बहुमुखी प्रतिभा के धनी है ज्ञान आर्य

लखनऊ। कहते हैं ज्ञान किसी समुदाय या व्यक्ति की बपौती नहीं है। ज्ञान और प्रतिभा के बल पर ही व्यक्ति आगे बढ़ता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, ज्ञान आर्य। श्री आर्य अभी तक सात नाटकों का लेखन कर चुके हैं, जिनका लखनऊ व लखनऊ से बाहर के क्षेत्रों में भी विभिन्न मंचों पर मंचन भी हो चुका है।बता दें कि ज्ञान आर्य उत्तर प्रदेश के सूचना विभाग में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत हैं। उनके द्वारा लिखित लघु फिल्म ‘क्या कसूर’ किन्नरों की मनोदशा को उजागर करती है। क्या कसूर का निर्माण करके पीएफ प्रोडक्शन ने यूट्यूब पर प्रदर्शित किया है। कुछेक चैनलों ने किन्नर गुरू पायल सिंह के साक्षात्कार के दौरान इसके कुछ अंश दिखाये हैं। श्री आर्य द्वारा मौसी माया, आफत गले पडी है, आखिर मां हूं, झोला छाप डाक्टर, तीन लफंगे, अंत का उदय और स्वामीजी आदि नाटकों का लेखन किया है, जिन्होंने काफी ख्याति भी अर्जित की है।इसके साथ ही श्री आर्य दर्जनों नाटकों में अभिनय भी कर चुके हैं। इनके द्वारा अभिनीत भोजपुर फिल्म माई का अंचरवा बाबूजी के दुलार जून 2017 में प्रदर्शित हुई थी और यूपी के पूर्वांचल धूम मचाने के बाद अब बिहार में भी प्रदर्शित करने की योजना है। फिल्म में ज्ञान आर्य ने हीरो बबलू राय के बडेभाई की भूमिका निभाई है। इससे पहले श्री आर्य ने 2006 में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म नइहर के माडो पिया की चुनरी में भी एक छोटी सी भूमिका निभाई थी, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म में मनोज तिवारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।इसके अलावा ज्ञान आर्य द्वारा बाप जी, पवनपुत्र, वीर अर्जुन, अंश, अजय आज़ाद, हेलो पापा, फसल, डिबियापुर आदि फिल्मों में शसक्त भूमिकाएं निभाई हैं।


मार्च, 22 में श्री आर्य के बेटे वेद प्रकाश आर्य द्वारा लिखित भोजपुरी फिल्म “राजा के प्यार में” की शूटिंग बलिया में होने जा रही है, जिसमे हीरो के पिता का रोल निभाएंगे।उन्होंने कलापथ व रंगपथ का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने मेरे द्वारा लिखित नाटकों का मंचन करके उनकी कला को नया आयाम दिया है। इनके लेख आदि रचनाएं अक्सर कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। वर्ष 1996 से 1998 तक आकाशवाणी केन्द्र लखनऊ द्वारा युवावाणी कार्यक्रम के तहत इन रचनाओं का प्रसारण भी हो चुका है। ज्ञान आर्य पी. डी. वर्मा “अमन” को अपना आर्दश मानते हैं, जिनके निर्देशन में वर्ष 1999 में आखिर कब तक नामक नाटक से अभिनय की शुरूआत की थी। ज्ञान आर्य बताते हैं कि पिता समान अपने बडे भाई के पास रहते हुए 1996 में लखनऊ के क्रिश्चियन कालेज से स्नातक करने के बाद उनकी लेखन में रूचि पैदा हुई और तब से वे निरन्तर लेखन में जुटे हुए हैं। श्री आर्य को वर्ष 2017 में अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच दिल्ली द्वारा कला रत्न से सम्मानित भी किया जा चुका है।वर्तमान में श्री आर्य द्वारा लखनऊ दूरदर्शन से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम “मिशन हेल्थ ” हेलो डॉक्टर की कड़ियों का स्क्रिप्टिंग कर रहें हैं। जो अबतक 11 एपिसोड का प्रसारण भी हो चुका है।

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