स्वास्थ्य

दैहिक,मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना ही स्वास्थ्य है। किसी व्यक्ति की शारीरिक,मानसिक,आध्यात्मिक और सामाजिक रुप से अच्छे होने की स्थिति को ही स्वास्थ्य कहते हैं। स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है। अपितु जीवन है। हमें सर्वांगीण स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होना बहुत आवश्यक है। इसका का अर्थ विभिन्न लोगों के लिए अलग-अलग होता है। लेकिन अगर हम एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण की बात करें तो अपने आपको स्वस्थ कहने का यह अर्थ होता है कि हम अपने जीवन में आने वाली सभी सामाजिक,शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का प्रबन्धन करने में सफलता पूर्वक सक्षम हों।

आमतौर पर स्वास्थ्य का मतलब रोग-रहित जीवन समझा जाता है। लेकिन क्या सचमुच यही है…? तो फिर स्वस्थ रहने का मतलब क्या है…? चिकित्सकीय दृष्टि से यदि हम बीमारियों से मुक्त हैं तो हमें स्वस्थ माना जाता है। लेकिन स्वास्थ्य नहीं है। अगर हम देह,मन और आत्मा से एक पूर्ण मनुष्य जैसा महसूस करते हैं, तभी हम वास्तव में स्वस्थ हैं। ऐसे अनेक लोग हैं जो चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ हैं। पर वे सच्चे अर्थ में स्वस्थ नहीं हैं, क्योंकि वे अपने भीतर तंदुरुस्ती का एहसास नहीं कर रहे होते। जब स्वास्थ्य की बात आती है, तो कोई भी इंसान पूर्णतः बेदाग स्थितियों में नहीं पलता। हम जो भोजन करते हैं। हम जिस हवा में सांस लेते हैं। हम जो पानी पीते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी के तनाव, ये सब हमें कई प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं।

संसार में हम जितने अधिक सक्रिय रहते हैं। हम अपनी सक्रियता से ही नकारात्मक चीजों के संपर्क में आते हैं। हमारी सक्रियता रसायनिक संतुलन को बिगाड़ देते हैं। हमारे लिए स्वास्थ्य-समस्याएं खड़ी कर देती हैं। स्वास्थ्य मनुष्य का सबसे बड़ा धन होता है। स्वास्थ्य के बिना मनुष्य की हर ख़ुशी अधूरी होती है। स्वस्थ व्यक्ति वह होता है, जो शारीरिक,मानसिक,आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से तंदरुस्त हो। स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। इससे ही मनुष्य अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। यदि हम स्वस्थ नहीं है,तो हमारे पास कितनी भी सम्पत्ति क्यों न हो। हम उसका सुख नहीं ले सकते है।

  • Photo of अगली पीढ़ी को बचाना है तो फाइलेरिया की दवा खाना है-डीजी

    अगली पीढ़ी को बचाना है तो फाइलेरिया की दवा खाना है-डीजी

    अगली पीढ़ी को बचाना है तो फाइलेरिया की दवा खाना है। रिफ्युजल कन्वर्जन पर राज्यस्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला में बोले स्वास्थ्य…

    Read More »
  • Photo of योगी सरकार सहजन के उपयोग से एनीमिया पर करेगी वार

    योगी सरकार सहजन के उपयोग से एनीमिया पर करेगी वार

    योगी सरकार सहजन के उपयोग से एनीमिया पर करेगी वार। सहजन के वृक्षारोपण और उपयोग के नवाचार को बढ़ावा देने…

    Read More »
  • Photo of प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों का होग स्टिंगऑपरशन-DCM

    प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों का होग स्टिंगऑपरशन-DCM

    अनुशासनहीनता के आरोप में भदोही के एसीएमओ होंगे निलंबित।उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दिए निर्देश।स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने शुरू…

    Read More »
  • Photo of ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत..?

    ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस को मात दे पायेगा भारत..?

