
केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ अधीक्षक ने जेल में मचा रखी लूट! जेल में सुरक्षाकर्मियों का हो रहा जमकर उत्पीड़न।जेल सुरक्षा के बजाए जेलकर्मियों को लगाया पत्नी की सुरक्षा में। प्रमुख सचिव कारागार को भेजेंगे शिकायती पत्र से हुआ खुलासा।
राकेश यादव
लखनऊ। लखनऊ के बाद जेल अधीक्षक आशीष तिवारी ने केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में भी लूट मचा रखी है। जेल में अधीक्षक के उत्पीड़न से बंदीरक्षक काफी त्रस्त है। सुरक्षाकर्मियों को अवकाश स्वीकृत कराने और चिकित्सीय अवकाश के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस अव्यवस्था का खुलासा जेल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी के प्रमुख सचिव कारागार को भेजे गए पार्टवस हुआ है। इस पत्र में जेल अधीक्षक पर सुरक्षाकर्मियों के उत्पीड़न और वसूली जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
प्रमुख सचिव कारागार को भेजे गए शिकायती पर में आरोप लगाया गया है कि जेल अधीक्षक कर्मचारियों को अवकाश देने के लिए काफी परेशान करते है। इसकेव्सथ ही मेडिकल अवकाश को लंबित रखकर उन्हें चिकित्सा अवकाश को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के प्रति हस्ताक्षरित होने के बाद भी उसे फर्जी बताया जाता है। कर्मचारियों के मेडिकल अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाता है। इसके साथ ही डीजी जेल स्पष्ट आदेशों के बाद भी संबद्ध कर्मचारियों को मूल तैनाती स्थल के लिए कार्यमुक्त नहीं किया गया है। जेल अधीक्षक डीजी के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
शिकायती पत्र में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली ही कि जेल अधीक्षक ने सुरक्षाकर्मियों को जेल की सुरक्षा के बजाए पत्नी की सुरक्षा में लगा रखा है। इस सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी कागजों में तो जेल पर दिखाई जाती है लेकिन उन्हें कन्नौज में कोषागार अधिकारी के पद पर तैनात पत्नी के साथ लगा रखा गया है।
शासकीय वहां से पत्नी के प्रतिदिन कोषागार आने जाने के लिए लगे जेल वॉर्डरो को बिना कार्य के वेतन देकर शासकीय धन की क्षति पहुंचाई जा रही है। इसके साथ ही सरकारी चतुर्थ श्रेणी के आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को अपने आवास पर निजी कार्यों के लिए लगा रखा गया है। यह कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का खुला उल्लंघन है। पत्र में मांग की गई है कि इन समस्त पहलुओं को जांच कराकर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जाय।
एटीएस की जांच रिपोर्ट के बाद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही
कारागार विभाग में ऊंची पहुंच और जुगाड के शासन में मजबूत पकड़ रखने वाले जेल अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। जेल अधीक्षक आशीष तिवारी के लखनऊ जेल में तैनाती के दौरान जेल में बंद बांग्लादेशी बंदियों के पास ढाका से वाया कोलकाता होते हुए मोटी धनराशि आती थी। इस मामले की जांच एटीएस ने की थी। करीब एक माह से अधिक समय तक चली इस जांच में बंदियों तक पैसा पहुंचाने के लिए वार्डर से लेकर अधिकारियों तक को दोषी ठहराया गया था। जांच रिपोर्ट आज भी मुख्यालय की फाइलों में कैद पड़ी है। इस गंभीर मामले में भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। जेल के गल्ला गोदाम से 35 लाख रुपए की नगद धनराशि बरामद होने की जांच रिपोर्ट को भी दबा दिया गया।



