नहीं पूरा किया मछुआरा दृष्टि पत्र का संकल्प-लौटनराम निषाद

भाजपा सरकार कर रही17 अतिपिछड़ी जातियों से वादाखिलाफी, नहीं पूरा किया मछुआरा दृष्टि पत्र का संकल्प।मुख्य न्यायाधीश की पीठ में आज भी सख्त निर्देश के बाद भी सरकार ने नहीं दाखिल किया काउन्टर एफिडेविट।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की1 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ देने के मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद खण्डपीठ में दाखिल जनहित याचिका की आज मुख्य न्यायाधीश की पीठ में सुनवाई थी।परन्तु सरकार ने न्यायालय के 13 अप्रैल के सख्त निर्देश के बाद भी काउन्टर एफिडेविट दाखिल नहीं किया।अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यायालय की लताड़ के बाद भी न्यायालय में काउन्टर एफिडेविट दाखिल न करने पर राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि सरकार 5-6 वर्षों से हीलाहवाली करती आ रही है।उन्होंने भाजपा सरकार पर निषाद, मल्लाह,केवट,बिन्द, धीवर,कहार,रैकवार,बाथम,राजभर,कुम्हार के साथ वादाखिलाफी कर करी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जुलाई,2015 को गोरखपुर के निषाद मछुआरा सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए कहे थे कि अब निषादों के मान सम्मान,अधिकार व आरक्षण की लड़ाई भाजपा लड़ेगी।भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने 5 अक्टूबर 2012 को दिल्ली के मावलंकर ऑडिटोरियम में फिशरमैन विजन डाक्यूमेंट्स जारी किया थे।उन्होंने वादा किये थे कि 2014 में भाजपा सरकार बनने पर आरक्षण की विसंगति दूर कर निषाद मछुआरा जातियों को एससी/एसटी का आरक्षण दिया जाएगा।परन्तु भाजपा अपने ही वादे से मुकर कर वादाखिलाफी कर रही है।उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि मुख्यमंत्री ने मझवार की पर्यायवाची जातियों के सम्बंध में आरजीआई को 20 दिसम्बर,2021 को पत्र भेजकर जो जानकारी मांगे थे,उसका क्या हुआ?उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 17 अतिपिछड़ी जातियों को झूठा भुलावा देती आ रही है।


निषाद ने बताया कि 22 दिसम्बर व 31 दिसम्बर 2016 को 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने शासनादेश सपा सरकार ने जारी किया था।24 जनवरी 2017 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ ने डॉ. भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय एवं जनकल्याण समिति गोरखपुर की याचिका के आधार पर स्थगन आदेश दे दिया था।29 मार्च 2017 को राष्ट्रीय निषाद संघ के पक्ष को इसके अधिवक्ता सुनील कुमार तिवारी ने साक्ष्य सहित मजबूती से अपना तर्क दिया।मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने स्टे वैकेट करते हुए इन जातियों का प्रमाण पत्र बनाने का निर्णय दिया।उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय का अनुपालन करते हुए मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों आदेश जारी न कर नया शासनादेश उस विषयक जारी किया। 2017 से अब तक दर्जनों बार न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से काउंटर एफिडेविट की मांग किया,परन्तु प्रदेश सरकार ने काउंटर एफिडेविट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया।न्यायालय ने 13 अप्रैल को उक्त मामले की सुनवाई करते हुये सरकार को कड़ी फटकार लगाई।उच्च न्यायालय ने मई महीने में लगने वाली तारीख को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था।आज 20 मई को मुख्य न्यायाधीश की पीठ में निषाद आदि अतिपिछड़ी जातियों के आरक्षण मुद्दे पर सुनवाई होनी थी।पर,इस बार भी उत्तर प्रदेश सरकार ने काउन्टर एफिडेविट दाखिल नहीं किया।अगली सुनवाई 1 जुलाई को न्यायालय ने तय किया है।


निषाद ने कहा कि भजपा सरकार निषाद सहित 17 फ़अतिपिछड़ी जातियों से वादाखिलाफी व अन्याय कर रही है।2017 से उत्तर प्रदेश सरकार अतिपिछड़ी जातियों के अधिकारों को छिनती आ रही है।मत्स्य पालन, बालू मोरंग खनन जैसे परम्परागत पेशों को सार्वजनिक नीलामी द्वारा छीनकर बाहुबलियों व सामंती माफियाओं के हाथों नीलाम करवा रही हैं।उन्होंने बताया कि मल्लाह,केवट,माँझी, बिन्द, धीवर, धीमर,रैकवार, तुरहा गोड़िया,कहार आदि अनुसूचित जाति में 10 अगस्त,1950 से शामिल मझवार,बेलदार,तुरैहा, गोंड़ की पर्यायवाची व वंशानुगत जाति नाम हैं।सेन्सस-1961 के अनुसार माँझी, मल्लाह,केवट,गोंड़ मझवार,मुजाबीर को मझवार की पर्यायवाची व जेनरिक नाम माने जाने के बाद भी इन जातियों के साथ अन्याय व सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

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