    डॉ.सत्यवान सौरभ भारत को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पहलों के माध्यम से निगरानी, निदान और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करके…

    Read More »
  • Photo of HMPV फिर से चिंता में डूबी दुनिया

    HMPV फिर से चिंता में डूबी दुनिया

    प्रियंका सौरभ ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस, न्यूमोविरिडे परिवार का हिस्सा है, यह एक श्वसन वायरस है जो हल्की सर्दी से लेकर निमोनिया…

    Read More »
  • Photo of हीटिंग उपकरणों का स्वास्थ्य पर कितना असर 

    हीटिंग उपकरणों का स्वास्थ्य पर कितना असर 

    विजय गर्ग  सर्दी का मौसम  आते ही खांसी, जुकाम और गले में खराश, कफ, सीने में दर्द, निमोनिया जैसी बीमारियां…

    Read More »
  • Photo of टीबी नोटिफिकेशन में UP अव्वल

    टीबी नोटिफिकेशन में UP अव्वल

    यूपी ने बाजी मारी, टीबी नोटिफिकेशन में देश में अव्वल। 6.5 लाख मरीजों को पंजीकृत करने के लक्ष्य के सापेक्ष…

    Read More »
  • Photo of गोल्ड रूल अपनाएं,कोल्ड भगाएं..!

    गोल्ड रूल अपनाएं,कोल्ड भगाएं..!

    —– सर्दियों में खानपान एवं सावधानी —– घनश्याम बादल दिसंबर चला गया है और जनवरी के साथ ही नया साल…

    Read More »
  • Photo of कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय

    कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय

    डॉ. रोहित गुप्ता कोलेस्ट्रॉल रक्त में पाया जानेवाला एक wax जैसा पदार्थ है। शरीर को स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के…

    Read More »
  • Photo of स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा देते पैकेज्ड खाद्य पदार्थ

    स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा देते पैकेज्ड खाद्य पदार्थ

    डॉ.सत्यवान सौरभ बहुराष्ट्रीय निगम अक्सर अमीर देशों की तुलना में कम आय वाले देशों में कम स्वस्थ भोजन बेचते हैं।…

    Read More »
  • Photo of योगी सरकार ने टीबी के खात्मे के लिए चलाया अभियान

    योगी सरकार ने टीबी के खात्मे के लिए चलाया अभियान

    मधु पांडेय योगी सरकार ने टीबी के खात्मे को चलाया अभियान, 27 लाख से अधिक की हुई स्क्रीनिंग। मुख्यमंत्री योगी…

    Read More »
  • Photo of विश्व ध्यान दिवस के पीछे भारतीय पहल

    विश्व ध्यान दिवस के पीछे भारतीय पहल

    कृष्ण दत्त मिश्रा योगाचार्य विश्व 21 दिसंबर 2024 को पहला विश्व ध्यान दिवस के रूप में मना रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने…

    Read More »
  • Photo of रिश्तों के सच

    रिश्तों के सच

    आखिर सच ही गूँजता, खोले सबकी पोल।झूठे मुँह से पीट ले, कोई कितने ढोल॥ रिश्तों के सचजिसने सच को त्यागकर,…

