करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव

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करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव
करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव
राजू यादव
राजू यादव

योग आध्यात्मिक अनुशासन एवं अत्यंत सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित ज्ञान है जो मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह स्वस्थ जीवन की कला एवं विज्ञान है। देश में योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयुष मिशन एवं आयुष विभाग उत्तर प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में 195 योग वेलनेस सेंटर संचालित किये जा रहे हैं। 21 जून 2024 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। दुनियाभर में इस दिन योग का प्रचार- प्रसार किया जाता है और योग के महत्व से लोगों को जागरूक करते हैं। योग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। योग मानसिक तौर पर व्यक्ति को शांति प्रदान करता है, अच्छी नींद और तनाव व थकान दूर करता है। वहीं योग आंतरिक और बाहरी शरीर को स्वस्थ बनाता है। मांसपेशियों की मजबूती, बेहतर रक्त प्रवाह, वजन पर नियंत्रण होता है। योग शरीर को स्वस्थ रखने का एक लाभकारी तरीका है। योगासन के नियमित अभ्यास से न केवल शरीर, बल्कि मानसिक सेहत भी दुरुस्त रहती है। यानी योगासन शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है। कई तरह की बीमारियां हमारे शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। जैसे अलग अलग दवाएं अलग अलग बीमारियों से छुटकारा दिलाती हैं, वैसे ही अलग अलग योगासन कई बीमारियों से बचाते हैं। हालांकि अगर किसी एक योग से कई सारे स्वास्थ्य लाभ का अपेक्षा करते हैं, तो प्राणायाम का अभ्यास कर सकते हैं। प्राणायाम शरीर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ही पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। हार्मोन्स को संतुलित रखने, रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने और शारीरिक समन्वय को बेहतर बनाने में कई तरह के प्राणायाम के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा

भारतीय आदर्श योग संस्थान के तत्वाधान में आज जनेश्वर मिश्र पार्क में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के प्रोटोकॉल का अभ्यास किया। अभ्यास के बाद उन्होंने बताया कि निरोग रहने के लिए योग अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि मैं बचपन से ही योग करता रहा हूं।आज विभिन्न योगासनों के माध्यम से बीमारियों से बचा जा सकता है। पूरे देश में योग सप्ताह 15 से 21 जून तक मनाया जाएगा। योग के बल से हमारे ऋषियों मुनियों ने कई सिद्धियां प्राप्त कर जनमानस के कष्ट को दूर किया था। वर्तमान समय में मनुष्य को बीमारियों से बचने एवं जटिल रोगों को ठीक करने में योग बड़ी भूमिका निभा रहा है। इस विधा के जरिए व्यक्ति बिना आर्थिक बोझ के स्वास्थ्य लाभ पा सकता है। भारत का लोहा पूरे विश्व ने माना है। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर हर गांव, पार्क एवं धार्मिक स्थल को योग के लिए चुना गया है। इस वर्ष की थीम योग स्वयं के लिए एवं समाज के लिए भी बहुत ही महत्वपूर्ण है।मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि योग सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। महर्षि पतंजलि ने शास्त्र में इसे सूचीबद्ध कर सभी के लिए उपलब्ध कराया है।उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा मिश्रा का जो आम जन के बीच भारतीय आदर्श योग संस्थान के तत्वाधान में योग करने से समाज के प्रति संदेश जाता है कि हमें अपने एवं अपने परिवार,राज्य,राष्ट्र के लिए स्वस्थ रहना आवश्यक है। भारतीय आदर्श योग संस्थान अपने तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए अब तक 40 योग शिविरों का आयोजन कर चुका है। वह निरंतर आमजन को जागरूक करने के लिए शिविर लगा रहा है। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने भारतीय आदर्श योग संस्थान के मुखिया योगचार्या कृष्ण दत्त मिश्र से कहा कि योग शिविरों का आयोजन बिना थके बिना रुके निरंतर जनमानस के लिए नि:स्वार्थ भाव से आप करते रहिए। उन्होंने भारतीय आदर्श योग संस्थान के सभी सदस्यों का मनोबल भी बढ़ाया है।आज जनेश्वर मिश्रा पार्क में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा एवं योगाचार्य कृष्ण दत्त मिश्रा के साथ राजकुमार,आनंद पांडेय, मधु पांडेय, राधेश्याम चौरसिया, कृष्ण कुमार गुप्ता,अनिल कुमार शर्मा,शेखर जी,शर्मा जी,एवं समस्त भारतीय आदर्श योग संस्थान के सदस्यों ने योगाभ्यास किया। करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव

वृक्षासन

विशेषज्ञ वृक्षासन के नियमित अभ्यास की सलाह देते हैं। इस आसन को काफी आसानी से किया जा सकता है। सभी आयु वर्ग के लोग इस अभ्यास को कर सकते हैं। वृक्षासन योग या ट्री पोज़ आपके पैरों और जोड़ों को मजबूत करने में मदद करता है। इसके अलावा शारीरिक संतुलन में सुधार करने और वजन को नियंत्रित बनाए रखने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है।वृक्षासन मुद्रा के लिए शरीर को एक पैर पर संतुलित रखने की आवश्यकता होती है। यह आसन शरीर की स्थिरता और संतुलन की भावना में सुधार करता है। इसके अलावा, वृक्षासन के माध्यम से प्राप्त संतुलन और स्थिरता की शक्ति केवल शारीरिक नहीं है।

