारा रेपोरेट की बढ़ोत्तरी के चलते मेक इन इण्डिया तथा उद्योग संचालन एवं कारोबारी के क्षेत्र में आर्थिक स्थिति और खराब होगी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि रूपये का डालर के मुकाबले दो दिनों से टूटना भी अर्थव्यवस्था की लडखड़ाहट का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दाम को नियंत्रित करने में उसे विफलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विफलताओं को छिपाने के लिए अब विपक्ष के साथ देश की जनता के प्रति भी जवाबदेही से मुंह छिपा रही है।