    Read More »
  • Photo of अत्यंत दर्दनाक है रक्त में यूरिक एसिड का बढ़ा स्तर

    अत्यंत दर्दनाक है रक्त में यूरिक एसिड का बढ़ा स्तर

    डॉ.रुप कुमार बनर्जीहोमियोपैथिक डॉक्टर व सामाजिक कार्यकर्ता     आजकल आए दिन सुनने एवं होने वाली तमाम बीमारियों में से एक बहुत ही आम बीमारी जो करीब करीब सभी घरों में पाए जाने लगी है,वह है यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर प्रायः सभी घरों में यह बीमारी पाई जाती है हाइपरयुरिसीमिया (उच्च यूरिक एसिड स्तर) हाइपरयुरिसीमिया एक बहुत आम बीमारी है,अत्यंत दर्दनाक है रक्त में यूरिक एसिड का बड़ा हुआ स्तर। इसका निदान आमतौर पर गठिया या गुर्दे की पथरी के लक्षणों के बाद किया जाता है।  हाइपरयुरिसीमिया यानि यूरिक एसिड के स्तर को कम करने या इसको रोकने के लिए कम प्यूरीन युक्त आहार का पालन करना सबसे अच्छा तरीका है। यूरिक एसिड एक अपशिष्ट उत्पाद है जो तब बनता है जब शरीर भोजन और पेय में प्यूरीन नामक रसायनों को तोड़ता है। अधिकांश यूरिक एसिड हमारे रक्त में घुलकर किडनी से होकर गुजरता है और पेशाब (मूत्र) के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। यदि शरीर में बहुत अधिक यूरिक एसिड रहता है तो हाइपरयुरिसीमिया होता है। हाइपरयुरिसीमिया के कारण यूरिक एसिड तेज क्रिस्टल में एक साथ चिपक जाता है। ये क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो सकते हैं और गठिया का एक दर्दनाक रूप, गाउट का कारण बन सकते हैं । वे  गुर्दे में भी जमा हो सकते हैं और गुर्दे की पथरी का निर्माण कर सकते हैं । हाइपरयुरिसीमिया को उपचार के द्वारा ठीक किया जा सकता है बस अपनी दैनिक दिनचर्या के कुछ पहलुओं को बदलने की आवश्यकता हो सकती है ,जैसे कि अपने आहार में बदलाव करना और अधिक पानी पीना। हाइपरयुरिसीमिया शरीर को कैसे प्रभावित करता है :-  हो सकता है कि शुरू शुरू में हमको पता ही न चले कि हाइपरयुरिसीमिया है, खासकर यदि  स्तर केवल थोड़ा बढ़ा हुआ ही है। लेकिन समय के साथ, रक्त में यूरिक एसिड का निर्माण दर्द और अन्य लक्षण पैदा कर सकता है। यह पूरे शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है। यदि इसका उपचार ठीक तरीके से नहीं किया गया तो उच्च यूरिक एसिड स्तर अंततः हमारे शरीर के लिए स्थायी क्षति का कारण बन सकता है। उच्च यूरिक एसिड स्तर और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के बीच एक संबंध भी दिखाया है, जिनमें शामिल हैं -गुर्दा रोग,दिल की बीमारी ,उच्च रक्तचाप,मधुमेह, वसायुक्त यकृत रोग .चयापचयी लक्षण इत्यादि इत्यादि । लक्षण और कारण :-  हाइपरयुरिसीमिया स्वयं आमतौर पर लक्षण पैदा नहीं करता है,अधिकांश लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें यह है, जब तक कि उनके यूरिक एसिड का स्तर गाउट या गुर्दे की पथरी का कारण बनने के लिए पर्याप्त नहीं हो जाता।इसके साथ ही साथ किसी भी जोड़ में गाउट के हमले के लक्षणों में शामिल हैं :- तेज़ दर्द, लाली , कठोरता,सूजन,कोमलता, हल्के स्पर्श से भी भयानक दर्द ,गर्मी, या जोड़ में “आग लगी” जैसी अनुभूति आदि। गुर्दे की पथरी के लक्षणों में शामिल हैं :- पीठ के निचले हिस्से या बाजू में दर्द, दर्द के कारण मतली या उल्टी होना,बुखार या ठंड लगना , पेशाब में खून आना , पेशाब करते समय दर्द होना,पेशाब करने में असमर्थ होना,अधिक बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होना, पेशाब जिसमें दुर्गंध आती हो या बादल जैसा दिखता हो इत्यादि इत्यादि इत्यादि ।