Chief Minister

  • उत्तर प्रदेशPhoto of विन्ध्य-बुंदेलखंड के हर घर जलापूर्ति की हकीकत जानेंगे  जलशक्ति मंत्री

    विन्ध्य-बुंदेलखंड के हर घर जलापूर्ति की हकीकत जानेंगे जलशक्ति मंत्री

    हर घर जलापूर्ति की हकीकत जानने विन्ध्य, बुंदेलखंड के गांव-गांव जाएँगे जलशक्ति मंत्री।थर्ड पार्टी एजेंसियां रोजाना निरीक्षण कर रिपोर्ट करें…

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  • विशेषPhoto of गोरखपुर में बनेगा यूपी का चौथा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम

    गोरखपुर में बनेगा यूपी का चौथा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम

    गोरखपुर में बनेगा यूपी का चौथा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, 236 करोड़ की लागत से होगा निर्माण।यह स्टेडियम गोरखपुर एयरपोर्ट से…

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  • उत्तर प्रदेशPhoto of 2027 तक यूपी को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प-मुख्यमंत्री

    2027 तक यूपी को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प-मुख्यमंत्री

    राजू यादव उत्तर प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प के साथ योगी सरकार ने कमर कस…

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  • विशेषPhoto of खतरे में मधुमक्खियां का जीवन..!

    खतरे में मधुमक्खियां का जीवन..!

    खतरे में हैं धरती का सबसे मेहनती सुपर जीव मधुमक्खियां..! सच तो यह है कि एक कीट के रूप में…

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  • राष्ट्रीयPhoto of आरक्षण: पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय..?

    आरक्षण: पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय..?

    डॉ.सत्यवान सौरभ आरक्षण भारतीय समाज में सदियों से व्याप्त असमानताओं को समाप्त करने और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने…

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  • विशेषPhoto of  प्रकृति का सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

     प्रकृति का सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

    महान साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत की जयंती 20 मई पर विशेष… सुमित्रानंदन पंत : प्रकृति का सुकुमार कवि, छायावादी युग का स्तंभ।साहित्य सृजन से लेकर स्वाधीनता आंदोलन के सेनानी, मानवतावादी दृष्टिकोण लोगों के लिए है प्रेरणा पुंज। प्रदीप कुमार वर्मा सुमित्रानंदन पंत आधुनिक हिंदी साहित्य में ‘छायावादी युग’ के श्रेष्ठ कवि थे। सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के उपासक और प्रकृति की सुंदरता का वर्णन करने वाले कवि के रूप में भी जाना जाता है। पंत को ऐसी कविताएँ लिखने की प्रेरणा उनकी अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड से ही मिली। जन्म के छह-सात घंटे बाद ही माँ से बिछुड़ जाने के दुख ने पंत को प्रकृति के करीब ला दिया था। पंत ने सात वर्ष की अल्प आयु में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनकी कविताओं में प्रकृति का सौन्दर्य चित्रण के साथ-साथ नारी चेतना और ग्रामीण जीवन की विसंगतियों का मार्मिक चित्रण देखने को मिलता हैं। यही वजह है कि सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में भी जाना जाता है। यही नहीं पंत जी का साहित्य सज्जन आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय माना जाता है।         सुमित्रानंदन पंत का जन्म उत्तराखंड राज्य बागेश्वर ज़िले के कौसानी में 20 मई 1900 को हुआ था। सुमित्रानंदन पंत के पिता कानाम गंगादत्त पंत और माता का नाम सरस्वती देवी था।  यह विधाता की करनी ही थी कि पंत के जन्म के कुछ घंटो बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया। जिसके बाद उनका लालन-पोषण उनकी दादी ने किया। बचपन में उनका नाम गुसाईं दत्त था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कौसानी गांव से ही शुरू की। लेकिन हाई स्कूल के समय रामकथा के किरदार लक्ष्मण के व्यक्तित्व एवं लक्ष्मण के चरित्र से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम गुसाई दत्त से बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया।   हाई स्कूल के बाद वह वाराणसी आ गए और वहां के जयनारायण हाईस्कूल में शिक्षा प्राप्त की।            इसके बाद सुमित्रानंदन पंत वर्ष 1918 में इलाहबाद चले गए और ‘म्योर कॉलेज’ में बाहवीं कक्षा में दाखिला लिया उस समय पूरे भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। इलाहाबाद में पंत गांधी जी के संपर्क में आए। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने म्योर कॉलेज को छोड़ दिया और आंदोलन में सक्रिय हो गए। इसके बाद वह घर पर रहकर स्वयंपाठी के रूप में हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन करने लगे। इसके साथ ही सुमित्रानंदन पंत अपने जीवन में कई दार्शनिकों-चिंतकों के संपर्क में आए।  गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और श्रीअरविंद के प्रति उनकी अगाध आस्था थी। वह अपने समकालीन कवियों सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और हरिवंशराय बच्चन से भी प्रभावित हुए।            पंत जी के साहित्य में प्रकृति का प्रमुखता से चित्रण मिलता है। इस संदर्भ में पता चलता है कि उनकी मां के स्वर्गवास के बाद प्रकृति की रमणीयता ने पंत जी के जीवन में माँ की कमी को न केवल पूरा किया, बल्कि अपनी ममता भरी छाँह में पंत जी के व्यक्तित्व का विकास किया। इसी कारण सुमित्रानंदन पंत जीवन-भर प्रकृति के विविध रूपों को प्रकृति के अनेक आयामों को अपनी कविताओं में उतारते रहे। यहां यह भी बताना उचित रहेगा की सत्य, शांति, अहिंसा, दया, क्षमा और करुणा जैसे मानवीय गुणों की चर्चा बौद्ध धर्म-दर्शन में प्रमुख रूप से होती है। इन मानवीय गुणों को पंत जी की कविताओं में भी देखा जा सकता है। …

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  • उत्तर प्रदेशPhoto of अपने बच्चों को न करें नजरअंदाज

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  • लाइफ स्टाइलPhoto of मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों को कैसे रोकें..?

    मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों को कैसे रोकें..?

    विजय गर्ग मोबाइल फोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी के उदय के साथ, कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को स्क्रीन से…

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