चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से


नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान


प्रपंच की शुरुआत करते हुए ककुवा ने कहा- काल्हि पर्यावरण दिवस पय सगरी धरती हरियर द्यखाय रही रहय। अख़बार अउ टीवी मा खूब बड़ी-बड़ी बातयँ कीन गईं। जगह-जगह पौधरोपण भवा। पर्यावरण क्यार सालाना उर्स मनावा गवा। अब साल भर कंक्रीट केरा जंगल बढ़ावा जाई। हरियाली पय खूब आरा चली। पहाड़ अउ समंदर मा खुदाई होई। नदी मा गन्दे नालन ते पानी भरिहैं। जल, वायु अउ ध्वनि प्रदूषण फैलावा जाई। धरती ते अंतरिक्ष तलक प्रदूषणय कीन जाई। साल मा याक दिन पर्यावरण संरक्षण केरी बेमानी बातें कीन जाती हैं बस।


आज सुबह मौसम बढ़िया था। प्रपंच चबूतरे पर चतुरी चाचा हमेशा की तरह मॉस्क और सेनिटाइजर रखे बैठे थे। कोरोना के घटते संक्रमण से चाचा खुश थे। चबूतरे के तीन तरफ दो गज की दूरी पर कुर्सियां लगी थीं। मुन्शीजी, कासिम चचा, बड़के दद्दा व ककुवा इन कुर्सियों पर विराजमान थे। मेरे पहुँचते ही सब चहक पड़े। प्रपंच शुरू होने के पहले ही प्रधानजी प्रकट गए। वह अपने साथ मिठाई और कुछ पौधे लाए थे। प्रधानजी ने सबको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 50वें जन्मदिन की मिठाई खिलाई। फिर सबके साथ मिलकर चबूतरे के आसपास पौधरोपण किया। प्रधानजी ने चतुरी चाचा को बताया कि आपके आदेशानुसार हमने कल विश्व पर्यावरण दिवस पर गांव की खाली पड़ी जमीन पर 251 फलदार/छायादार पौधे रोपवा दिए थे। जबकि 501 पौधे पब्लिक में वितरित करवा दिए थे। चतुरी चाचा ने प्रधानजी को धन्यवाद देकर विदा कर दिया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर अखिलेश यादव ने बेटी संग किया पौधारोपण


ककुवा की बात को आगे बढ़ाते हुए चतुरी चाचा ने कहा- विश्व बिरादरी को पर्यावरण को लेकर सजग रहना होगा। सभी तरह के प्रदूषण पर सम्पूर्ण नियंत्रण करना होगा। प्रकृति का अंधाधुंध दोहन बन्द करना होगा। जल, जंगल और जमीन को बर्बादी से बचाना होगा। तभी हम भावी पीढ़ी को शुद्ध हवा-पानी दे सकेंगे। उन्हें तमाम दैवीय आपदाओं और महामारियों से सुरक्षित रख सकेंगे। कोरोना महामारी में ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची है। ऑक्सीजन सिलेंडर व कंस्ट्रेटर ब्लैक में बिक रहे हैं। कृतिम ऑक्सीजन के नए प्लांट्स लगाने पड़ रहे हैं। टैंकर, ट्रेन और जहाज से ऑक्सीजन मंगाई जा रही है। यह सब हरियाली पर आरा चलाने का दुष्परिणाम है।


मुन्शी जी बोले- दरअसल, हम सब कंक्रीट के जंगल उगाते ही जा रहे हैं। कंक्रीट के जंगलों से ऑक्सीजन मिलने से रही। हमें ऑक्सीजन के लिए पीपल, बरगद, नीम सहित अन्य तमाम पौधे लगाने होंगे। सरकार हर साल लाखों-लाख पौधे रोपने की रस्म निभाती है। सामाजिक संगठनों द्वारा भी खूब पौधरोपण होता है। परंतु, पौधे रोपने के बाद उनकी देखभाल कोई नहीं करता है। आज सबसे बड़ी जरूरत यह है कि पेड़ों को काटना बन्द किया जाए। साथ ही, पौधरोपण करने के बाद उनकी देखभाल की जाए। हमें भावी पीढ़ी को सुख-साधन, धन-सम्पदा देने से ज्यादा उन्हें शुद्ध पानी और हवा देने के बारे में सोचना चाहिए।


इसी बीच चंदू बिटिया गुड़-सोंठ के लडडू, गुनगुना नींबू पानी व गिलोय का काढ़ा लेकर आ गयी। सभी परपंचियों ने लड्डू ख़ाकर पानी पीया। फिर काढ़े के साथ प्रपंच आगे बढ़ा। कासिम चचा ने कहा- कोरोना ने सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों का किया है। दो साल से बच्चे घरों में कैद हैं। इस साल तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा भी रद हो गई। सबको यूँ ही पास किया जाएगा। कोरोना की दूसरी लहर उत्तर भारत में थमने लगी है। लेकिन, दक्षिण भारत में आज भी कोरोना बेकाबू है। इसी बीच तीसरी लहर आने की भी चर्चा गर्म है। कहा जा रहा है कि तीसरी लहर की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे आएंगे। सरकार को समय रहते बच्चों को कोरोना से बचाने के बारे में ठोस उपाय कर लेना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिये वृक्षारोपण किया जाना नितान्त आवश्यक-केशव प्रसाद मौर्य


बड़के दद्दा ने बताया कि शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण दिवस पर देश के किसानों से संवाद किया था। मोदी जी ने जैविक खेती और जैव ईंधन पर खूब जोर दिया था। पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए। बढ़ते प्रदूषण को लेकर आमजन में जागरूकता लानी होगी। भौतिक सुख-साधन बढ़ाने के चक्कर में प्रकृति का संतुलन बिगड़ता ही जा रहा है। इसका खमियाजा सारी दुनिया भुगत रही है। जलवायु परिवर्तन का बुरा असर खेती पर भी पड़ रहा है।फिर भी हम लोगों की आंखें खुल नहीं रही हैं। हम हर बात में सरकार का ही मुंह देखते हैं। आखिर हमारी भी तो कुछ जिम्मेदारी बनती है।अंत में चतुरी चाचा ने मुझसे कोरोना अपडेट देने की बात कहते हुए बताया कि 10 जून को बरगदाही अमावस्या है। सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की सुरक्षा हेतु अक्षय वट की पूजा-अर्चना करेंगी। इसी दिन साल का पहला सूर्यग्रहण भी पड़ेगा। मेरी शुभकामना है कि सभी सुहागिन महिलाएं अखण्ड सौभाग्यवती रहें।


हमने सबको बताया कि विश्व में अबतक 17 करोड़ 6 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें करीब 36 लाख 74 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अबतक दो करोड़ 87 लाख से अधिक लोग कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं। यहाँ भी साढ़े तीन लाख लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। अब कोरोना की दूसरी लहर थमती नजर आ रही है। रिकवरी रेट 93.38 प्रतिशत हो गया है। नए मरीजों के आने की संख्या कम हो रही है। वहीं, कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान भी तेजी पकड़ रहा है। लेकिन, तीसरी लहर की आशंका से सभी चिंतित है। हम सबको मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन कड़ाई से करना होगा। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही को लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम..!

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