देश में पांच करोड़ मुकदमे लंबित

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सुप्रीम कोर्ट के 15 और हाईकोर्ट के 75 जजों की उपस्थिति में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश के हालात बहुत खराब है आप कुछ कीजिए।जयपुर में विधिक सेवा प्राधिकरण के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकील एक पेशी के 10-15 लाख रुपए की फीस लेते हैं।देश में पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं।

एस0 पी0 मित्तल

राजस्थान के जयपुर में सीतापुरा स्थित जेईसीसी सभागार में विधिक सेवा प्राधिकरण का 18 वां राष्ट्रीय सम्मेलन 16 जुलाई को हुआ। इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना के साथ साथ 15 जजों ने भाग लिया। सम्मेलन में हाईकोर्टों के करीब 75 जज भी उपस्थित रहे। देश में न्यायिक व्यवस्था के विकास और सुधार के लिए इस सम्मेलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सम्मेलन 17 जुलाई तक चलेगा। सम्मेलन में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज देश के हालात बहुत खराब हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना के अमेरिका में दिए गए भाषण को आधार बनाकर सीएम गहलोत ने कहा कि आप लोग देश के हालात सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने से लोग वोट देते हैं। मैं एक बार फिर पीएम मोदी से अपील करना चाहता हूं कि वे देश में प्रेम, भाई चारा वाला वक्तव्य दें। लोग धर्म के नाम पर हिंसा न करें, ऐसी अपील भी पीएम को करनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू यहां बैठे हैं मैं उनसे भी अपील करता हूं कि वे मेरी भावनाओं को पीएम मोदी तक पहुंचाएं।

गहलोत ने कहा कि चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि लोकतंत्र खतरे में हैं। इन चार जजों में से एक गोगोई जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बन गए तो भी हालातों में सुधार नहीं हुआ। रिटायरमेंट के बाद क्या बनना है यह यदि जजों को चिंता रहेगी तो फिर हालात कैसे सुधरेंगे। गहलोत ने कहा कि आज चुनी हुई सरकारों को गिराया जा रहा है। यह तो अच्छा हुआ कि मेरी सरकार नहीं गिरी। यदि उस समय मेरी सरकार गिर जाती तो आज मैं मुख्यमंत्री के तौर पर इस सम्मेलन में उपस्थित नहीं होता। गहलोत ने कहा कि मेरी मोदी या भाजपा से कोई दुश्मनी नहीं है। हमारे बीच विचारधारा की लड़ाई है। हम सब चाहते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहे। जजों को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि वकील का चेहरा देखकर निर्णय क्यों होता है। सीएम गहलोत ने सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री रिजिजू के हिंदी में बोलने पर उनकी प्रशंसा की।

10-15 लाख की फीस:- केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मेलन आजादी के अमृत महोत्सव में हो रहा है। उन्होंने माना कि सरकार और ज्यूडीशियरी के बीच अच्छा तालमेल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी और न्याय के बीच दूरी है जिसे खत्म करने की आवश्यकता है। अमीर लोग तो अच्छा वकील कर न्याय प्राप्त कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कुछ वकील एक पेशी के 10-15 लाख रुपए की फीस लेते हैं। जब इतनी फीस ली जाएगी तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा। रिजिजू ने कहा कि मौजूदा समय में देश भर में पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं। मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए सरकार और अदालतों को मिल कर काम करना चाहिए।

आम आदमी को न्याय मिले:- सम्मेलन में चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि आम आदमी को न्याय मिले। पिछले कुछ वर्षों में प्राधिकरण ने अपने कार्यों का विस्तार किया है। इसके अंतर्गत लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

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