पद्माहस्तासन

पद्मासन योग को शरीर और मन दोनों की बेहतर सेहत के लिए सबसे कारगर योगाभ्यास के तौर पर जाना जाता है। आराम की मुद्रा में बैठकर किया जाने वाला यह योगासन कूल्हों, टखनों और घुटनों के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है। इस योग का अभ्यास मस्तिष्क को शांत करने से लेकर जागरूकता और ध्यान बढ़ाने में भी फायदेमंद पाया गया है। मासिक धर्म की परेशानियों और जोड़ों को समस्याओं को दूर करने में भी इस योग के अभ्यास से लाभ मिल सकता है।

मार्जरी आसान

मार्जरी आसन को कैट-काऊ पोज कहा जाता है। यह एक आसान लेकिन अति प्रभावी योग मुद्रा है। इस योग से संतुलन में सुधार और पीठ दर्द से राहत मिलती है। तनाव को कम करने और पेट के अंगों को स्वस्थ रखने के लिए इस योग का नियमित अभ्यास लाभकारी होता है। मार्जरी आसन का अभ्यास करके सभी आयु वर्ग के लोग लाभ पा सकते हैं। योगाचार्य के.डी.मिश्रा के अनुसार यह योग मुद्रा आपके मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती है। इसके अलावा फोकस, शारीरिक समन्वय और मानसिक स्थिरता में सुधार करने में इस योग के अभ्यास को विशेष लाभकारी माना जाता है। रीढ़ की हड्डी के बीच रक्त परिसंचरण में सुधार करने से यह पीठ दर्द और अतिरिक्त तनाव से राहत दिलाने में मदद करती है। रोजाना 5-10 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है।

त्रिकोणासन

त्रिकोणासन या त्रिकोण मुद्रा, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर महिलाओं में तनाव को कम करने में मदद करता है। आसन में गहरा खिंचाव शामिल होता है, जिससे कंधों, पीठ और कूल्हों में तनाव दूर होता है। यह खिंचाव रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है, थकान को कम करता है और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है।एसिडिटी से छुटकारा मिलता हैं। चिंता, तनाव, कमर और पीठ का दर्द गायब हो जाता हैं। पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी और मोटापा दूर करने में सहायक आसन माना जाता हैं। शरीर को सुडौल, मजबूर और लचीला बनाता हैं।

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दण्डासन

दंडासन एक ऐसा आसन है जिसके शरीर के लिए कई लाभ हो सकते हैं। ‘दंड’ का अर्थ है डंडा या छड़ी, और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा। इसलिए, दंडासन को छड़ी मुद्रा या कर्मचारी मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है। यह एक बैठी हुई मुद्रा है, जहाँ डंडा सीधी और मजबूत रीढ़ की हड्डी का प्रतिनिधित्व करता है। दण्डासन को सभी आसनों की जननी के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह एक आधारभूत आसन है जो अन्य आसनों का आधार हो सकता है। दण्डासन को डण्डासन या छड़ी आसन कहा जाता है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी स्वामी दण्ड द्वारा धारण किये गये डण्डे का प्रतिनिधित्व करती है, जो भारतीय संन्यासी हैं।

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शलभ आसान

योग मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की समस्याओं को ठीक रखने के साथ मांसपेशियों पर होने वाले तनाव को कम करते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों में होने वाली दर्द की समस्या से आसानी से राहत पाया जा सकता है। शलभासन का अभ्यास थोड़ा कठिन होता है जिसके लिए आपको एकाग्रता और निरंतर अभ्यास करते रहने की आवश्यकता होती है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब सांस लेते हुए अपने पैरों और धड़ को ऊपर उठाएं। अपने घुटनों को सीधा रखते हुए पैर को ऊपर की ओर उठाएं। हथेलियों को नीचे की ओर रखें। आपका वजन आपके पेल्विक हिस्स, पेट और निचली पसलियों पर होना चाहिए। कुछ देर तक इसी मुद्रा में बने रहें, फिर सांस छोड़ते हुए अपने पैरों और सिर को धीरे-धीरे नीचे फर्श पर ले आएं।

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कपालभाति

कपालभाति करने के लिए पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों से चित्त मुद्रा बना लें। गहरी सांस अंदर की ओर लेते हुए झटके से सांस छोड़ें। इस दौरान पेट को अंदर की ओर खींचें। अगर आप कपालभाति करने की शुरुआत कर रहे हैं तो 5-10 मिनट ही अभ्यास करें और समय के साथ अभ्यास को बढ़ाएं। कपालभाति प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करने से किडनी-लिवर की सेहत पर भी अच्छा असर पड़ता है। अगली स्लाइड्स में जानें कपालभाति प्राणायाम के अभ्यास का स्वास्थ्य लाभ और कपालभाति करने की पूरी प्रक्रिया।

योगाचार्य के.डी.मिश्रा ने बताया कि कपालभाति का नियमित अभ्यास पित्त के स्तर को नियंत्रित रखने और मेटाबाॅलिज्म दर को बढ़ाने में सहायक है। मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करने और स्मृति व एकाग्रता शक्ति में सुधार के लिए ये योगासन लाभकारी है। कपालभाति के अभ्यास से चिंता और तनाव दूर होता है।इस योग के अभ्यास से रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है। सांस के इस योग से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और फेफड़े मजबूत होते हैं। शरीर में विषाक्त और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को निकालने में कपालभाति मदद करता है। कपालभाति का शरीर पर उत्तेजक, सफाई करने वाला और गर्म करने वाला प्रभाव होता है। यह हृदय की धड़कनों को बढ़ाता है, और रक्त परिसंचरण और ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करता है।  कपालभाति डाइजेस्टिव सिस्‍टम को मजबूत बनाकर गैस, एसिडिटी, कब्‍ज जैसी समस्याओं में भी राहत देता है। कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों, स्प्लीन, लीवर, पैनक्रियाज के साथ-साथ दिल के कार्य में सुधार करता है। करें योग रहें निरोग-मुख्य सचिव

नोट:-निष्पक्ष दस्तक लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।