हाइपरयुरिसीमिया का क्या कारण है? :- रक्त में अतिरिक्त यूरिक एसिड हाइपरयुरिसीमिया का कारण बनता है।हमारा शरीर प्यूरीन को तोड़ने के बाद यूरिक एसिड बनाता है। प्यूरिन प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं और कम मात्रा में हानिकारक नहीं होते हैं। लेकिन नियमित रूप से उच्च-प्यूरीन खाद्य पदार्थ खाने से  यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता हैं। उच्च प्यूरीन वाले खाद्य और पेय पदार्थों में शामिल हैं : लाल मांस , जिगर, कलेजी जैसे अंग के मांस , समुद्री भोजन (विशेषकर सैल्मन, झींगा, झींगा मछली और सार्डिन) उच्च फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप वाला भोजन और पेय , शराब (विशेषकर बीयर, जिसमें गैरअल्कोहल बीयर भी शामिल है) कुछ दवाएँ दुष्प्रभाव के रूप में  यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं: मूत्रवर्धक (कभी-कभी पानी की गोलियाँ भी कहा जाता है) हाइपरयुरिसीमिया होने का ये मतलब नहीं है कि  गठिया हो ही जाएगा। परंतु यह बहुत दर्दनाक होता है और गुर्दे पर भी इसका असर पड़ता है। हाइपरयुरिसीमिया में क्या खाना या पीना चाहिए..? :- अपने यूरिक एसिड को कम करने में मदद करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि जितना हो सके उच्च प्यूरीन वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचे। जैसे लाल मांस और अंग मांस.शराब, उच्च फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप (जैसे सोडा) से मीठा किया गया पेय,मछली (विशेषकर शंख जैसे झींगा मछली और झींगा), बहुत ज्यादा वसायुक्त भोजन,दाल, राजमा, पनीर, सोयाबीन,  जंक फूड,पैक्ड फूड इत्यादि।कम प्यूरीन वाले आहार का पालन करने से यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। एक स्वस्थ आहार और नियमित रूप से व्यायाम हाइपरयूरीसीमिया को कम करने में काफी सहायक सिद्ध हो सकती हैं। रोकथाम :- हाइपरयुरिसीमिया को रोकने का सबसे अच्छा तरीका एक आहार और व्यायाम योजना का पालन करना है जो हमारे लिए स्वस्थ और उपयुक्त हो।इसके लिए अपने चिकित्सक से राय लेनी चाहिए कि क्या खाना पीना चाहिए जिससे बढ़े हुए यूरिक एसिड की समस्या से छुटकारा पाया जा सके।स्वस्थ आहार और व्यायाम योजना का पालन करने से स्वस्थ वजन बनाए रखने और यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।होम्योपैथी :- होम्योपैथी एक ऐसी विधा है जिसमें बड़े हुए यूरिक एसिड के स्तर को कम करके मरीज को पूरी तरीके से आराम देने की क्षमता है। चिकित्सा  के साथ ही साथ नियमित रूप से योग व्यायाम कसरत, दिन भर में कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पीना, सुबह और रात को हल्का गुनगुना गर्म पानी पीना, नियमित रूप से किया जाने वाला मांसाहारी भोजन को कम करके कभी कभार ही लेना, शाकाहारी भोजन पर ज्यादा ध्यान देना,बहुत ज्यादा राजमा पनीर इत्यादि से भी परहेज करना, कटोरी भर भर के दाल पीने से भी परहेज करना तथा जंक फूड एवं फास्ट फूड से बचना भी अति आवश्यक बिंदु है।  अत्यंत दर्दनाक है रक्त में यूरिक एसिड का बढ़ा स्तर

