Monday, June 1, 2026
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झालमुरी-मेलोडी टॉफी का गुणगान,पेपर लीक पर कहां गया चित्रा का ज्ञान

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झालमुरी-मेलोडी टॉफी का गुणगान,पेपर लीक पर कहां गया चित्रा का ज्ञान
झालमुरी-मेलोडी टॉफी का गुणगान,पेपर लीक पर कहां गया चित्रा का ज्ञान
विनोद यादव
विनोद यादव

शिक्षा, चिकित्सा,रोजगार,बेरोजगारी का नहीं हैं ध्यान मेलोडी टॉफी का इतना गुणगान। झालमुरी के स्वाद का हो रहा बखान पेपर लीक होने पर कहां गया था चित्रा का ज्ञान।जब शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दे जवाब मांग रहे हों, तब स्वाद, टॉफी और झालमुरी की चर्चाएं सुर्खियां बटोर रही हैं। सवाल यह है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जो मुखरता दिखनी चाहिए, वह आखिर कहां खो जाती है?


लखनऊ। वर्तमान दौर की पत्रकारिता का आखिर इतना स्तर गिर जाएगा कि उसे व्यक्तिगत होना पड़ेगा , आज के दौर के गोदी पत्रकार क्या आलोचकों की आलोचनाओं से खिन्न हो जा रहें हैं। आखिर उनके मन का सवाल नहीं तो जवाब देही भी उनकी नहीं…चिंता तौ हरि नांव की और न चितवै दास… वाली बात हैं। आज तक’ की एंकर अंजना ओम कश्यप का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों पर तंज कसा है।उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षक सिर्फ ‘व्यूज’ और ‘ड्रामा’ के चक्कर में रहते हैं और छात्रों से पैसे वसूलते हैं उन्हें भड़काते हैं। खैर कहें क्यूँ न जब मेलोडी टॉफी के जब गुणवत्ता का जब बखान बताया जाए और झालमुरी की चर्चा पर ज्ञान परोसा जाए तो ऐसे सवाल जो शिक्षा ,चिकित्सा रोजगार से जुड़े होते हैं बस बेकार और बेफिजूल ही लगते हैं। मगर आज के दौर में बेरोजगार युवाओं के भावनाओं को कमतर महसूस करना और उनका माखौल उड़ाना कारपोरेट घरानों की मीडिया का प्रमुख धंधा बन चुका हैं। शायद चित्रा त्रिपाठी का यह बयान अब पत्रकारिता के नाम पर उलजलूल बयानबाजी का नहीं, बल्कि “मुख्यधारा की पत्रकारिता बनाम डिजिटल शिक्षा जगत” के बीच एक बड़े वैचारिक बहस का रूप ले चुकी है। इस सोशल मीडिया वार का मुख्य कारण बिहार के मशहूर शिक्षक खान सर के एक वीडियो से जोड़ा जा रहा हैं। पुतिन के इंटरव्यू पर खान सर का तंज हैं।खान सर ने वीडियो में अंजना ओम कश्यप द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का इंटरव्यू लिए जाने के फैसले पर तीखा तंज कसा।


इंटरव्यू के स्तर पर सवाल पर उन्होंने कहा कि जो पत्रकार यूपीएससी (UPSC) या बीपीएससी (BPSC) की तैयारी करने वाले छात्रों का इंटरव्यू लेने के स्तर की भी नहीं हैं, वह भला दुनिया के इतने बड़े नेता (पुतिन) का इंटरव्यू कैसे ले सकती हैं? वहीं अंजना ओम कश्यप का यूट्यूबर्स पर निशाना साधा, खान सर की इस टिप्पणी के बाद, अंजना ओम कश्यप ने भी एक शो/इंटरव्यू के दौरान कथित तौर पर यूट्यूब शिक्षकों और यूट्यूबर्स को आड़े हाथों लिया और कहां व्यूज और पैसे का खेल खेलते हैं शिक्षक। उन्होंने आरोप लगाया कि यूट्यूब पर पढ़ाने वाले ये लोग सिर्फ व्यूज बटोरने और मोटी कमाई (पैसे कमाने) के चक्कर में रहते हैं। छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया , उन्होंने कहा कि इनके पास कोई जमीनी ज्ञान नहीं होता और ये केवल छात्रों को गुमराह करने का काम करते हैं। वहीं डिजिटल गुरुओं का महा-पलटवार भी जरी हो रहा हैं और पत्रकारिता के रैंकिंग 157 पर कैसे पहुची उसके प्रमुख कारणों पर शिक्षक सवाल खड़ा कर रहें हैं। प्रसिद्ध गणित शिक्षक अभिनय सर ने लाइव आकर अंजना ओम कश्यप को बेहद कड़ा और सीधा जवाब दिया। उन्होंने मीडिया की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि “परीक्षाओं के पेपर लीक और युवाओं की बेरोजगारी जैसे देश के असली व गंभीर मुद्दों पर सरकार से तीखे सवाल पूछने के बजाय, टीवी मीडिया केवल सरकार का बचाव करने में क्यों जुटा रहता है?”

