राजेन्द्र चौधरी
साढ़े चार सौ वर्षों तक पुर्तगाल के क्रूर दमनचक्र में पिस रहे गोवा की मुक्ति का पहला आवाह्न 18 जून 1946 में समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया ने किया था। अंततः 19 दिसम्बर 1961 को गोवा आजाद हुआ। पूरा देश 18 जून को गोवा मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करता है। समाजवादी नेतृत्व का गोवा से पुराना रिश्ता भी रहा है। समाजवादी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी अग्रणी भूमिका में रहे हैं। आज हम गोवा मुक्ति दिवस के साथ स्वतंत्रता सेनानियों का भी नमन करते हैं।
वर्ष 2023 में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने गोवा लिबरेशन डे पर 18 से 22 दिसम्बर तक पांच दिवसीय गोवा यात्रा वहां के गांधीवादी संस्थान पीसफुल सोसायटी के संस्थापक कुमार कलानंद मणि के निमंत्रण पर की थी। गोवा आंदोलन से सम्बन्धित पवित्र स्थलों पर जाकर श्रद्धासुमन अर्पित करने का यहां सौभाग्य मिला।
राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि समाजवादी आंदोलन के महानायक डॉ. राम मनोहर लोहिया को गोवा आंदोलन के दौरान अगोड़ा सेंट्रल जेल में जिस बैरक में गिरफ्तार कर रखा गया था वहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित है। दक्षिण गोवा में मड़गांव सेंट्रल स्क्वायर से 18 जून 1946 को गिरफ्तार कर उन्हें अगोड़ा जेल में बंदी बनाकर रखा गया था। यहां जेल हेरिटेज ब्लाक में बंदी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची में लोहिया जी का नाम भी अंकित है। इन स्थानों पर जाकर राजेन्द्र चौधरी को भी श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला। जहां आज मडगांव के लोहिया मैदान में डॉ. लोहिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। यहा से बड़ी जनसभा को सम्बोधित करते हुए डॉ. लोहिया को 18 जून 1946 को गिरफ्तार किया गया था। यहां प्रतिमा के समीप भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखनीय शिलापट्ट तथा मनोहर राय सरदेसाई की डॉ. लोहिया पर 18 जून से सम्बन्धित मार्मिक कविता पढ़कर मन अतीत के गौरवशाली दिनों की याद करने लगता है।
अखिलेश यादव गोवा मुक्ति संग्राम के इस रोमांचक वृत्तांत से पूरी तरह परिचित है। उनका कहना है कि समाजवादियों ने तनी हुई बन्दूक के सामने अपने हक की लड़ाई लड़ने का सबक श्रद्धेय डॉ. लोहिया जी से सीखा, जिन्होंने 18 जून 1946 के दिन गोवा में सविनय अवज्ञा के माध्यम से आजादी की अलख जगाई थी। अखिलेश यादव डॉ. राममनोहर लोहिया के इसी रास्ते पर चल रहे हैं जो अन्याय के प्रतिकार, लोकतंत्र को बचाने तथा वंचितों को अधिकार दिलाने का रास्ता है। समाजवादी पार्टी लोहिया जी की विरासत को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध है।
स्मरणीय है, वर्ष 1498 में वास्को डि गामा केरल के कालीकट तट पर पहुंचने वाले प्रथम पुर्तमाली नाविक थे वर्ष 1570 में अल्बुकर्क ने पुर्तगाली सेना के साथ गोवा पर कब्जा कर लिया। 450 वर्षों तक पुर्तगाली गोवा पर अपना दमनकारी शासन चलाते रहे। अपने एक गोवा के मित्र के घर विश्राम के लिए गए लोहिया जी ने जब गोवा में नागरिक अधिकारों का हनन देखा तो उन्हांेने बगावत का बिगुल बजा दिया। उनकी गिरफ्तारी से जनाक्रोश सड़कों पर उतर आया। समाजवादी नेता मधु लिमये को भी इस मुक्ति आंदोलन में भारी यातनाएं सहनी पड़ी थी। 15 अगस्त 1955 को कोच्चि से 5 हजार लोगों ने गोवा कूच किया तो निहत्थे लोगों पर पुलिस की गोलियों से 30 लोग शहीद हो गए। अंततः 19 दिसम्बर 1961 को भारतीय सेना की पहल पर पुर्तगाली कुशासन का अंत हुआ, गोवा को सदियों की दासता से मुक्ति और स्वतंत्रता की हवा में श्वांस लेने का ऐतिहासिक अवसर मिला था, जिसका श्रेय डॉ. लोहिया की पहल से ही सम्भव हो सका।



