कृषि बिल वापसी की घोषणा पर उठते सवाल

के0शी0 गुप्ता

एक बार फिर से देश भर में 19 नवंबर 2021 गुरु पर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि बिल वापस लेने की घोषणा ने कृषि बिल को चर्चा का विषय बना दिया है। इस बिल को लेकर शुरू किया गया किसान आंदोलन एक लंबे समय का इतिहास रच चुका है। इस आंदोलन से जुड़े समस्त देश के किसान एक लंबे समय से दिल्ली एनसीआर के बॉर्डर पर अपना जमावड़ा जमाए हुए हैं। कोरोना महामारी, सर्दी, बारिश गर्मी इत्यादि मुश्किलों के बावजूद भी किसानों ने हार नहीं मानी। इस आंदोलन के दौरान किसानों को अन्य कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा तथा कई किसान भाइयों को शहादत देनी पड़ी । किसान बिल वापसी की घोषणा के पश्चात से ना सिर्फ किसानों में बल्कि देश की आम जनता जो उनके समर्थन में खड़ी थी, खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। यह अपने आप में एक बड़ी जीत है। किसानों के अटल दृढ़ निश्चय के आगे सरकार को किसान बिल वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। तथाकथित तथ्यों के अनुसार अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह कुछ किसान भाइयों को किसान बिलो की महत्वता को समझा नही पाए तथा किसानों की तकलीफों को समझते हुए उन्होंने किसान बिल वापस लेने का फैसला लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीनों द्वारा कृषि बिल का वापस लेने की घोषणा पर क्षेत्र के किसान नेता और किसानों ने इस किसान आंदोनल और उनके लंबे चले संघर्षों की जीत, देश के पूरे किसानों की जीत बतायी। हम सबसे पहले इसके लिए संघर्ष करने वाले उन शहीद किसानों को नमन करेंगे।


इस फैसले को लेकर आज देश भर में विपक्षी पार्टियों तथा आम जनता द्वारा कई तरह की अटकले लगाई जा रही है। विपक्षी पार्टियों के अनुसार यह एक राजनीतिक फैसला है जो आने वाले यूपी तथा अन्य राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है । दूसरी तरफ किसानों द्वारा अभी भी आंदोलन को खत्म करने या पीछे हटने की कोई बात सामने नजर नहीं आई है। तथाकथित कथन के अनुसार किसान अभी भी पूर्णता आश्वस्त नहीं है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घोषणा का स्वागत करते हुए लिखित फैसले के इंतजार में है। जो एक विचारणीय विषय है। यह कहना गलत नहीं होगा कि किसान/ देश की आवाम कहीं ना कहीं कार्यरत सरकार पर से अपना विश्वास खो चुकी है।
इस फैसले को लेकर उठाए गए प्रश्न कितने सार्थक है यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक इस फैसले को लेकर उनकी महानता को सरहा रहे हैं। उनके अनुसार गुरु नानक देव जी के पथ पर चलने का यह एक बड़ा साहस पूर्ण फैसला है। सवाल यह उठता है कि क्या कारण है कि एक लंबे समय के अंतराल के पश्चात किसानों की तकलीफ और दर्द को समझते हुए इस बिल को अचानक से वापस लेने की घोषणा कर दी गई ? क्या गुरु नानक देव जी की शिक्षा को एक ढाल का रूप दिया गया है? ऐसे अनेकों सवाल है जो आज ना सिर्फ किसानों ,विपक्षी पार्टियों और आवाम के दिलों में उठ रहे हैं । इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इस तरह के इतने बड़े फैसले राजनीतिक उतार चढ़ाव से प्रभावित होते हैं। कारण कोई भी हो मगर हम उम्मीद करते हैं कि किसान बिल वापसी की घोषणा ना सिर्फ किसानों बल्कि संपूर्ण देश के हित में होगी। यदि देश का किसान/आम जनता खुशहाल होगी तो देश निश्चय ही प्रगति करेगा।


लेखिका समाज सेविका
द्वारका दिल्ली

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