झालमुरी-मेलोडी टॉफी का गुणगान,पेपर लीक पर कहां गया चित्रा का ज्ञान

सोशल मीडिया यूजर्स ने गोदी मीडिया के पत्रकारों को जहां घेरा वहीं खान सर और अभिनय सर के अलावा कई अन्य शिक्षकों ने भी लाइव आकर मुख्यधारा के टीवी मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ की संज्ञा देते हुए उनके पत्रकारिता के स्तर पर गंभीर सवाल खड़े किए। छात्रों और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया।”शिक्षक समुदाय का अपमान” इस विवाद के सामने आने के बाद इंटरनेट मीडिया पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। शिक्षकों के समर्थन में उतरे छात्र: लाखों छात्रों और ऑनलाइन कम्युनिटी ने तर्क दिया कि इन ‘स्टार टीचर्स’ ने देश के सुदूर गांवों और गरीब परिवारों के लाखों युवाओं को बेहद कम फीस में पढ़ाकर सरकारी नौकरी पाने के काबिल बनाया है। अधिकारों की लड़ाई छात्रों का कहना है कि डिजिटल शिक्षकों को इस तरह ‘कम आंकना’ या उनके ज्ञान पर सवाल उठाना पूरे शिक्षक समुदाय और छात्रों का अपमान है। खैर सत्ता की चापलूसी और वाहवाही ही आजतक चलती आ रहीं हैं इसी एक माह में चार परीक्षाओं के पेपर लीक हुए मगर चिंता झालमुरी की हो रही हैं। जो शिक्षक सरकार से सत्ता व्यवस्था से सवाल करता हैं या तो मीडिया उसका ट्रायल करती हैं या उसे देशद्रोही सावित करने में जुट जाती हैं। नीट का पेपर बनाने वाली एजेंसी पर सवाल नहीं उठ रहा आखिर जिस एजेंसी ने पेपर बनाया आखिर उसकी जिम्मेदारी थीं या नहीं या कौन से ऐसे लोग सामिल थें।

जो अपने बच्चों के लिए पेपर की खरीद परोखत किए उनके नाम आखिर गोदी मीडिया क्यूं उजागर नहीं करना चाहती। कारण साफ हैं इनमें से कई शिक्षक सरकार का समर्थन करने के बजाय छात्रों के साथ खड़े हैं और NEET परीक्षा के पेपर लीक और CBSE की दोषपूर्ण OSM मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।जहां छात्र परीक्षा लीक और मूल्यांकन संबंधी मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं,वहीं आक्रोश उन शिक्षकों पर निर्देशित होता दिख रहा है जो इन चिंताओं को उठा रहे हैं, न कि उस प्रणाली पर जिस पर सवाल उठाए जा रहें। चित्रा त्रिपाठी जैसे तमाम गोदी मीडिया के पत्रकारिता हैं जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मर्यादा को ताख पर रख कर काम कर रहें हैं। जब सवाल इन्हें सत्ता से करना होता हैं तब विपक्ष से और युवाओं से करते हैं। नोटवंदी के दौरान जब सरकार पुराने नोटों का जमा कर रहीं थी और दो हजार के नयें नोट मार्केट में चालूं कर यही थी तब अपने न्यूज रुम में बैठकर चित्रा त्रिपाठी ने दो हजार की नोटों में नैनों जीपीएस चिप लगे होने की बात बता रही थीं। आखिर क्या तब इन्होंने झूठा प्रोपेगैंडा नहीं फैलाया। युवाओं में मुद्दों पर सवाल नहीं करना ,बेरोजगारी पर सवाल नहीं ,मंहगाई पर सवाल नहीं ,डीजल ,गैंस ,पेट्रोल के बढ़ते दामों पर सवाल नहीं सवाल सिर्फ हिंदू मुसलमान पर होगा सवाल सत्ता की चापलूसी का होगा..ताकि सत्ता की तरफ से मिलने वाले मोटे विज्ञापन और सरकारी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। शिक्षक सुमन मैंम ने कहाँ तुम टीचर को दो कौडी का बोल रही हो जो रात-दिन खुद फर्जी खबरें फैला ती हो ओ क्या हैं, जिसने वर्षो तक पत्रकारिता सिर्फ़ टीआरपी के लिए की हो और खबरों में सिर्फ प्रोपेगैंडा फैलाया हो और सत्ता की चापलूसी की हो विपक्ष की खबरों को और उनकी आवाज को कुचलने का काम किया हो ओ शिक्षको को ज्ञान ना बांटे खुद आत्ममंथन करें।