मौत की सुरंग बने कोचिंग सेंटर! न फायर एनओसी, न निकलने का रास्ता। कोचिंग सेंटर या मौत का जाल? सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां। फायर एनओसी के बिना कैसे मिल रही संचालन की अनुमति?हर हादसे के बाद जागता सिस्टम, फिर क्यों भूल जाते हैं सबक?
लखनऊ। लखनऊ अग्निकांड के बाद कोचिंग सेंटरों की पड़ताल में सुरक्षा खामियां सामने आईं। अग्निशमन यंत्रों की कमी, तारों का जाल और संकरे रास्ते छात्रों के लिए खतरा हैं। लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का दावा करने वाले कई संस्थानों में आग से बचाव की मूलभूत व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। कहीं अग्निशमन यंत्र नदारद मिले तो कहीं बिजली के तारों का खतरनाक जाल लटका मिला। कई संस्थानों में छात्रों के आने-जाने के लिए सिर्फ एक संकरा रास्ता है, जो किसी भी आपात स्थिति में मौत की सुरंग साबित हो सकता है।मौत की सुरंग बने कोचिंग सेंटर! न फायर NOC,न निकलने का रास्ता।
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने की घटना ने दिल्ली के मुखर्जी नगर हादसे की याद ताजा कर दी। फायर एनओसी और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। सरकार नए नियम लाने की तैयारी में है ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुआ भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने 15 मासूम बच्चों की जान ले ली, जबकि कई अन्य छात्र गंभीर रूप से झुलस गए और उनका इलाज जारी है। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इमारत के भीतर कोचिंग, लाइब्रेरी और अन्य गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही थीं।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के अनुसार, बड़ी संख्या में बच्चों को अस्पताल लाया गया, जिनमें कई को मृत अवस्था में पहुंचाया गया। कुछ बच्चों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग भी लगाई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
जहरीला धुआं बना सबसे बड़ा खतरा—घटना की सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि बच्चों की मौत केवल लपटों से नहीं, बल्कि धुएं और ऑक्सीजन की कमी से भी हुई। क्लासरूम और लाइब्रेरी में रखे फर्नीचर, प्लाईवुड, सनमाइका, प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम सामग्री के जलने से अत्यधिक घना और विषैला धुआं पैदा हुआ। वेंटिलेशन और पर्याप्त निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण धुआं पूरे फ्लोर और सीढ़ियों में भर गया। इससे बच्चों को बाहर निकलने का समय नहीं मिला और कई छात्र अंदर ही फंस गए।किताबें और बंद ढांचा बने आग के प्रसार का माध्यम- इमारत में बड़ी मात्रा में किताबें, कॉपियां और अन्य कागजी सामग्री मौजूद थी। आग लगने के बाद यही सामग्री तेजी से ईंधन में बदल गई। आग की तीव्रता बढ़ने के साथ धुएं का दबाव भी बढ़ता गया, जिससे बचाव कार्य और कठिन हो गया। बताया जा रहा है कि इमारत के ऊपरी हिस्से में इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों और अतिरिक्त उपकरणों का संचालन भी किया जा रहा था, जिसने आग के फैलाव को और तेज कर दिया।.

फायर सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल—- हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौजूदगी वाली इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था थी। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि भवन में अग्निशमन मानकों और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को लेकर गंभीर खामियां थीं। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि स्कूल, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फायर ऑडिट, सुरक्षित वायरिंग, आपातकालीन निकास और कर्मचारियों का प्रशिक्षण ऐसी त्रासदियों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। लखनऊ का यह हादसा केवल एक शहर की त्रासदी नहीं, बल्कि देशभर में संचालित शैक्षणिक और व्यावसायिक परिसरों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
अलीगंज इलाके अग्निकांड में अभी तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं इस हादसे के बाद योगी सरकार ने एक्शन लेते हुए तत्काल एसआईटी का गठन किया। साथ ही चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा इस हादसे को लेकर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया है। इस हादसे के बाद कई विभागों पर कार्रवाई हो सकती है।
एसआईटी की टीम ने तलब किए बिल्डिंग से संबंधित दस्तावेज। एसआईटी की टीम दस्तावेजों को लेकर कर रही जांच। कुछ देर में एसआईटी की टीम पहुंचेगी घटनास्थल पर। घटनास्थल पर पड़ताल करेगी एसआईटी की टीम।
लखनऊ अग्निकांड की FIR में खुलासा
लखनऊ अग्निकांड को लेकर दर्ज की गई एफआईआर में लिखा है कि घटना 22 जून 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे लखनऊ के सेक्टर D कॉलोनी में स्थित मकान नंबर 2813 (लालबत्ती पुरनिया चौराहा के पास, यूपीएससी भवन के पीछे) में घटित हुई। यह एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत है, जिसके भूतल और प्रथम तल पर ‘पेट शॉप एण्ड क्लीनिक’ संचालित थी। द्वितीय तल पर वीडियो गेमिंग जोन व 3डी एमिशन था, और तृतीय तल पर आईटी नेटवर्किंग का ऑफिस चल रहा था। घटना के समय इसी पेट शॉप और क्लीनिक से अचानक आग की शुरुआत हुई, जो देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग में फैल गई।
आग लगने की वजह से पूरी इमारत के अंदर और सभी कमरों में अत्यधिक मात्रा में जहरीला धुआं भर गया, जिससे वहां मौजूद लोगों का दम घुटने लगा। धुएं और आग की लपटों से घिरने के कारण लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर बिल्डिंग से नीचे कूदने लगे, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और कई लोग दम घुटने व झुलसने के कारण बेहोश हो गए। स्थानीय पुलिस, फायर फाइटर्स, एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद दीवार काटकर अंदर प्रवेश किया और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। इस हादसे में कुल 15 लोगों की दर्दनाक मृत्यु हो गई।
लखनऊ में बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की मौत। मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी हाउस लाया गया। मोर्चरी हाउस से पोस्टमार्टम के बाद लगभग 13 डेड बॉडी को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल तीन डेड बॉडी ऐसी हैं, जो अन्य प्रदेश की है, जिसमें एक डेड बॉडी मध्य प्रदेश की है। दूसरी डेड बॉडी उत्तराखंड की है। तीसरी डेड बॉडी को वेस्ट बंगाल की है। प्रशासन का कहना है कि अभी इन 3 डेड बॉडी के परिजन रास्ते में हैं। परिजनों के पहुंचते ही डेड बॉडी उनको दे दी जाएगी।