    Read More »
  • Photo of जानें थायराइड उपचार का आयुर्वेदिक नुस्ख़ा…

    जानें थायराइड उपचार का आयुर्वेदिक नुस्ख़ा…

    डॉ.रोहित गुप्ता थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो एडम एप्पल के ठीक नीचे गर्दन में स्थित…

    Read More »
  • Photo of जनभागीदारी टीबी उन्मूलन अभियान की आत्मा-अनुप्रिया

    जनभागीदारी टीबी उन्मूलन अभियान की आत्मा-अनुप्रिया

    जनभागीदारी टीबी उन्मूलन अभियान की आत्मा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने निःक्षय वाहन रवाना कर…

    Read More »
  • Photo of जानें काली खांसी से बचाव के घरेलू उपाय

    जानें काली खांसी से बचाव के घरेलू उपाय

    सुहागा, कलमीशोरा, फिटकरी, काला नमक और यवक्षार को पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। इसे तवे पर भूनकर 2-2 ग्राम की…

    Read More »
  • Photo of खाली पेट इलायची चबाने के अद्भुत फायदे…

    खाली पेट इलायची चबाने के अद्भुत फायदे…

    ब्यूरो निष्पक्ष दस्तक इलायची सिर्फ सात दिनों तक इस छोटी सी आदत को अपनाएं और आप अपने शरीर में सकारात्मक…

    Read More »
  • Photo of पानी में भिगो कर खाएंगे नहीं होगी बीमारियां…

    पानी में भिगो कर खाएंगे नहीं होगी बीमारियां…

    डॉ.रोहित गुप्ता आयुर्वेद के अनुसार अगर किसी चीज को रातभर भिगोकर रखा जाए और अगले दिन उसका सेवन किया जाए…

    Read More »
  • Photo of ड्राई फ्रूट्स लड्डू-सर्दी भगाएं,इम्यूनिटी बढ़ाएं

    ड्राई फ्रूट्स लड्डू-सर्दी भगाएं,इम्यूनिटी बढ़ाएं

    सर्दियों में शरीर की गरमाहट को कायम रखने के लिए आज ड्राई फ्रूट्स के लड्डू बनाने जा रहे हैं. इन्हें…

    Read More »
  • Photo of सिजेरियन सेक्शन के बाद खाद्य पदार्थ और परहेज

    सिजेरियन सेक्शन के बाद खाद्य पदार्थ और परहेज

    डॉ.प्रियंका सौरभ बहुत सी सिजेरियन डिलीवरी, गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं या अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण की जाती है। सी-सेक्शन प्रक्रिया…

    Read More »
  • Photo of मिलावटी दूध से खतरे में सेहत

    मिलावटी दूध से खतरे में सेहत

    विजय गर्ग  देश भर में बच्चे-बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्ति प्रतिदिन दूध और इससे बने उत्पादों का सेवन करते…

