Tuesday, May 12, 2026
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पेपर लीक कोई संयोग नहीं,सुनियोजित साजिश:प्रमोद तिवारी

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पेपर लीक कोई संयोग नहीं,सुनियोजित साजिश:प्रमोद तिवारी
पेपर लीक कोई संयोग नहीं,सुनियोजित साजिश:प्रमोद तिवारी

NEET-2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर सियासत तेज हो गई है। Pramod Tiwari ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना ने 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं और सरकार केवल जांच के नाम पर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।

प्रमोद तिवारी ने NEET-2026 परीक्षा रद्द होने और कथित पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के कारण 22-23 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और इसका असर करोड़ों परिवारों पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल सीबीआई जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रही है, जबकि पेपर लीक कोई संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित षड़यंत्र है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि छात्र परीक्षा पास करेंगे तो वे नौकरियों के पात्र बनेंगे, लेकिन सरकार के पास रोजगार नहीं है, इसलिए ऐसी घटनाएं जानबूझकर होने दी जा रही हैं। उन्होंने इसे शिक्षा क्षेत्र का “संगठित अपराध” बताते हुए कहा कि यह अक्षम्य है। राज्यसभा के उप नेता विपक्ष ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में Bharatiya Janata Party की सरकार है, वहीं लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि दोबारा रजिस्ट्रेशन न कराने की बात से छात्रों का बर्बाद हुआ समय वापस नहीं आ सकता।

NEET-2026 पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। Pramod Tiwari ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक महज संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश हैं। उन्होंने कहा कि इससे लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य पर चोट पहुंची है। तिवारी ने केंद्र सरकार और Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं युवाओं के भरोसे को तोड़ रही हैं।

आर्थिक मुद्दों पर भी सरकार को घेरते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है और यह देश की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के पेट्रोल-डीजल बचाने और सोना कम खरीदने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि फिजूलखर्ची रोकने की सलाह देने से पहले सरकार और सत्ताधारी दल को खुद अपने कार्यक्रमों और राजनीतिक आयोजनों में होने वाले खर्च पर नियंत्रण करना चाहिए।