अधीक्षक का तबादला करना भूल गया जेल मुख्यालय..!

अधीक्षक विहीन जेलों के बाद भी नहीं मिला किसी जेल का प्रभार। छह माह बतौर जेलर, अब जेटीएस में, 30 सितंबर को हो जाएंगे रिटायर।

कुमार राकेश

विवादित अधीक्षक को मिला अतिरिक्त प्रभार – राजधानी की जिला जेल में डिप्टी सीएमओ वाईएस सचान की हत्या के बाद सुर्खियों में आए जेलर वर्तमान में अधीक्षक जिला जेल फतेहगढ़ भीमसेन मुकुंद को आईजी जेल ने सेंट्रल जेल फतेहगढ़ का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। जेल मुख्यालय से जारी रेडियोग्राम में कहा गया है कि वह जिला जेल के साथ सेंट्रल जेल फतेहगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था भी देखेंगे। बीते दिनों अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर उन्हें नोएडा जेल से हटाकर मऊ जेल भेजा गया था। शासन एवम मुख्यालय में सेटिंग कर कुछ समय बाद ही अपना तबादला मऊ से जिला जेल फतेहगढ़ करा लिया था। विवादों से घिरे मुकुंद को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का मामला विभागीय अफसरों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

लखनऊ। प्रदेश का जेल मुख्यालय अपने कार्यों के प्रति कितना सजग है। मुख्यालय की सजगता का एक मामला प्रकाश में आया है। मुख्यालय के आला अफसर जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नति पाए एक अफसर का तबादला किए जाने के लिए नाम भेजना ही भूल गए। अफसरों ने हुई लापरवाही को छिपाने के लिए प्रोन्नत पाए अफसर को जेल ट्रेनिंग स्कूल में सम्बद्ध कर दिया। अधीक्षक पद पर प्रोन्नत यह अधिकारी ३० सितंबर को बगैर तैनाती पाए ही सेवानिवृत हो जाएंगे। ऐसा तब है जब प्रदेश की करीब एक दर्जन जेलों में अधीक्षक नहीं हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक बीते फरवरी माह में प्रदेश कारागार विभाग के आधा दर्जन जेलर को अधीक्षक पद पर प्रोन्नत किया गया। प्रोन्नति पाए जेलर ललितपुर पीके त्रिपाठी, गाजीपुर के शिवशंकर यादव, पीलीभीत के रमाकांत दोहरे, नैनी के धर्मपाल सिंह, सीतापुर के रामशिरोमणि यादव, महोबा के भोलानाथ मिश्र को अधीक्षक पद पर प्रोन्नत किया गया। राम शिरोमणि को उन्नाव, रमाकांत दोहरे को प्रतापगढ़, भोलानाथ मिश्र को देवरिया एवम पीके त्रिपाठी का कन्नौज स्थानांतरित कर दिया गया। नैनी के धर्मपाल सिंह प्रमोशन के बाद ही सेवानिवृत हो गए।

सूत्रों का कहना है कि गाजीपुर जिला जेल पर तैनात जेलर से अधीक्षक पद पर प्रोन्नत हुए शिव कुमार यादव का जेल मुख्यालय के आला अफसर तबादले के लिए नाम भेजना ही भूल गए। बताया गया है शिव कुमार यादव ने प्रोन्नत साथी अफसरों का तबादला होने और उनका नहीं होने को लेकर आईजी जेल आनंद कुमार से मुलाकात भी की। सूत्र बताते है कि अफसरों ने अपनी खामियों को छिपाने के लिए पहले तो गाजीपुर में ही रखा। मामला संज्ञान में आने के बाद उन्होंने प्रमोशन पाए अधीक्षक को जेल पर तैनात करने के बजाए गाजीपुर से जेटीएस पर अटैच कर दिया। ऐसा तब किया गया जब प्रदेश की करीब एक दर्जन जेलों में अधीक्षक नहीं है। उधर इस संबंध में आईजी जेल आनंद कुमार से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा। डीआईजी मुख्यालय शैलेंद्र मैत्रेय ने अधीक्षक शिव कुमार यादव को जेटीएस में सम्बद्ध किए जाने पुष्टि तो की लेकिन और कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया।

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