    Read More »
  • Photo of बवासीर कारण व निवारण

    बवासीर कारण व निवारण

    डॉ.रुप कुमार बनर्जीहोमियोपैथिक चिकित्सकबवासीर की समस्या आज के समय में सामान्य हो गई है,व्यस्त जीवन शैली,गलत खानपान, भोजन में अत्यधिक मसाले का प्रयोग, चटपटा भोजन करना, जंक फूड का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना, कसरत मेहनत ना करना इत्यादि इसके कई कारण हो सकते हैं। बवासीर, जिसे पायल्स, हेमोरोइड्स और मुलव्याधि भी कहा जाता है, एक भयानक रोग है। यह एक कष्टकारी समस्या है जो दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करती है,आंतरिक, बाहरी या दोनों प्रकार का हो सकता है जिसमें दर्द,जलन, खुजली, खून गिरना और सूजन इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं। शुरू में शर्म के मारे चिकित्सक को दिखाने में हीला हवाली करने पर बाद में यह विकट रूप धारण कर भयंकर कष्ट का कारण बन सकता है। बवासीर कारण व निवारणबवासीर के कारण :- बवासीर होने के कई कारण हो सकते हैं। इनके बारे में जानकारी हमे सतर्क रहने में मदद कर सकती है। बवासीर के पांच मुख्य कारण हैं :- मल त्याग करते समय जोर लगाना,अव्यवस्थित जीवनशैली,अपेक्षाकृत पानी कम पीना,आहार में फाइबर की कमी,मोटापा,गर्भावस्था।बवासीर के प्रकार :- बवासीर को उसकी गंभीरता और अन्य कारकों के आधार पर दो प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है। वे दो प्रमुख प्रकार हैं – खूनी बवासीर व बादी बवासीर।खूनी बवासीर :- बवासीर उभरती हुई और सूजी हुई नसों के कारण आंतरिक या बाहरी गुदा में होती है। ब्लीडिंग बवासीर उन फूली हुई नसों के टूटने से होती है जो बार-बार मल त्याग करने या बैठते समय फट जाती है। खूनी बवासीर से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए :- प्रतिदिन खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें, फाइबर युक्त आहार लें, मल त्याग करते समय ज्यादा जोर न लगाएं, नियमित रूप से सप्ताह में कम से कम पांच दिन अवश्य व्यायाम करें,लंबे समय तक बैठे न रहें।खूनी बवासीर का इलाज :- इसके उपचार की विधि समस्या की गंभीरता पर निर्भर करती है हल्के मामलों में, दवाइयों और दवाओं का उपयोग करके सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। होम्योपैथिक विभाग के द्वारा खूनी बवासीर को जड़ से ठीक किया जा सकता है । बशर्ते इसके लिए मरीज को धैर्यपूर्वक काफी दिनों तक इस बीमारी का इलाज करवाना चाहिए और चिकित्सक के बिना पूछे दवा नहीं बंद करना चाहिए।बादी बवासीर :- बादी बवासीर एक गंभीर मलाशय संबंधी समस्या होती है, जिसमें मलाशय की नसें सूज जाती हैं और मलाशय से बाहर लटकती हैं। अंग्रेजी में यह “Grade 3 or Grade 4 hemorrhoids” के रूप में भी जाना जाता है।बादी बवासीर के लक्षण :- बादी बवासीर के लक्षणों में खून आना, खुजली, सूजन और दर्द शामिल हैं। इसके साथ ही, मलत्याग के समय भी बादी बवासीर के रोगी को बहुत दर्द होता है और मलाशय में खुजली हो सकती है। बादी बवासीर के लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए और समय रहते उपचार के लिए चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए ना कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के बाजार से दवा खरीद के खाना चाहिए।बवासीर के महत्वपूर्ण उपचार :- बवासीर का इलाज स्थिति के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। सामान्य मामलों में उच्च फाइबर आहार लेना, शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखना और नियमित व्यायाम करना जैसी जीवनशैली में परिवर्तन करने से हल किया जा सकता है। खुजली और असहजता जैसे सामान्य लक्षणों का इलाज क्रीम और उबटनों के इस्तेमाल से किया जा सकता है। गंभीर स्थितियों में चिकित्सा उपचार की आवश्यकता हो सकती है। यदि आप बवासीर के लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श करें  ताकि आपकी व्यक्तिगत उपचार आवश्यकताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ उपचारों का निर्धारण किया जा सके। होम्योपैथी एक ऐसी विधा है जिससे बवासीर की बीमारी को जड़ से ठीक किया जा सकता है।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :-  बवासीर क्यों होता है?       बवासीर कई कारणों से हो सकता है। कुछ मुख्य कारण में मल त्याग करते समय जोर लगाना, बैठने की लम्बी अवधि, कब्ज या दस्त का अधिक समय तक होना, अत्यधिक मोटापा, और गर्भावस्था शामिल है2. बवासीर की शुरुआत कैसे होती है?बवासीर उस समय शुरू होता है जब गुदा और मलाशय क्षेत्र की नसें सूज और फूल जाती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। बवासीर की शुरुआती अवस्था में, लोगों को गुदा क्षेत्र में दर्द, खुजली और सूजन जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में मल त्याग करते समय खून भी निकल सकता है।3. बवासीर में क्या खाना चाहिए?बवासीर के मरीज को आहार में फाइबर से भरपूर फल और सब्जी जैसे कि गाजर, सेब, पपीता, अनार, लौकी,पत्तागोभी,आदि, दालें, हरी सब्जियां और उनके सूप अधिक पानी पीना, नारियल पानी, आदि लेने की सलाह दी जाती है।4. बवासीर होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?बवासीर के मरीज को अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों की सूची में तले हुए और मसालेदार खाद्य पदार्थ, तीखे और तले हुए नमकीन स्नैक्स, तली हुई चीजें, मिर्च-मसाला वाले खाद्य पदार्थ, बहुत ज्यादा चाट पकौड़ी,जंक फूड टोमेटो सॉस आदि शामिल हैं।5. बवासीर जड़ से खत्म कैसे होता है?बवासीर को जड़ से खत्म करने के लिए कुछ मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:सही खान-पानपानी का सेवननियमित व्यायाम:चिकित्सा–बिना पूछे चिकित्सक से दवा बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए। बवासीर कारण व निवारण

    Read More »
Back to top button